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AI का बुलबुला फूटने लगा? चीन में 480 अरब डॉलर स्वाहा, अमेरिका में Anthropic और OpenAI की अरबों की तैयारी!

चीन में AI और सेमीकंडक्टर शेयर चार महीने से भी कम समय में 40% टूटे; अमेरिका में AI कंपनियां IPO से जुटाना चाहती हैं भारी पूंजी—जिस तकनीक को भविष्य का सोना बताया जा रहा है, क्या उसी के नाम पर शेयर बाजार में बन रहा है सट्टेबाजी का सबसे बड़ा बुलबुला?

अंतरराष्ट्रीय/ कारोबार | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 27 अक्टूबर 2026

जिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को दुनिया की अगली बड़ी क्रांति बताया जा रहा है, क्या वही निवेशकों के लिए बड़ा आर्थिक झटका भी बन सकती है? एक तरफ चीन में AI कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई है, तो दूसरी तरफ अमेरिका में AI की दिग्गज कंपनियां शेयर बाजार में उतरकर खरबों डॉलर का मूल्यांकन हासिल करने की तैयारी कर रही हैं। सवाल सीधा है—क्या AI की असली ताकत से ज्यादा उसकी कीमतों का प्रचार हो रहा है?

चीन के AI और सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़े STAR50 इंडेक्स में चार महीने से भी कम समय में लगभग 40% की गिरावट आई। इस गिरावट के दौरान करीब 480 अरब डॉलर का बाजार मूल्य मिट गया। चीन के प्रमुख बड़े शेयरों वाला इंडेक्स भी जून में बने अपने उच्च स्तर से लगभग 20% नीचे आ गया।

चीन में AI का सपना, निवेशकों को भारी झटका

चीन में AI शेयरों की तेजी को लेकर निवेशकों में लंबे समय तक उत्साह बना रहा। सरकारी प्रोत्साहन की उम्मीदों और तकनीकी प्रतिस्पर्धा ने शेयरों को ऊपर पहुंचाया। लेकिन जब कंपनियों के ऊंचे मूल्यांकन के सामने वास्तविक मांग और भविष्य की कमाई को लेकर सवाल उठे, तो बाजार में बिकवाली तेज हो गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, महंगे शेयर, कर भुगतान का दबाव और चीनी उपकरणों पर अमेरिका तथा अन्य देशों की संभावित पाबंदियों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। गोल्डमैन सैक्स के आंकड़ों के अनुसार, AI शेयर चीन के मुख्य भूमि और हांगकांग के शेयर बाजारों के बाजार पूंजीकरण का लगभग 42% और कुल कारोबार का करीब 57% हिस्सा बन गए थे। ऐसे में गिरावट का असर केवल कुछ कंपनियों तक सीमित नहीं रहा।

बीजिंग के फंड मैनेजर डोंग बाओझेन ने बाजार की तेजी को सट्टेबाजी से प्रेरित उछाल बताया। उनका कहना था कि अब बुलबुला फूटता दिखाई दे रहा है। हालांकि, चीन में गिरावट की कोई एक वजह निर्णायक रूप से सामने नहीं आई है।

चीन में गिरावट, अमेरिका में खरबों डॉलर की उम्मीद!

जहां चीन में AI शेयर निवेशकों को डरा रहे हैं, वहीं अमेरिका में इस क्षेत्र की बड़ी कंपनियां शेयर बाजार से भारी पूंजी जुटाने की तैयारी में हैं। इनमें Anthropic और OpenAI सबसे प्रमुख नाम हैं।

Claude चैटबॉट बनाने वाली Anthropic ने शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की दिशा में दस्तावेज दाखिल किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी Nasdaq Global Select Market में ‘ANT’ टिकर के तहत सूचीबद्ध होने की योजना बना रही है। रिपोर्ट में कंपनी का मूल्यांकन 965 अरब डॉलर बताया गया है। भविष्य में इसके 1.5 ट्रिलियन से 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावनाओं का भी उल्लेख है—लेकिन ये अनुमान हैं, पक्का मूल्यांकन नहीं।

