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बंगाल में डर बनाम लोकतंत्र का खुला खेल: अभिषेक बनर्जी

राष्ट्रीय / पश्चिम बंगाल | ABC NATIONAL NEWS | कोलकाता | 15 अप्रैल 2026

टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि आई-पैक के सह-संस्थापक विनेश चंदेल की गिरफ्तारी, जो बंगाल चुनाव से महज 10 दिन पहले हुई है, सिर्फ चिंताजनक नहीं है—यह निष्पक्ष और समान अवसर वाले चुनाव की मूल भावना को ही हिला देती है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब पश्चिम बंगाल को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की ओर बढ़ना चाहिए, इस तरह की कार्रवाई एक ठंडा संदेश देती है: अगर आप विपक्ष के साथ काम करते हैं, तो अगला निशाना आप हो सकते हैं। यह लोकतंत्र नहीं—यह डराने की राजनीति है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे मामले में दोहरे मापदंड साफ नजर आते हैं। जिन लोगों पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, वे जैसे ही पाला बदलते हैं, उन्हें संरक्षण मिल जाता है, जबकि अन्य लोगों को राजनीतिक रूप से सुविधाजनक समय पर निशाना बनाया जाता है। अब जनता इन बातों को समझने लगी है।

अभिषेक बनर्जी ने कहा कि जब लोकतंत्र की रक्षा करने वाली संस्थाएं ही दबाव के औजार जैसी महसूस होने लगें, तो विश्वास कमजोर होने लगता है। एक तरफ चुनाव आयोग और दूसरी तरफ ईडी, एनआईए और सीबीआई जैसी एजेंसियां सबसे संवेदनशील समय पर सक्रिय हो जाती हैं, जिससे निष्पक्षता के बजाय भय का माहौल बनता है।

उन्होंने कहा कि भारत हमेशा अपने लोकतंत्र पर गर्व करता रहा है—शोर-शराबे वाला, जटिल लेकिन स्वतंत्र। लेकिन आज कई लोग यह सवाल पूछने लगे हैं कि क्या हम अब भी वही देश हैं?

यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात का सवाल है कि क्या हमारी संस्थाएं स्वतंत्र बनी हुई हैं और क्या हर नागरिक, चाहे उसकी राजनीतिक विचारधारा कुछ भी हो, बिना डर के भाग ले सकता है।

उन्होंने कहा कि जब आजादी की जगह डर ले लेता है, तो लोकतंत्र सिर्फ एक शब्द बनकर रह जाता है।

अंत में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी नेतृत्व को चुनौती देते हुए कहा कि 4 और 5 मई को बंगाल आएं, अपने साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और सभी एजेंसियों को लेकर आएं। बंगाल न दबेगा, न चुप रहेगा और न झुकेगा। यह वह जमीन है जो दबाव का जवाब प्रतिरोध से देती है और यह आपको साफ तौर पर दिखा देगी।

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