अपराध/ राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 6 सितंबर 2026
वाइवा परीक्षा के बाद उठी शिकायतों की आवाज
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एक प्रोफेसर के खिलाफ 11 छात्रों ने यौन उत्पीड़न की शिकायत की है। विश्वविद्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मई 2026 में जेएनयू की आंतरिक शिकायत समिति के सामने यह शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद समिति ने मामले की जांच शुरू कर दी और कई छात्रों को उनके बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया। मामला उस समय सामने आया जब मई के पहले सप्ताह में हुई मौखिक परीक्षाओं यानी वाइवा के दौरान प्रोफेसर की ओर से यौन भावनाओं से जुड़े आपत्तिजनक शब्दों और टिप्पणियों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया।
एक व्हाट्सऐप ग्रुप से सामने आईं कई शिकायतें
मामले में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ मई के दूसरे सप्ताह में आया। रिपोर्ट के अनुसार, वाइवा के दौरान अपने अनुभव के बाद एक छात्रा ने छात्रों के एक अनौपचारिक व्हाट्सऐप ग्रुप में अपनी बात साझा की। इसके बाद कई और छात्र सामने आए और उन्होंने भी प्रोफेसर के व्यवहार को लेकर समान आरोप लगाए। सूत्रों के अनुसार, शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया कि प्रोफेसर ने छात्रों से यौन संबंधी प्रस्ताव स्वीकार करने के बदले अतिरिक्त अंक देने की बात कही थी। इन आरोपों की जांच अब विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति के स्तर पर हो रही है।
शिकायत हुई तो आईसीसी ने शुरू की कार्रवाई
छात्रों की शिकायत मई में आंतरिक शिकायत समिति यानी आईसीसी को दी गई। इसके बाद समिति ने प्रक्रिया शुरू करते हुए कई छात्रों को बुलाकर उनके बयान दर्ज किए। हालांकि, इसके कुछ समय बाद विश्वविद्यालय में लगभग 45 दिनों का सेमेस्टर अवकाश शुरू हो गया। जुलाई के मध्य में जब कक्षाएं दोबारा शुरू हुईं तो इस शिकायत को लेकर छात्रों के बीच फिर चर्चा तेज हुई। अभी यह मामला जांच के स्तर पर है और आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
जेएनयू प्रशासन ने अभी नहीं दिया जवाब
इस पूरे मामले में जेएनयू प्रशासन से भी प्रतिक्रिया मांगी गई थी, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया। इसलिए फिलहाल छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर ही मामले की जानकारी सामने आई है। यह भी महत्वपूर्ण है कि संबंधित प्रोफेसर का पक्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले आरोपों को अंतिम सच मानने के बजाय आईसीसी की प्रक्रिया और उसके निष्कर्ष का इंतजार करना जरूरी होगा।
जेएनयू में पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब जेएनयू में इससे पहले भी एक वरिष्ठ शिक्षक के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला सामने आ चुका है। पिछले वर्ष अप्रैल में विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद ने चार कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की थीं। इनमें एक वरिष्ठ शिक्षक भी शामिल थे, जिनके खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत की जांच हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में जापान के दूतावास से जुड़ी एक अधिकारी ने शिकायत की थी और विश्वविद्यालय की जांच प्रक्रिया के दौरान दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था।
छात्रों की सुरक्षा और शिकायत व्यवस्था पर बड़ा सवाल
ताजा मामला जेएनयू जैसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में छात्रों की सुरक्षा और शिकायत व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। अगर किसी शिक्षक पर परीक्षा जैसी स्थिति में अंक देने के बदले यौन संबंधी प्रस्ताव रखने जैसे आरोप सामने आते हैं, तो विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए निष्पक्ष और समयबद्ध जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। साथ ही शिकायत करने वाले छात्रों को सुरक्षित माहौल मिलना भी जरूरी है, ताकि वे बिना दबाव अपनी बात रख सकें। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आईसीसी की जांच कितनी निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ती है और क्या विश्वविद्यालय प्रशासन आरोपों पर समय रहते स्पष्ट कार्रवाई करता है।




