अपराध | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 8 सितंबर 2026
दिल्ली में कानून का खौफ खत्म? मामूली विवाद बना मौत का कारण
दिल्ली के किलोकर गांव में 54 वर्षीय मणिपुरी संगीतकार और संगीत शिक्षक चोंगथम विक्रम सिंह की पीट-पीटकर हत्या ने राजधानी की कानून-व्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा पर बेहद गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार रात करीब 11:30 बजे विक्रम सिंह अपने तीसरी मंजिल स्थित घर से कूड़ा फेंकने नीचे आए थे। घर के बाहर दो ढाबों से जुड़े कुछ कर्मचारियों के तेज शोर और हंगामे पर उन्होंने आपत्ति जताई। इसके बाद विवाद बढ़ गया। आरोप है कि इसके बाद कई लोगों ने उनका पीछा किया, उन्हें तीसरी मंजिल तक घेरा और इमारत के गलियारे में बुरी तरह पीटा। गंभीर रूप से घायल विक्रम सिंह को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन सुबह करीब सात बजे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
तीसरी मंजिल तक पीछा किया, गलियारे में बरसाए वार
मणिपुरी सामाजिक कार्यकर्ता बी. रुचिडा शर्मा के अनुसार, विक्रम सिंह जब विवाद के बाद अपने घर लौट रहे थे, तब हमलावरों ने उनका पीछा किया। तीसरी मंजिल के गलियारे में उन्हें घेरकर जमकर मारपीट की गई। घटना के बाद हमलावर वहां से भाग निकले। दिल्ली पुलिस को रात 1:38 बजे हमले की सूचना मिली। विक्रम सिंह के बेटे ने उन्हें ओखला के निजी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उनकी हालत इतनी गंभीर थी कि उन्हें बचाया नहीं जा सका।
आठ लोगों की पहचान, सात गिरफ्तार और नाबालिग हिरासत में
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी निगरानी और स्थानीय जानकारी के आधार पर मामले में शामिल आठ लोगों की पहचान की है। सात वयस्क आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और 15 वर्षीय एक किशोर को हिरासत में लिया गया है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार लोगों में कुछ पास के ढाबों में डिलीवरी और पैकेजिंग का काम करते थे, जबकि एक आरोपी पिज्जा कियोस्क में काम करता था। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(2) और 3(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
सीसीटीवी ने खोला हमले के बाद का रास्ता
घटना की जांच में सीसीटीवी फुटेज अहम साबित हो रही है। पूर्व मणिपुर मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने भी इमारत की सीसीटीवी फुटेज साझा करते हुए दिल्ली पुलिस से मामले की गहराई से जांच और जल्द न्याय की मांग की। फुटेज में आठ लोगों को घटना के बाद सीढ़ियों से नीचे जाते हुए देखा गया है। हालांकि हमले में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
17 साल दिल्ली में संगीत सिखाया, अंत इतना दर्दनाक
विक्रम सिंह करीब 17 वर्षों से दिल्ली में निजी संगीत शिक्षक के रूप में काम कर रहे थे। संगीत और गिटार उनका जुनून था। परिवार के अनुसार वह अपनी पत्नी और 20 वर्षीय बेटे के साथ रहते थे। एक ऐसे व्यक्ति की जिंदगी सिर्फ इसलिए खत्म हो गई कि उसने अपने घर के बाहर हो रहे शोर पर आपत्ति जताई—यह सवाल घटना को और ज्यादा भयावह बना देता है।
क्या दिल्ली में शोर रोकने की कीमत जान है?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक नागरिक को अपने घर के बाहर हो रहे शोर पर आपत्ति जताने की कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी? क्या मामूली विवाद को हत्या में बदलने वालों के मन में कानून का कोई डर नहीं था? क्या सार्वजनिक शोर-शराबे और उपद्रव पर समय रहते कार्रवाई होती तो यह नौबत आती? और अगर कोई व्यक्ति अपने घर में शांति से रहने की मांग भी नहीं कर सकता, तो राजधानी में आम आदमी की सुरक्षा का मतलब क्या रह जाता है?
सोमवार शाम करीब 100 लोगों ने कैंडल मार्च निकालकर विक्रम सिंह के लिए न्याय की मांग की। अब दिल्ली पुलिस की जिम्मेदारी है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो, हर आरोपी की भूमिका सामने आए और दोष साबित होने पर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई हो। विक्रम सिंह की हत्या सिर्फ एक परिवार से उसके सदस्य को छीनने की घटना नहीं है—यह दिल्ली के सामने खड़ा एक कड़ा सवाल है कि आखिर आम नागरिक को सुरक्षित जीवन जीने का अधिकार कब मिलेगा?




