राष्ट्रीय/ उत्तर प्रदेश | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/ लखनऊ | 3 नवंबर 2026
भारतीय पत्रकारिता ने अपने एक ऐसे वरिष्ठ और अनुभवी कलमकार को खो दिया है, जिनकी पहचान केवल प्रतिष्ठित अखबारों में काम करने तक सीमित नहीं थी, बल्कि अपने चुटीले व्यंग्य, तीक्ष्ण टिप्पणियों, राजनीतिक समझ और खास अंदाज में लिखे गए वन लाइनर के लिए भी थी। वरिष्ठ पत्रकार ललित किशोर रायजादा का 2 नवंबर 2026 को दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पत्रकारिता जगत में शोक की लहर है। उनके साथियों, मित्रों और प्रशंसकों ने उन्हें एक ऐसे पत्रकार के रूप में याद किया है, जिनकी लेखनी में अनुभव की गहराई, भाषा में सहजता और टिप्पणी में ऐसी धार होती थी, जो पाठक को देर तक सोचने पर मजबूर कर देती थी।
इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। संगठन की ओर से जारी शोक संदेश में उन्हें पत्रकारिता जगत का सम्मानित और अनुभवी सदस्य बताते हुए श्रद्धांजलि दी गई। 3 नवंबर को दिल्ली के निगमबोध घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस अवसर पर IFWJ के अध्यक्ष गोपाल मिश्रा ने पुष्प अर्पित कर उन्हें अंतिम विदाई दी।
द पायनियर, नेशनल हेराल्ड और पैट्रियट जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में दी सेवाएं
ललित किशोर रायजादा ने अपने लंबे पत्रकारिता जीवन में देश के कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों के साथ काम किया। द पायनियर, नेशनल हेराल्ड और पैट्रियट जैसे अखबारों से उनका जुड़ाव रहा। इन संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने भारतीय राजनीति, सामाजिक घटनाक्रम और सार्वजनिक जीवन को करीब से देखा और समझा। उनका पत्रकारिता अनुभव उस दौर से जुड़ा था, जब समाचार पत्रों में विचार, विश्लेषण और संपादकीय लेखन की अपनी अलग अहमियत हुआ करती थी।
उनकी लेखनी में केवल घटनाओं का विवरण नहीं होता था, बल्कि घटनाओं के पीछे छिपे राजनीतिक और सामाजिक संदर्भों को समझने की कोशिश भी दिखाई देती थी। यही वजह थी कि पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव और उनकी टिप्पणियों को गंभीरता से लिया जाता था।
चुटीले व्यंग्य और वन लाइनर के लिए थी खास पहचान
ललित किशोर रायजादा की एक खास पहचान उनका व्यंग्यात्मक लेखन था। वे अपनी बात को लंबे विस्तार के बजाय कभी-कभी एक छोटे, चुटीले और सटीक वाक्य में कहने की क्षमता रखते थे। उनके वन लाइनर में हास्य भी होता था, राजनीतिक समझ भी और कई बार ऐसी टिप्पणी भी, जो किसी बड़े लेख से अधिक प्रभाव छोड़ जाती थी।
पत्रकारिता में व्यंग्य लिखना आसान नहीं होता। इसके लिए विषय की गहरी समझ, भाषा पर पकड़ और परिस्थितियों को अलग नजरिए से देखने की क्षमता चाहिए। रायजादा के लेखन में ये विशेषताएं दिखाई देती थीं। उनके मित्र और साथी उन्हें ऐसे पत्रकार के रूप में याद करते हैं, जो गंभीर विषयों पर भी अपने खास अंदाज में टिप्पणी कर सकते थे। उनकी चुटीली शैली ने उन्हें पत्रकारिता के अपने दौर में एक अलग पहचान दी।
दुबई के अखबारों में भी लगातार लिखते रहे लेख
ललित किशोर रायजादा का लेखन केवल भारतीय समाचार पत्रों तक सीमित नहीं रहा। वे दुबई के अखबारों के लिए भी नियमित रूप से लेख लिखते थे। इससे भारतीय पत्रकारिता और विदेश में बसे भारतीय पाठकों के बीच उनके लेखन का एक अलग संबंध बना रहा। विदेश में प्रकाशित होने वाले अखबारों के लिए लिखना उनके व्यापक अनुभव और समकालीन मुद्दों पर उनकी निरंतर सक्रियता को भी दर्शाता है।
उनकी लेखनी में भारत की राजनीति, सामाजिक परिस्थितियों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े विषयों की समझ दिखाई देती थी। उम्र के इस पड़ाव पर भी लेखन से उनका जुड़ाव बना रहना पत्रकारिता के प्रति उनके समर्पण को रेखांकित करता है।
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से थे बेहद मधुर और आत्मीय संबंध
ललित किशोर रायजादा के व्यक्तित्व का एक महत्वपूर्ण पहलू उनके राजनीतिक और सामाजिक संपर्क भी थे। पत्रकारिता के लंबे सफर में उन्होंने देश के अनेक राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के साथ आत्मीय संबंध बनाए। दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ भी उनके बेहद मधुर और सौहार्दपूर्ण रिश्ते थे।
राजीव गांधी के साथ उनकी यह आत्मीयता उनके परिचितों और मित्रों के बीच चर्चा का विषय रही। पत्रकारिता और राजनीति के बीच संवाद के उस दौर में रायजादा जैसे अनुभवी पत्रकारों की अपनी अलग जगह थी। वे राजनीतिक घटनाक्रम को केवल खबर के रूप में नहीं देखते थे, बल्कि उससे जुड़े लोगों, परिस्थितियों और व्यापक संदर्भों को भी समझते थे। अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि के लोगों के साथ उनके सहज संबंध उनके मिलनसार व्यक्तित्व और संवाद की क्षमता को दर्शाते थे।
