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चीन का नया दावा: समुद्र में घूम रहे हैं ‘जासूस कछुए’ और ‘जासूस मछलियां’, विदेशी ताकतों पर गंभीर आरोप

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग/नई दिल्ली | 13 जून 2026

चीन ने एक बार फिर दुनिया को चौंकाने वाला दावा किया है। इस बार बीजिंग का कहना है कि विदेशी खुफिया एजेंसियां उसके समुद्री क्षेत्रों में जासूसी के लिए अत्याधुनिक तकनीक से लैस “जासूस कछुओं” और “जासूस मछलियों” का इस्तेमाल कर रही हैं। चीन के राज्य सुरक्षा मंत्रालय (MSS) ने आरोप लगाया है कि समुद्र के भीतर एक “अदृश्य गुप्त युद्ध” चल रहा है, जिसमें विदेशी एजेंसियां संवेदनशील समुद्री और सैन्य जानकारी जुटाने में लगी हुई हैं।

चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीचैट पर जारी एक आधिकारिक पोस्ट में मंत्रालय ने कहा कि कई समुद्री जीवों के शरीर पर सेंसर और निगरानी उपकरण लगाए गए पाए गए हैं। इन उपकरणों के जरिए समुद्र के तापमान, लवणता, समुद्री धाराओं और अन्य महत्वपूर्ण आंकड़ों को वास्तविक समय में एकत्र कर उपग्रहों के माध्यम से विदेशों तक भेजा जा रहा है।

हालांकि चीन ने यह नहीं बताया कि ये कथित “जासूस कछुए” और “जासूस मछलियां” कहां पकड़ी गईं और इनके पीछे किस देश या एजेंसी का हाथ है। लेकिन मंत्रालय का दावा है कि इस तरह की गतिविधियां चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही हैं।

चीन ने केवल समुद्री जीवों तक ही आरोप सीमित नहीं रखे। सुरक्षा मंत्रालय का कहना है कि विदेशी संस्थानों द्वारा समुद्र में विशेष सेंसर युक्त बॉय (Buoys) भी तैनात किए गए हैं, जो चीनी पनडुब्बियों की ध्वनि पहचान कर उनकी गतिविधियों पर नजर रखते हैं। इसके अलावा “वेव ग्लाइडर” नामक सौर और समुद्री तरंगों से संचालित स्वचालित उपकरणों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जो समुद्री सैन्य गतिविधियों और जहाजों की आवाजाही की जानकारी जुटा रहे हैं।

यह पहला मौका नहीं है जब समुद्री जीवों को जासूसी से जोड़कर देखा गया हो। वर्ष 2023 में ब्रिटिश रक्षा खुफिया एजेंसी ने दावा किया था कि रूस ने क्रीमिया स्थित सेवस्तोपोल नौसैनिक अड्डे की सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित डॉल्फिन तैनात की थीं। इन डॉल्फिनों का इस्तेमाल कथित तौर पर दुश्मन गोताखोरों का पता लगाने के लिए किया जा रहा था।

चीन का यह दावा ऐसे समय आया है जब दक्षिण चीन सागर, पूर्वी चीन सागर और ताइवान जलडमरूमध्य को लेकर क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ रहा है। ये इलाके दुनिया के सबसे संवेदनशील सामरिक समुद्री क्षेत्रों में गिने जाते हैं। पिछले वर्ष भी चीन ने दावा किया था कि समुद्र की गहराइयों में ऐसे “लाइटहाउस” पाए गए हैं जो विदेशी पनडुब्बियों को मार्गदर्शन दे सकते हैं और भविष्य के सैन्य संघर्षों की तैयारी का हिस्सा हो सकते हैं।

बीजिंग ने समुद्री जासूसी को रोकने के लिए स्थानीय मछुआरों को भी अभियान में शामिल किया है। चीनी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, समुद्र में जासूसी उपकरण खोजने वाले मछुआरों को 50,000 से 5 लाख युआन (लगभग 6 लाख से 60 लाख रुपये) तक का इनाम दिया जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक के दौर में समुद्री निगरानी और खुफिया गतिविधियां तेजी से विकसित हो रही हैं। हालांकि चीन के ताजा दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन यह स्पष्ट है कि समुद्र अब केवल व्यापार और नौवहन का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक सामरिक प्रतिस्पर्धा का एक महत्वपूर्ण मोर्चा बन चुका है।

चीन के इन आरोपों ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और जासूसी गतिविधियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सवाल यह है कि क्या वास्तव में समुद्र में “जासूस कछुए” और “जासूस मछलियां” तैनात हैं, या यह बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच चीन की सुरक्षा चिंताओं का एक और प्रतिबिंब है। फिलहाल बीजिंग के इस दावे ने दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

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