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एक्सपायर्ड खाना पकाने से सुरक्षित हो जाता है? जवाब जानना हर ग्राहक के लिए जरूरी

बेंगलुरु में बड़ी मात्रा में खराब और एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री मिलने के बाद सवाल गंभीर—क्या तेज गर्मी, उबालना या पकाना खराब मांस, मछली, दूध और पनीर के खतरे को खत्म कर सकता है?

हेल्थ/ लाइफस्टाइल | ABC NATIONAL NEWS | बेंगलुरु | 11 अगस्त 2026

बेंगलुरु की कार्रवाई ने उठाया बड़ा सवाल

बेंगलुरु में खाद्य सुरक्षा विभाग की हालिया जांच ने सिर्फ होटल और रेस्तरां की लापरवाही पर सवाल नहीं उठाए, बल्कि आम उपभोक्ता के सामने भी एक बेहद जरूरी सवाल खड़ा कर दिया है—अगर खाना एक्सपायर हो चुका हो या मांस, मछली, दूध और पनीर खराब हो चुके हों, तो क्या उन्हें अच्छी तरह पकाकर खाना सुरक्षित बनाया जा सकता है? शहर में 60 तीन-स्टार और पांच-स्टार होटलों की जांच के दौरान बड़ी मात्रा में एक्सपायर्ड दूध, खराब मांस और अन्य deteriorated खाद्य पदार्थ मिलने के बाद यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है। खाद्य पदार्थ खराब होने की प्रक्रिया केवल उनकी बाहरी शक्ल बदलने तक सीमित नहीं रहती; गलत तापमान, लंबे समय तक भंडारण और सूक्ष्मजीवों की वृद्धि भोजन को स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण बना सकती है।

पकाना हर खतरे का इलाज नहीं

सबसे बड़ी गलतफहमी यही है कि तेज गर्मी में पकाने से खराब भोजन पूरी तरह सुरक्षित हो जाता है। कई खाद्यजनित सूक्ष्मजीव गर्मी से नष्ट हो सकते हैं, लेकिन भोजन के खराब होने के दौरान पैदा हुए कुछ विषैले पदार्थ या अन्य रासायनिक बदलाव केवल सामान्य खाना पकाने से समाप्त हों, यह जरूरी नहीं है। इसलिए यदि किसी खाद्य पदार्थ में पहले ही खराब होने के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं, तो उसे केवल पकाकर खाने को सुरक्षित मान लेना जोखिम भरा हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार खराब या दूषित भोजन से मतली, उल्टी, पेट में ऐंठन, दस्त और कभी-कभी बुखार जैसी समस्याएं हो सकती हैं; गंभीर मामलों में लगातार उल्टी या दस्त से शरीर में पानी की कमी भी हो सकती है।

मांस और मछली में जोखिम ज्यादा गंभीर हो सकता है

मांस और मछली जैसे अत्यधिक जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों में भंडारण की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण होती है। अगर इन्हें पर्याप्त ठंडे तापमान पर नहीं रखा गया या लंबे समय तक गलत परिस्थितियों में रखा गया, तो सूक्ष्मजीव तेजी से बढ़ सकते हैं। ऐसी स्थिति में केवल बाद में अच्छी तरह पकाना इस बात की गारंटी नहीं देता कि भोजन पूरी तरह सुरक्षित हो गया है। खासकर जब मांस से असामान्य गंध आए, उसका रंग या बनावट असामान्य लगे अथवा पैकेजिंग फूली हुई या क्षतिग्रस्त दिखाई दे, तो उसे जोखिम लेकर इस्तेमाल करने के बजाय फेंकना अधिक सुरक्षित विकल्प है।

दूध और पनीर को लेकर भी सावधानी जरूरी

दूध, पनीर और दूसरे डेयरी उत्पादों के मामले में भी यही सावधानी लागू होती है। एक्सपायरी के बाद हर उत्पाद तुरंत जहरीला हो जाएगा, ऐसा कहना सही नहीं है, क्योंकि खाद्य सुरक्षा पर तापमान, पैकेजिंग और वास्तविक भंडारण परिस्थितियों का भी प्रभाव पड़ता है। लेकिन यदि डेयरी उत्पाद में खट्टी या असामान्य गंध, फफूंदी, रंग में बदलाव, पैकेज फूलना या दूसरी खराबी के संकेत दिखाई दें, तो उसे पकाकर या उबालकर खाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों के मामले में जोखिम लेने से बचना जरूरी है।

