अंतरराष्ट्रीय/ कूटनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 27 अक्टूबर 2026
जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर स्टाइनमायर मंगलवार से चीन की छह दिवसीय राजकीय यात्रा शुरू कर रहे हैं। करीब आठ साल बाद हो रही उनकी चीन यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब वैश्विक व्यापार, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और यूरोप-चीन संबंधों को लेकर कई सवाल सामने हैं। इस दौरे में दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग, तकनीकी नवाचार और आपसी विश्वास मजबूत करने पर जोर रहने की उम्मीद है।
चीन की सरकारी मीडिया CGTN के अनुसार, स्टाइनमायर अपनी यात्रा की शुरुआत पूर्वी चीन के आनहुई प्रांत से करेंगे। यहां वह एक पारंपरिक गांव का दौरा करेंगे और हेफेई शहर में फॉक्सवैगन की चीन स्थित टेक्नोलॉजी कंपनी का कामकाज देखेंगे। इसके बाद वह बीजिंग पहुंचेंगे, जहां ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में औपचारिक बातचीत और पेकिंग विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों से मुलाकात का कार्यक्रम है।
चीन का संदेश—विश्वास बढ़े, सहयोग गहरा हो
चीन के विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई है कि इस यात्रा से दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास मजबूत होगा, सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे और संयुक्त तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। बीजिंग का कहना है कि चीन-जर्मनी संबंधों को आगे बढ़ाना चीन और यूरोप के बीच स्थिर रिश्तों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
यह यात्रा केवल औपचारिक कूटनीतिक मुलाकातों तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के सामने आर्थिक हितों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ व्यापारिक मतभेदों और रणनीतिक चुनौतियों को संभालने की भी जिम्मेदारी है।
251.8 अरब यूरो का व्यापारिक रिश्ता
जर्मनी के संघीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में चीन और जर्मनी के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 251.8 अरब यूरो तक पहुंच गया। यह पिछले वर्ष की तुलना में 2.1 प्रतिशत अधिक था। इस आंकड़े के साथ चीन एक बार फिर जर्मनी का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना।
दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं विनिर्माण, औद्योगिक तकनीक और आपूर्ति शृंखलाओं के जरिए एक-दूसरे से जुड़ी हैं। जर्मनी की कंपनियों के लिए चीन बड़ा बाजार है, जबकि चीनी औद्योगिक और तकनीकी क्षमता जर्मन कंपनियों के उत्पादन तथा अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
फॉक्सवैगन का हेफेई केंद्र इस सहयोग का एक उदाहरण है। CGTN की रिपोर्ट के अनुसार, यहां कंपनी का जर्मनी के वोल्फ्सबर्ग स्थित मुख्यालय के बाहर बुद्धिमान और कनेक्टेड वाहनों के लिए सबसे बड़ा वैश्विक सॉफ्टवेयर अनुसंधान एवं विकास केंद्र है। इससे पता चलता है कि चीन में विकसित हो रही तकनीक जर्मन कंपनियों की वैश्विक रणनीति का हिस्सा बन चुकी है।
जर्मन कंपनियां चीन में निवेश बढ़ाने की इच्छुक
चीन में जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स के मई 2026 के सर्वेक्षण के मुताबिक, सर्वे में शामिल 61 प्रतिशत जर्मन कंपनियों ने अगले दो वर्षों में चीन में निवेश बढ़ाने की योजना जताई। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 के बाद यह सबसे ऊंचा अनुपात था।
चीन में जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स के उत्तरी चीन क्षेत्र के कार्यकारी निदेशक ओलिवर ओम्स ने भी इस बात पर जोर दिया कि चीन में जर्मन कंपनियों द्वारा विकसित ज्ञान और तकनीक का लाभ उनके जर्मन मुख्यालयों तक पहुंच सकता है। जर्मन कारोबारी समुदाय ने ऐसी नीतियों की वकालत की है, जिनमें जोखिम और आर्थिक लाभ का संतुलित आकलन हो तथा सभी क्षेत्रों पर एक जैसी पाबंदियां लगाने के बजाय खास क्षेत्रों की चुनौतियों पर ध्यान दिया जाए।
हालांकि, निवेश की इच्छा का अर्थ यह नहीं है कि दोनों देशों के बीच सभी मतभेद खत्म हो गए हैं। बाजार तक पहुंच, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा, व्यापारिक नियम और रणनीतिक निर्भरता जैसे मुद्दे अब भी संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं।
जर्मनी और यूरोपीय संघ के लिए भी अहम दौरा
स्टाइनमायर की यात्रा का महत्व जर्मनी और चीन के द्विपक्षीय संबंधों से आगे बढ़कर पूरे यूरोप तक फैला है। जर्मनी यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और यूरोपीय संघ की चीन नीति को आकार देने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
CGTN के मुताबिक, जर्मन राष्ट्रपति कार्यालय ने इस यात्रा को जर्मनी के राष्ट्राध्यक्ष के साथ-साथ यूरोपीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण बताया है। यात्रा से पहले यूरोपीय संघ के व्यापार आयुक्त मारोश शेफचोविच के साथ विचार-विमर्श और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ समन्वय का भी उल्लेख किया गया है।
व्यापार, औद्योगिक सहयोग और बाजार तक पहुंच जैसे मुद्दे चीन और यूरोपीय संघ के संबंधों में लगातार महत्वपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे में बीजिंग में होने वाली बातचीत का असर दोनों देशों के साथ-साथ यूरोप की व्यापक आर्थिक और कूटनीतिक दिशा पर भी पड़ सकता है।
मतभेदों के बीच संवाद की परीक्षा
चीन ने कहा है कि पिछले 54 वर्षों में आपसी सम्मान और विश्वास ने चीन-जर्मनी संबंधों को आधार दिया है तथा पारस्परिक लाभ सहयोग की सफलता के लिए जरूरी है। लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में इस सिद्धांत को व्यवहार में उतारना दोनों देशों के लिए बड़ी चुनौती होगी।
स्टाइनमायर की छह दिवसीय यात्रा यह परखने का अवसर होगी कि जर्मनी और चीन आर्थिक हितों को आगे बढ़ाते हुए अपने मतभेदों को किस हद तक बातचीत के जरिए संभाल सकते हैं। यदि दोनों पक्ष व्यापार, तकनीक और औद्योगिक सहयोग में ठोस प्रगति करते हैं, तो इसका लाभ चीन-जर्मनी संबंधों के साथ-साथ चीन और यूरोप के व्यापक रिश्तों को भी मिल सकता है।



