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दहेज उत्पीड़न से मौत का आरोप: ट्विशा शर्मा केस ने उठाए पुलिस और व्यवस्था पर सवाल

राष्ट्रीय | परवेज़ खान | ABC NATIONAL NEWS | भोपाल | 1 जून 2026

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 33 वर्षीय पूर्व मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। दहेज उत्पीड़न और कथित संस्थागत पक्षपात के आरोपों के बीच इस मामले ने न केवल न्याय व्यवस्था बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले में सीबीआई ने 28 मई को सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया। उनसे पहले उनके पुत्र और ट्विशा के पति समर्थ सिंह को भी हिरासत में लिया जा चुका था। यह कार्रवाई उस समय हुई जब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्थानीय अदालत द्वारा दी गई अग्रिम जमानत को निरस्त कर दिया।

ट्विशा शर्मा 12 मई की रात अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं। उनके परिवार का आरोप है कि विवाह के बाद से ही उन्हें दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि शुरुआती जांच के दौरान भोपाल पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और प्रभावशाली ससुराल पक्ष को लाभ पहुंचाने की कोशिश की।

मृतका की मां रेखा शर्मा और उनके परिजनों ने लगातार न्याय की मांग करते हुए कहा कि उनकी बेटी को सुनियोजित तरीके से मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का शिकार बनाया गया। दूसरी ओर, ससुराल पक्ष ने आरोपों से इनकार किया है। इस बीच टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर चल रही बहस ने मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।

यह मामला एक बार फिर देश में दहेज प्रथा और विवाह के बाद महिलाओं के साथ होने वाले उत्पीड़न की समस्या को सामने लाया है। महिला अधिकार संगठनों का कहना है कि हर वर्ष हजारों महिलाएं दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना का सामना करती हैं, लेकिन प्रभावशाली परिवारों से जुड़े मामलों में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ट्विशा शर्मा केस केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि यह उन संस्थागत कमियों की भी याद दिलाता है जो कई बार पीड़ित पक्ष के न्याय के रास्ते को कठिन बना देती हैं। अब पूरे देश की नजर सीबीआई जांच और अदालत की आगामी कार्यवाही पर टिकी हुई है।

इस मामले ने एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दिया है—क्या बेटियों को केवल दहेज के कारण आज भी अपनी जान गंवानी पड़ रही है, और क्या समाज तथा व्यवस्था इस चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने में सफल हो पा रहे हैं?

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