पत्नी ऊषा रायजादा के निधन के बाद गहरा हो गया था अकेलापन
ललित किशोर रायजादा के जीवन का एक बेहद निजी और भावनात्मक पक्ष भी था। इसी वर्ष 22 मार्च को उनकी पत्नी ऊषा रायजादा का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। दोनों ने अपने वैवाहिक जीवन के लगभग 60 वर्ष एक-दूसरे के साथ बिताए थे। छह दशकों का यह साथ केवल एक पारिवारिक रिश्ता नहीं, बल्कि जीवन के हर उतार-चढ़ाव, संघर्ष, खुशियों और जिम्मेदारियों की साझा यात्रा थी।
पत्नी के निधन के बाद रायजादा काफी अकेलापन महसूस करने लगे थे। उम्र के इस पड़ाव पर जीवनसाथी का बिछुड़ना किसी भी व्यक्ति के लिए गहरा भावनात्मक आघात होता है। जिस इंसान के साथ जीवन का लगभग हर दिन और हर अनुभव साझा किया हो, उसके चले जाने से जीवन में एक ऐसी रिक्तता पैदा होती है, जिसे भर पाना आसान नहीं होता। घर की खामोशी से लेकर रोजमर्रा की छोटी-छोटी बातों तक में उस साथी की कमी महसूस होती है, जो दशकों तक जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा हो।
लगभग 60 वर्षों तक साथ रही इस जोड़ी का बिछुड़ना रायजादा के निजी जीवन की एक बड़ी क्षति थी। इतने लंबे साथ के बाद जीवनसाथी का चले जाना व्यक्ति को भीतर तक प्रभावित करता है। उनके जीवन के इस पहलू को याद करते हुए यह समझा जा सकता है कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय और अपने लेखन से दूसरों को प्रभावित करने वाले व्यक्ति के भीतर भी कितनी निजी पीड़ा और अकेलापन हो सकता है।
लेखक भी थे, पत्रकार संगठनों के सक्रिय सदस्य भी
उत्तर प्रदेश वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन (UPWJU) के अध्यक्ष हसीब सिद्दीकी ने रायजादा के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वे संगठन के सक्रिय और सम्मानित सदस्य थे। उन्होंने यूनियन के कई सम्मेलनों में हिस्सा लिया और पत्रकार बिरादरी के बीच अपनी एक अलग छाप छोड़ी।
पत्रकार संगठनों से उनका जुड़ाव केवल औपचारिक सदस्यता तक सीमित नहीं था। वे पत्रकारों के सामूहिक मंचों और बैठकों में सक्रिय भागीदारी करते रहे। उनके अनुभव और संवाद की शैली ने पत्रकार समुदाय में उन्हें सम्मान दिलाया। वे अपने पीछे बेटी रितु, मित्रों, शुभचिंतकों और प्रशंसकों को छोड़ गए हैं।
निगमबोध घाट पर दी गई अंतिम विदाई
2 नवंबर को दिल्ली के एक अस्पताल में उनके निधन के बाद 3 नवंबर को निगमबोध घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान पत्रकारिता जगत से जुड़े लोगों और परिचितों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। IFWJ अध्यक्ष गोपाल मिश्रा ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर अंतिम विदाई दी।
एक ऐसे पत्रकार की विदाई थी, जिसने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा शब्दों, विचारों और सार्वजनिक विमर्श को समर्पित किया। द पायनियर, नेशनल हेराल्ड और पैट्रियट जैसे अखबारों से लेकर दुबई के समाचार पत्रों तक उनकी लेखनी का सफर उनकी पेशेवर यात्रा की व्यापकता को दर्शाता है।
4 नवंबर को यूपी प्रेस क्लब में शोकसभा
ललित किशोर रायजादा को श्रद्धांजलि देने के लिए 4 नवंबर को यूपी प्रेस क्लब में शोकसभा आयोजित की जाएगी। इस अवसर पर पत्रकार, उनके पुराने सहयोगी, मित्र और शुभचिंतक एकत्र होकर उनके साथ बिताए समय और पत्रकारिता में उनके योगदान को याद करेंगे।
एक कलमकार की विदाई, यादें रहेंगी जिंदा
ललित किशोर रायजादा का जाना पत्रकारिता जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनका जीवन इस बात की याद दिलाता है कि पत्रकार की पहचान केवल उसके पद, संस्थान या प्रकाशित लेखों से नहीं बनती, बल्कि उसकी भाषा, विचारों, व्यवहार और लोगों के जीवन में छोड़ी गई छाप से भी बनती है।
उनके चुटीले व्यंग्य, सटीक वन लाइनर, राजनीतिक समझ, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ उनके आत्मीय संबंध, मित्रों के साथ सहज व्यवहार और पत्रकारिता के प्रति उनका लंबा समर्पण उन्हें जानने वालों की स्मृतियों में बना रहेगा। सार्वजनिक जीवन में उन्होंने शब्दों के जरिए अपनी पहचान बनाई, जबकि निजी जीवन में लगभग छह दशकों का वैवाहिक साथ और उसके बाद का अकेलापन उनकी जिंदगी की एक मार्मिक कहानी कहता है।
ABC NATIONAL NEWS की ओर से वरिष्ठ पत्रकार ललित किशोर रायजादा को विनम्र श्रद्धांजलि। उनकी पत्नी ऊषा रायजादा को भी श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए शोकाकुल बेटी रितु, परिवारजनों, मित्रों और पत्रकारिता जगत के सभी साथियों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की जाती है। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करे और परिजनों को इस अपूरणीय क्षति को सहने की शक्ति दे।