सिर्फ एक्सपायरी तारीख नहीं, स्टोरेज भी महत्वपूर्ण

किसी खाद्य पदार्थ की सुरक्षा केवल पैकेट पर लिखी तारीख देखकर तय नहीं की जा सकती। भोजन को किस तापमान पर रखा गया, पैकेट खुला था या बंद, कितनी देर बाहर रहा और क्या उसे लगातार सही तरीके से रेफ्रिजरेट किया गया—ये सभी बातें महत्वपूर्ण हैं। इसी वजह से खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञ केवल तारीख देखने के बजाय उत्पाद की स्थिति और उसके भंडारण इतिहास को भी महत्व देते हैं। खासकर मांस, मछली और डेयरी जैसे जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों में ‘ठंड की श्रृंखला’ यानी उचित तापमान बनाए रखना बेहद जरूरी है।

बदबू न आए तो भी खाना हमेशा सुरक्षित नहीं

एक और आम धारणा है कि अगर भोजन से बदबू नहीं आ रही तो वह सुरक्षित होगा। यह भी भरोसेमंद सुरक्षा परीक्षण नहीं है। कुछ हानिकारक सूक्ष्मजीव ऐसे हो सकते हैं जिनकी मौजूदगी का पता केवल देखकर या सूंघकर नहीं चलता। इसलिए केवल अपनी इंद्रियों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना कि खाना सुरक्षित है, हमेशा सही नहीं होगा। खाद्य सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण आधार सही भंडारण, उचित तापमान, स्वच्छता और सुरक्षित हैंडलिंग है।

बेंगलुरु की कार्रवाई ने होटल उद्योग पर सवाल उठाए

बेंगलुरु में 60 होटलों की जांच के दौरान बड़ी मात्रा में खराब और एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री मिलने से होटल उद्योग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठते हैं। जिस ग्राहक को किसी बड़े होटल में भोजन परोसा जाता है, वह स्वाभाविक रूप से मानता है कि वहां खाद्य सुरक्षा के मानकों का कठोरता से पालन किया जा रहा होगा। ऐसे में एक्सपायर्ड मांस, मछली, दूध या अन्य खाद्य सामग्री का मिलना केवल स्टोर मैनेजमेंट की गलती नहीं माना जा सकता; यह खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर कमजोरी का संकेत भी हो सकता है।

ग्राहक क्या करे?

अगर किसी खाद्य पदार्थ की तारीख निकल चुकी है और साथ ही उसके रंग, गंध, बनावट या पैकेजिंग में खराबी दिखाई देती है, तो उसे पकाकर बचाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। मांस, मछली और डेयरी जैसे जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों को विशेष सावधानी के साथ संभालना चाहिए। संदिग्ध भोजन को चखकर यह जांचना भी उचित तरीका नहीं है। किसी खाद्य पदार्थ की सुरक्षा को लेकर गंभीर संदेह हो तो उसे इस्तेमाल न करना ही सुरक्षित विकल्प है।

खाने की बर्बादी और स्वास्थ्य जोखिम में फर्क समझना होगा

भोजन को बर्बाद होने से बचाना अच्छी आदत है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि खराब हो चुके भोजन को किसी भी कीमत पर इस्तेमाल किया जाए। एक तरफ खाद्य पदार्थों की बर्बादी कम करना जरूरी है, दूसरी तरफ स्वास्थ्य जोखिम को नजरअंदाज करना भी खतरनाक हो सकता है। सही तरीका है—भोजन को शुरुआत से सही तरीके से स्टोर करना, समय पर इस्तेमाल करना और संदिग्ध रूप से खराब हो चुके खाद्य पदार्थों को जोखिम लेकर खाने के बजाय त्याग देना।

सबसे जरूरी संदेश—खराब खाना ‘पकाकर’ हमेशा सुरक्षित नहीं होता

बेंगलुरु की कार्रवाई और खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों की चेतावनी एक सीधा संदेश देती है: खराब या संदिग्ध भोजन को सिर्फ तेज गर्मी में पकाकर सुरक्षित मान लेना सही नहीं है। कुछ बैक्टीरिया गर्मी से नष्ट हो सकते हैं, लेकिन हर जोखिम का समाधान खाना पकाना नहीं है। इसलिए मांस, मछली, दूध, पनीर और दूसरे जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों में सबसे महत्वपूर्ण हथियार है—सही भंडारण, स्वच्छता, समय पर इस्तेमाल और खराबी के संकेत मिलने पर सावधानी। याद रखें—भोजन पर थोड़ी बचत की कीमत अगर स्वास्थ्य से चुकानी पड़े, तो वह बचत नहीं, बड़ा जोखिम है।

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