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चीन की नई चाल से बढ़ा दबाव, ट्रंप-शी मुलाकात से पहले अमेरिका खामोश

अंतरराष्ट्रीय | अमित भास्कर | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन/बीजिंग | 30 अप्रैल 2026

अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापार तनाव के बीच एक नई स्थिति पैदा हो गई है। चीन ने हाल ही में कुछ ऐसे नए व्यापार नियम लागू किए हैं, जिनसे अमेरिकी कंपनियों और कारोबारियों में चिंता बढ़ गई है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इन नियमों पर अमेरिका की तरफ से अब तक कोई खुली और सख्त प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

दरअसल, चीन ने ऐसे नियम बनाए हैं, जिनके तहत अगर कोई विदेशी कंपनी चीन से अपना कारोबार या सप्लाई चेन हटाने की कोशिश करती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। आसान शब्दों में समझें तो अगर कोई कंपनी चीन पर निर्भरता कम करना चाहती है, तो उसे जांच, पाबंदी या दूसरे दबावों का सामना करना पड़ सकता है।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका खुद कंपनियों को चीन पर निर्भरता कम करने की सलाह दे रहा है। अमेरिका चाहता है कि दवाइयों, खनिजों और तकनीक जैसे अहम क्षेत्रों में वह चीन से दूरी बनाए। लेकिन चीन के नए नियम इस दिशा में एक तरह की रोक लगाने जैसे माने जा रहे हैं।

यह कदम ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली अहम बैठक से ठीक पहले उठाया गया है। ऐसे में माना जा रहा है कि चीन इस कदम के जरिए अमेरिका पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि बातचीत में उसे बढ़त मिल सके।

अमेरिका के कुछ अधिकारियों और कारोबारी संगठनों ने इन नियमों को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर चीन इस तरह के कदम उठाता है, तो विदेशी कंपनियों के लिए काम करना मुश्किल हो जाएगा। कई कंपनियां पहले ही अपनी सप्लाई चेन भारत और दूसरे देशों में ले जाने की योजना बना रही थीं, लेकिन अब यह फैसला आसान नहीं रहेगा।

ट्रंप प्रशासन इस मुद्दे पर खुलकर कुछ कहने से बचता नजर आ रहा है। माना जा रहा है कि अमेरिका फिलहाल टकराव बढ़ाने के बजाय बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहता है। लेकिन विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि ज्यादा चुप्पी अमेरिका की कमजोरी के तौर पर भी देखी जा सकती है।चीन के इस कदम ने साफ कर दिया है कि वैश्विक व्यापार की इस लड़ाई में अब दबाव और रणनीति दोनों ही खुलकर सामने आ रहे हैं। आने वाले दिनों में ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात से यह तय होगा कि यह टकराव कम होगा या और तेज़।

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