दूसरी ओर, ChatGPT बनाने वाली OpenAI का मूल्यांकन रिपोर्ट में 852 अरब डॉलर बताया गया है और वह अगले वर्ष IPO की तैयारी कर रही है। यानी AI की दौड़ में आगे रहने के लिए कंपनियां अब केवल तकनीक विकसित करने तक सीमित नहीं हैं; उन्हें अपने विस्तार के लिए लगातार भारी पूंजी भी चाहिए।

AI कंपनियों को आखिर इतना पैसा क्यों चाहिए?

AI मॉडल बनाना और उन्हें करोड़ों लोगों तक पहुंचाना बेहद महंगा काम है। इसके लिए शक्तिशाली चिप, विशाल डेटा सेंटर, बिजली, कंप्यूटिंग क्षमता और विशेषज्ञों की जरूरत पड़ती है। कंपनियां मानती हैं कि AI भविष्य में कारोबार, शिक्षा, स्वास्थ्य, शोध और रोजमर्रा के कामों में बड़ा बदलाव ला सकती है।

मॉर्निंगस्टार के मुख्य इक्विटी विश्लेषक माइकल फील्ड के मुताबिक, कंपनियां AI की दौड़ में जीतने के लिए तेजी से नकदी खर्च कर रही हैं और शेयर बाजार से पैसा जुटाना उनके लिए अहम विकल्प बन गया है।

लेकिन यहां एक बड़ा सवाल है: अगर कंपनियां आज खरबों डॉलर का मूल्यांकन हासिल कर रही हैं, तो क्या उनकी कमाई भी उसी रफ्तार से बढ़ेगी? यदि AI सेवाओं से होने वाला मुनाफा निवेश के अनुपात में नहीं बढ़ा, तो ऊंचे मूल्यांकन पर टिके शेयरों को बड़ा झटका लग सकता है।

क्या AI अगली तकनीकी क्रांति है या अगला बाजार संकट?

AI का भविष्य और AI कंपनियों के शेयरों का भविष्य एक ही बात नहीं है। कोई तकनीक दुनिया बदल सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उससे जुड़ी हर कंपनी का शेयर मौजूदा कीमत पर खरीदना सही होगा। इंटरनेट क्रांति के दौर ने भी दिखाया था कि उपयोगी तकनीक और जरूरत से ज्यादा महंगे शेयरों के बीच बड़ा अंतर हो सकता है।

अमेरिका का Nasdaq भी हाल के रिकॉर्ड स्तर से लगभग 6% नीचे आया है, हालांकि चीन जैसी गिरावट वहां नहीं हुई है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि वैश्विक AI उद्योग का बुलबुला फूट चुका है। लेकिन चीन की गिरावट ने चेतावनी जरूर दे दी है कि निवेश का उत्साह हमेशा मुनाफे में नहीं बदलता।

असली परीक्षा अब शुरू होगी। क्या AI कंपनियां अपनी भारी लागत के मुकाबले पर्याप्त कमाई कर पाएंगी? क्या ग्राहक उनकी सेवाओं के लिए उतना पैसा देंगे, जितनी उम्मीद निवेशक लगा रहे हैं? और क्या कंपनियों का वास्तविक कारोबार उनके खरबों डॉलर के मूल्यांकन को सही साबित करेगा?

AI की तकनीकी क्रांति जारी रह सकती है, लेकिन शेयर बाजार में हर तेजी स्थायी नहीं होती। आने वाले समय में कंपनियों की कमाई, वास्तविक मांग और निवेश पर मिलने वाला रिटर्न तय करेगा कि यह उछाल टिकाऊ साबित होता है या इतिहास के एक और बड़े बाजार बुलबुले के रूप में याद किया जाएगा।

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