Home » International » चीन के स्कूल में पढ़ाई के साथ ‘सरकारी खबर’ भी अनिवार्य? रोज 30 मिनट राज्य मीडिया देखने का शेड्यूल वायरल

चीन के स्कूल में पढ़ाई के साथ ‘सरकारी खबर’ भी अनिवार्य? रोज 30 मिनट राज्य मीडिया देखने का शेड्यूल वायरल

हैनान के एक हाईस्कूल के बताए जा रहे टाइमटेबल ने छेड़ी नई बहस—क्या बच्चों की शिक्षा में सरकारी राजनीतिक संदेशों की जगह बढ़ रही है?

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग | 8 सितंबर 2026

स्कूल की पढ़ाई में अब रोज सरकारी समाचार?

चीन के हैनान प्रांत के एक हाईस्कूल का एक कथित टाइमटेबल सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। एएनआई ने द एपोच टाइम्स की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि हाइको नंबर 4 सेकेंडरी स्कूल के वरिष्ठ वर्ग के छात्रों के शेड्यूल में हर दिन चीन के सरकारी प्रसारक के प्रमुख शाम के समाचार कार्यक्रम को देखने के लिए 30 मिनट का समय रखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार छात्रों का दिन सुबह करीब 6:20 बजे शुरू होता है और रात 11 बजे छात्रावास की लाइट बंद होने तक चलता है। शाम 7 बजे समाचार कार्यक्रम के बाद दो लंबे अध्ययन सत्र भी निर्धारित बताए गए हैं।

सवाल सिर्फ खबर देखने का नहीं, खबर के स्रोत का है

किसी स्कूल में छात्रों को देश-दुनिया की खबरों से परिचित कराना अपने आप में असामान्य बात नहीं है। असली विवाद इस बात को लेकर है कि अगर छात्रों को रोज एक निश्चित समय पर राज्य नियंत्रित मीडिया का एक ही समाचार कार्यक्रम देखना अनिवार्य किया जाता है, तो क्या उन्हें दूसरी स्वतंत्र या अलग-अलग विचारों वाली सूचनाओं तक भी पहुंच मिल रही है? रिपोर्ट के अनुसार इसी सवाल ने चीन में ऑनलाइन बहस को जन्म दिया है। एक हाइनान-आधारित अकादमिक ने भी सूचना के अलग-अलग स्रोतों तक छात्रों की पहुंच को महत्वपूर्ण सवाल बताया है।

सोशल मीडिया पर लोगों ने जताई नाराजगी

रिपोर्ट के अनुसार इस टाइमटेबल की तस्वीरें चीनी सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद कुछ लोगों ने छात्रों की बेहद नियंत्रित दिनचर्या की आलोचना की और इसकी तुलना जेल जैसी दिनचर्या से तक की। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि स्कूल के समय में सरकारी समाचार को अनिवार्य रूप से शामिल करने का उद्देश्य शिक्षा है या राजनीतिक संदेश पहुंचाना। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों में इस टाइमटेबल की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसे पूरे चीन के स्कूलों की सामान्य व्यवस्था मानना सही नहीं होगा।

ALSO READ  शवदान या सैन्य सौदा? अमेरिका में खुलासे से मचा बवाल, इज़राइली सैन्य प्रशिक्षण में इस्तेमाल हुए दान किए गए शव!

बचपन से राजनीतिक संदेशों को लेकर भी बहस

इस मामले ने चीन की शिक्षा व्यवस्था में राजनीतिक और वैचारिक शिक्षा को लेकर पुरानी बहस को भी फिर सामने ला दिया है। एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, एक जियांग्सू निवासी ने अपने बच्चे की शिक्षा में रोज झंडा फहराने, राष्ट्रगान और ऐसे पाठ्यक्रम का उल्लेख किया जिसमें कम्युनिस्ट पार्टी को सकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके चार वर्षीय बेटे को ‘रेड सॉन्ग्स’ यानी कम्युनिस्ट क्रांतिकारी विषयों से जुड़े गीत सिखाए जा रहे हैं। इन दावों को भी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है।

क्या शिक्षा का काम सोचने की क्षमता बढ़ाना नहीं?

यह विवाद एक बड़े सवाल को जन्म देता है—क्या बच्चों को किसी एक तय राजनीतिक नजरिए से खबर दिखाना शिक्षा है या उन्हें अलग-अलग स्रोतों से जानकारी लेकर खुद निष्कर्ष निकालना सिखाना ज्यादा जरूरी है? लोकतांत्रिक और आलोचनात्मक शिक्षा का मूल उद्देश्य सिर्फ सूचना देना नहीं, बल्कि सवाल पूछने, तथ्यों को परखने और अलग-अलग दृष्टिकोण समझने की क्षमता विकसित करना माना जाता है। इसलिए अगर किसी स्कूल में सरकारी समाचार को अनिवार्य गतिविधि बनाया गया है, तो यह देखना जरूरी है कि उसके साथ छात्रों को वैकल्पिक और स्वतंत्र सूचना स्रोतों तक भी पहुंच मिलती है या नहीं।

चीन में सूचना नियंत्रण की बहस फिर तेज

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब चीन में मीडिया और सूचना नियंत्रण को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले से बहस चलती रही है। चीन की सरकारी मीडिया संस्थाओं की भूमिका सिर्फ समाचार प्रसारण तक सीमित नहीं मानी जाती, बल्कि वे सरकार और कम्युनिस्ट पार्टी के आधिकारिक संदेशों का भी प्रमुख माध्यम हैं। इसी वजह से स्कूल के टाइमटेबल में सरकारी समाचार के लिए तय समय को लेकर आलोचकों ने इसे सामान्य समाचार देखने की बजाय राजनीतिक संदेशों को छात्रों की रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल करने का उदाहरण बताया है।

ALSO READ  “ईरान-अमेरिका समझौते का ड्राफ्ट तैयार!” : पाकिस्तान की मध्यस्थता से युद्धविराम की उम्मीद तेज

सबसे बड़ा सवाल—बच्चों को खबर चाहिए या सिर्फ एक तय नजरिया?

हाइको के इस स्कूल का मामला कितना व्यापक है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन इसने शिक्षा और राजनीतिक संदेश के बीच की सीमा पर एक गंभीर बहस जरूर खड़ी कर दी है। बच्चों को देश की खबरों से जोड़ना जरूरी है, लेकिन क्या उन्हें यह अधिकार नहीं होना चाहिए कि वे अलग-अलग स्रोतों से खबर पढ़ें, सवाल पूछें और खुद तय करें कि सच क्या है? यही सवाल अब चीन के इस स्कूल टाइमटेबल को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा में है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *