राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 2 नवंबर 2026
मणिपुर में लगातार जारी जातीय हिंसा, बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और राजनीतिक संकट को लेकर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने सोमवार को नई दिल्ली में प्रदेश के नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास 10, राजाजी मार्ग पर हुई इस बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल और मणिपुर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
बैठक में मणिपुर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह, कांग्रेस विधायक दल के नेता के. मेघचंद्र, मणिपुर के AICC प्रभारी सप्तगिरि शंकर उलाका सहित अन्य नेता मौजूद रहे। बैठक में राज्य की मौजूदा कानून-व्यवस्था, लगातार जारी हिंसा, लोगों में असुरक्षा, विस्थापित परिवारों की स्थिति और आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा हुई।
खड़गे का हमला—बीजेपी की उदासीनता और अक्षमता ने मणिपुर को संकट में धकेला
बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मणिपुर की स्थिति को लेकर बीजेपी नेतृत्व पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी का राजनीतिक अहंकार, उदासीनता और गंभीर अक्षमता इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती राज्य को लंबे संकट में धकेल चुकी है।
खड़गे ने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था बिगड़ने के बावजूद बीजेपी नेतृत्व ने जवाबदेही लेने से परहेज किया और हालात लगातार बिगड़ते रहे।
उन्होंने कहा कि मणिपुर के लोगों को शांति, स्थिरता, सम्मान और न्याय चाहिए। कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में राज्य के लोगों के साथ खड़ी रहेगी और बीजेपी के कुशासन को समाप्त करने के लिए संघर्ष करेगी।
खड़गे ने शांति, आपसी विश्वास, मेल-मिलाप और विकास को मणिपुर की प्राथमिक जरूरत बताया।
राहुल गांधी ने प्रदेश नेतृत्व के साथ की राजनीतिक और संगठनात्मक चर्चा
राहुल गांधी ने मणिपुर कांग्रेस के नेताओं से राज्य के जमीनी हालात और लोगों की समस्याओं का ब्यौरा लिया। बैठक में हिंसा से प्रभावित इलाकों, विस्थापित परिवारों की सुरक्षा, सामान्य जनजीवन की बहाली और राजनीतिक समाधान की जरूरत पर विचार-विमर्श हुआ।
कांग्रेस नेतृत्व के सामने एक बड़ी चुनौती आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करना भी है। मणिपुर विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। ऐसे में पार्टी राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों और संगठनात्मक तैयारियों की समीक्षा कर रही है।
बैठक में मौजूद नेताओं ने राज्य में स्थायी शांति बहाल करने और लोगों के बीच विश्वास कायम करने की जरूरत पर जोर दिया।
इम्फाल में बड़ा प्रदर्शन, SoO समझौता समाप्त करने की मांग
कांग्रेस की यह बैठक इम्फाल में विभिन्न समुदायों के लोगों की बड़ी रैली के बाद हुई है। Coordinating Committee on Manipur Integrity (COCOMI) की ओर से आयोजित इस प्रदर्शन में पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों के लोगों ने भाग लिया।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में कुकी उग्रवादी संगठनों के साथ हुए Suspension of Operations (SoO) समझौते को समाप्त करना और हिंसा के कारण विस्थापित हुए लोगों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित करना शामिल था।
SoO समझौता कुकी उग्रवादी संगठनों और सरकार के बीच संघर्षविराम तथा बातचीत की व्यवस्था से जुड़ा है। इसके भविष्य को लेकर मणिपुर में लंबे समय से राजनीतिक और सामुदायिक विवाद बना हुआ है। समझौते की अवधि समाप्त होने और उसके आगे जारी रहने को लेकर भी राज्य में तनाव बढ़ा है।
इम्फाल की रैली में अलग-अलग समुदायों के प्रतिनिधियों की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और सुरक्षा की गारंटी को भी प्रमुख मांग बनाया।
ताजा हिंसा ने फिर बढ़ाई चिंता
मणिपुर में शांति बहाली की चुनौतियों के बीच हिंसा की नई घटनाओं ने हालात को और गंभीर बनाया है। 1 नवंबर को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, दो अलग-अलग घटनाओं में पांच कुकी पुरुषों की मौत हुई। पुलिस के मुताबिक, नोनी जिले में शनिवार को अज्ञात हथियारबंद लोगों के बीच गोलीबारी में तीन लोगों की जान गई। वहीं, कांगपोकपी जिले में पहले से लापता दो लोगों के शव सुरक्षा अभियान के दौरान मिले।
इन हत्याओं के बाद राज्य के अलग-अलग हिस्सों में तनाव और विरोध प्रदर्शन की खबरें सामने आईं। एक कुकी आदिवासी संगठन ने इन हत्याओं के लिए नगा अलगाववादी समूहों को जिम्मेदार ठहराया, जबकि राज्य में समुदायों के बीच पहले से मौजूद तनाव ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।
मई 2023 में शुरू हुई जातीय हिंसा के बाद से मणिपुर में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों परिवार विस्थापित हुए हैं। सितंबर 2026 में राज्य विधानसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, 31 अगस्त 2026 तक हिंसा में कम से कम 306 लोगों की मौत और 49 लोगों के लापता होने का आंकड़ा दर्ज किया गया था।
केसी वेणुगोपाल ने भी बीजेपी पर साधा निशाना
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मणिपुर और उत्तराखंड जैसे बीजेपी शासित राज्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि रामलीला मैदान में दिखाई दिया जनाक्रोश इन राज्यों में बढ़ती राजनीतिक नाराजगी की झलक है।
उन्होंने बीजेपी के शासन मॉडल पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि नफरत, लूट, जमीन पर कब्जे और बदइंतजामी ने इन राज्यों की स्थिति खराब की है। वेणुगोपाल ने कहा कि मणिपुर जातीय संघर्ष की आग में जल रहा है और राज्य के लोग शांति तथा जवाबदेही चाहते हैं।
2027 चुनाव से पहले कांग्रेस की रणनीति
मणिपुर में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह बैठक कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। पार्टी नेतृत्व राज्य में अपनी संगठनात्मक स्थिति मजबूत करने, जनता के बीच पहुंच बढ़ाने और हिंसा तथा विस्थापन जैसे मुद्दों को चुनावी विमर्श के केंद्र में रखने की तैयारी कर रहा है।
मणिपुर का संकट अब केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गया है। यह विस्थापित परिवारों की वापसी, विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और स्थायी शांति से जुड़ा सवाल बन चुका है।
कांग्रेस की बैठक का संदेश स्पष्ट है—मणिपुर में शांति, सुरक्षा और न्याय की मांग को लेकर पार्टी संघर्ष जारी रखेगी। अब प्रदेश के लोगों की निगाहें इस बात पर हैं कि राजनीतिक दलों की घोषणाएं जमीन पर स्थायी शांति और सुरक्षित वापसी का रास्ता कब तैयार करेंगी।
मणिपुर को भाषण नहीं, स्थायी शांति चाहिए। विस्थापितों को आश्वासन नहीं, सुरक्षित घर वापसी चाहिए और हिंसा से प्रभावित लोगों को न्याय चाहिए।



