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NCERT की नई पहल: कक्षा 9 से 12 तक AI और डीपफेक की पढ़ाई, 20 घंटे का मॉड्यूल जारी

राष्ट्रीय/ शिक्षा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 25 अक्टूबर 2026

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग पर 20 घंटे का शुरुआती मॉड्यूल तैयार किया है। इसमें विद्यार्थियों को AI के रोजमर्रा के इस्तेमाल, मशीनों के सीखने की प्रक्रिया, डीपफेक की पहचान और निजी डेटा की सुरक्षा से जुड़ी नैतिक सीमाओं के बारे में पढ़ाया जाएगा।

NCERT ने यह मॉड्यूल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास और IIT जोधपुर के परामर्श से तैयार किया है। यह गतिविधियों पर आधारित होगा, ताकि विद्यार्थी केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रहें, बल्कि AI तकनीक को समझना और उसके इस्तेमाल से जुड़े जोखिमों को पहचानना भी सीखें।

डीपफेक और निजी डेटा पर जोर

मॉड्यूल का एक अहम हिस्सा डीपफेक को समझना और उसकी पहचान करना है। AI की मदद से किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज या वीडियो में बदलाव करके भ्रामक सामग्री तैयार की जा सकती है। ऐसी सामग्री का इस्तेमाल गलत सूचना फैलाने, किसी की छवि खराब करने या लोगों को गुमराह करने के लिए हो सकता है।

विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि डिजिटल सामग्री पर आंख मूंदकर भरोसा क्यों नहीं करना चाहिए और निजी जानकारी की सुरक्षा क्यों जरूरी है। AI के इस्तेमाल में नैतिक जिम्मेदारी और व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता जैसे विषय भी पाठ्यक्रम का हिस्सा होंगे।

मशीनें कैसे सीखती हैं, यह भी जानेंगे विद्यार्थी

इस पाठ्यक्रम में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग यानी किसी समस्या को तार्किक तरीके से समझने और उसे छोटे-छोटे चरणों में हल करने की क्षमता पर भी ध्यान दिया जाएगा। विद्यार्थी जानेंगे कि मशीनें उदाहरणों और डेटा से किस तरह सीखती हैं और AI आधारित तकनीकें रोजमर्रा के कामों में कैसे इस्तेमाल होती हैं।

AI का इस्तेमाल शिक्षा, संचार और कई डिजिटल सेवाओं में बढ़ रहा है। ऐसे में स्कूली स्तर पर इसकी बुनियादी समझ विकसित करने से विद्यार्थियों को तकनीक का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।

NCERT की इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को AI की शुरुआती जानकारी देने के साथ-साथ उसके संभावित दुरुपयोग, डिजिटल सुरक्षा और नैतिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना है।

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