Home » National » कंगना के अपशब्दों पर संसद गरम, कांग्रेस बोली—माफी मांगें

कंगना के अपशब्दों पर संसद गरम, कांग्रेस बोली—माफी मांगें

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 28 जुलाई 2026

बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत द्वारा CJP के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर की गई तीखी टिप्पणियों पर संसद में जोरदार राजनीतिक विवाद छिड़ गया। कांग्रेस ने कंगना के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए इसे छात्र-छात्राओं और लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन का अपमान बताया तथा उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। कंगना ने जंतर मंतर पर छात्रों के आंदोलन में शामिल लड़कियों को गटर छाप कहा था।

राज्यसभा में कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी और इमरान प्रतापगढ़ी ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि एक निर्वाचित सांसद से इस तरह की भाषा की अपेक्षा नहीं की जा सकती। उनका कहना था कि कंगना ने आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया है, जिससे उनकी भावनाएं आहत हुई हैं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति का सम्मान होना चाहिए और विरोध कर रहे लोगों के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किसी भी जनप्रतिनिधि को शोभा नहीं देता।

विवाद की शुरुआत कंगना रनौत की उस सोशल मीडिया पोस्ट से हुई, जिसमें उन्होंने CJP के नेतृत्व में हुए आंदोलन की आलोचना करते हुए प्रदर्शनकारियों के लिए “जनरेशन गटर” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया और आंदोलन से जुड़े वीडियो को “घृणा पैदा करने वाला” बताया। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

कांग्रेस ने संसद में कहा कि यह आंदोलन देशभर के छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर हुआ था, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे। विपक्षी नेताओं ने दावा किया कि छात्रों के लगातार विरोध प्रदर्शन और अनशन के दबाव में केंद्र सरकार को पीछे हटना पड़ा, जिसके बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया और सरकार ने आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों को स्वीकार किया। उनका कहना था कि ऐसे आंदोलन को अपमानित करना उन हजारों छात्रों का भी अपमान है, जिन्होंने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज बुलंद की।

विपक्ष का तर्क था कि किसी आंदोलन से वैचारिक असहमति हो सकती है, लेकिन उसमें शामिल छात्रों और युवाओं के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। कांग्रेस ने भाजपा से इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने और कंगना रनौत से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।

यह आंदोलन 25 जुलाई को समाप्त हुआ था। आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों पर सहमति जताने के बाद प्रदर्शन समाप्त किया गया। इसके कुछ ही दिनों बाद कंगना रनौत की सोशल मीडिया टिप्पणी सामने आई, जिसने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया।

संसद में उठे इस मुद्दे ने एक बार फिर जनप्रतिनिधियों की भाषा, लोकतांत्रिक विरोध की गरिमा और सार्वजनिक संवाद की मर्यादा पर बहस तेज कर दी है। इस मामले में भाजपा की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted