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जामिया में छात्र शक्ति की जीत, 15 मई 2027 तक छात्रसंघ संविधान को मंजूरी; चुनाव कराने पर भी सहमति

18 दिनों से अधिक चले आंदोलन के बाद प्रशासन झुका, छात्रों की तीनों मांगें स्वीकार; संविधान बनाने वाली समिति में हर फैकल्टी के छात्र प्रतिनिधि होंगे, निलंबन और निष्कासन की कार्रवाई वापस लेने का ऐलान

राष्ट्रीय/शिक्षा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 30 अक्टूबर 2026

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन ने निर्णायक मोड़ ले लिया है। छात्रों के लगातार विरोध और भूख हड़ताल के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने आंदोलनकारी विद्यार्थियों की तीनों मांगें स्वीकार करने की घोषणा की है। प्रशासन ने छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी देने और उसे लागू करने की प्रक्रिया 15 मई 2027 तक पूरी करने का आश्वासन दिया है। साथ ही, संविधान तैयार करने वाली समिति में छात्रों को प्रतिनिधित्व देने, नए शैक्षणिक सत्र के छह सप्ताह के भीतर चुनाव कराने और आंदोलन के दौरान विद्यार्थियों पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने पर सहमति जताई गई है।

छात्रों के लिए यह घटनाक्रम बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। आंदोलनकारियों ने छात्रसंघ की बहाली को अपना लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए प्रशासन से लगातार जवाब मांगा था। विरोध के दौरान तनाव, पाबंदियों और अनुशासनात्मक कार्रवाई के बावजूद छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे।

रजिस्ट्रार ने कहा—छात्रों की तीनों मांगें स्वीकार

जामिया के रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिजवी ने बताया कि प्रशासन को छात्रों की ओर से तीन प्रमुख मांगें मिली थीं और तीनों स्वीकार कर ली गई हैं।

उन्होंने कहा कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी देने और लागू करने की प्रक्रिया 15 मई 2027 तक पूरी कर ली जाएगी। इस प्रक्रिया में केवल प्रोफेसर या कानूनी विशेषज्ञ ही शामिल नहीं होंगे, बल्कि विद्यार्थियों के प्रतिनिधियों को भी जगह दी जाएगी।

रजिस्ट्रार के अनुसार, प्रत्येक फैकल्टी से छात्र प्रतिनिधि शामिल किए जाएंगे, ताकि अलग-अलग विभागों और संकायों के विद्यार्थियों की राय संविधान तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल हो सके।

संविधान से लेकर चुनाव तक क्या होगा?

प्रशासन ने संविधान को अंतिम रूप देने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया बताई है। पहले समिति छात्रों और अपने सदस्यों से सुझाव प्राप्त करेगी। इसके बाद मसौदा संबंधित हितधारकों की टिप्पणियों के लिए भेजा जाएगा। फिर कानूनी जांच के बाद इसे अकादमिक परिषद और कार्यकारी परिषद के समक्ष रखा जाएगा। अंतिम सहमति के लिए इसे विजिटर के नामित प्रतिनिधि के पास भेजा जाएगा।

इस पूरी प्रक्रिया को 15 मई 2027 तक पूरा करने का आश्वासन दिया गया है। हालांकि, संविधान की मंजूरी और लागू होने की प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा में पूरी करना अब प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।

नए सत्र के छह सप्ताह के भीतर होंगे चुनाव

छात्रों की दूसरी प्रमुख मांग छात्रसंघ चुनाव कराने से जुड़ी थी। रजिस्ट्रार ने कहा कि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के छह सप्ताह के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। उनके बयान के अनुसार, 16 जुलाई 2027 से शुरू होने वाले सत्र के लगभग छह सप्ताह के भीतर चुनाव कराने की योजना है।

यह घोषणा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि जामिया में छात्रसंघ को लेकर लंबे समय से विवाद और अनिश्चितता बनी हुई थी। निर्वाचित छात्रसंघ विद्यार्थियों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने और छात्रावास, फीस, पुस्तकालय, भोजन, सुरक्षा तथा शैक्षणिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठाने का संस्थागत माध्यम होता है।

अब छात्रों की नजर इस बात पर रहेगी कि घोषित समयसीमा के अनुसार संविधान की प्रक्रिया पूरी होती है या नहीं और चुनाव वास्तव में कब कराए जाते हैं।

निलंबन और निष्कासन की कार्रवाई वापस

रजिस्ट्रार ने आंदोलन के दौरान छात्रों पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन की अवधि में जिन विद्यार्थियों को निष्कासित या निलंबित किया गया था अथवा जिन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे, उनके खिलाफ की गई कार्रवाई वापस ले ली गई है।

इस फैसले से आंदोलन में शामिल विद्यार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है। छात्र संगठनों और आंदोलनकारियों के लिए यह मांग महत्वपूर्ण रही थी कि शांतिपूर्ण विरोध के दौरान की गई कार्रवाई के कारण विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित न हो।

ऑफलाइन कक्षाएं बहाल करने की अपील

रजिस्ट्रार ने बताया कि विश्वविद्यालय में 8 नवंबर तक दिवाली की छुट्टियां हैं। छुट्टियों के बाद छात्रों के लौटने पर वह उनसे ऑफलाइन कक्षाएं फिर से शुरू करने का अनुरोध करेंगे।

जामिया में जारी तनाव के कारण पढ़ाई और सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हुई थीं। ऑनलाइन कक्षाओं और परीक्षाओं की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे थे। ऐसे में ऑफलाइन पढ़ाई की बहाली विद्यार्थियों के लिए एक अहम मुद्दा है।

छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन का संदेश

जामिया का यह आंदोलन एक बार फिर छात्र राजनीति, लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही पर बहस को सामने लाया है। छात्रों की मांग थी कि उन्हें अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिले और विश्वविद्यालय के फैसलों में उनकी आवाज को उचित स्थान दिया जाए।

प्रशासन की घोषणा के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती समझौतों को समय पर लागू करने की है। संविधान को मंजूरी देने, छात्र प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने, अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और चुनाव कराने के वादों पर अमल करना जरूरी होगा।

आंदोलनकारी छात्रों के लिए यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब जामिया प्रशासन की परीक्षा इस बात से होगी कि वह घोषित समयसीमा का पालन करता है या नहीं। छात्रसंघ चुनाव की बहाली और पढ़ाई का सामान्य माहौल लौटना ही इस समझौते की वास्तविक सफलता तय करेगा।

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