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23 अक्टूबर को ‘वोट चोरों’ के खिलाफ देशव्यापी महाअभियान! लोकतंत्र बचाने सड़कों पर उतरेगा विपक्ष, युवाओं और आम जनता से एकजुट होने की अपील

SIR के तहत 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं को ASDD श्रेणी में रखने पर घमासान; कांग्रेस और विपक्ष ने चुनाव आयोग की जवाबदेही पर उठाए सवाल, 2024 के आम चुनाव से लेकर बिहार, बंगाल, मध्य प्रदेश, हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों तक चुनावी निष्पक्षता पर बहस तेज

राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 22 अक्टूबर 2026

देश में चुनावी पारदर्शिता और मताधिकार को लेकर जारी विवाद के बीच 23 अक्टूबर को ‘वोट चोरों’ के खिलाफ देशव्यापी महाअभियान चलाने की अपील की गई है। कांग्रेस, कांग्रेस सेवा दल, NSUI, यूथ कांग्रेस, AISA, SFI, अन्य वामपंथी संगठनों, विपक्षी दलों, युवाओं और आम नागरिकों से अपने-अपने शहरों, कस्बों और मोहल्लों में सड़कों पर उतरकर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने का आह्वान किया गया है। इस अभियान का केंद्रीय सवाल है—क्या देश के हर पात्र नागरिक का वोट सुरक्षित है और क्या चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा कायम है?

यह विवाद अब केवल किसी एक राज्य या एक चुनाव तक सीमित नहीं है। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के तहत मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नामों की जांच और कटौती को लेकर विपक्ष ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया से पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। बीजेपी और चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज करते हुए कहते हैं कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्टियों वाले मतदाताओं की पहचान कर सूची को दुरुस्त करना है।

SIR के नाम पर 13 करोड़ से अधिक नामों का विवाद

SIR को लेकर सबसे बड़ा विवाद मतदाता सूची में शामिल नामों की संख्या और उनके वर्गीकरण को लेकर है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न चरणों में लगभग 13.39 करोड़ मतदाताओं को ASDD श्रेणी में रखा गया। इसमें अनुपस्थित या पता नहीं चलने वाले, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत और एक से अधिक जगह दर्ज मतदाता शामिल हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस आंकड़े को सीधे अंतिम मतदाता सूची से हटाए गए पात्र मतदाताओं की संख्या मानना सही नहीं है।

लेकिन विपक्ष का सवाल है कि इन करोड़ों नामों का आगे क्या हुआ, कितने नाम अंतिम सूची से बाहर रहे और कितने पात्र मतदाताओं को दोबारा अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन करना पड़ा। कांग्रेस नेताओं ने इस प्रक्रिया की पारदर्शिता, डिजिटल प्रणालियों और नामों को हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष की मांग है कि प्रत्येक राज्य में नामों की कटौती, नाम बहाल किए जाने और शिकायतों के निपटारे का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया जाए।

यही वह सवाल है जिसे 23 अक्टूबर के महाअभियान में प्रमुखता से उठाने की अपील की गई है। लोकतंत्र में मतदाता सूची का सही होना उतना ही जरूरी है जितना निष्पक्ष मतदान। यदि किसी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से हटाया जाता है, तो उसके वोट देने के अधिकार पर सीधा असर पड़ सकता है। इसलिए ऐसी हर शिकायत की जांच और समयबद्ध समाधान जरूरी है।

2024 के आम चुनाव से लेकर कई राज्यों के चुनावों तक सवाल

विपक्ष चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियों को केवल SIR तक सीमित नहीं रख रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव और बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, हरियाणा तथा महाराष्ट्र के चुनावों को लेकर भी विपक्षी नेताओं ने चुनावी पारदर्शिता, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि चुनावी व्यवस्था से जुड़े विवादों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी भी पात्र मतदाता का अधिकार प्रभावित न हो।

हालांकि, इन सभी चुनावों में बीजेपी की जीत को वोट चोरी का परिणाम बताने वाला निष्कर्ष अपने आप में स्थापित तथ्य नहीं है। इन आरोपों को प्रमाणित करने के लिए चुनाववार आंकड़ों, निर्वाचन क्षेत्रों के रिकॉर्ड और संबंधित शिकायतों की जांच जरूरी है। लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष को सवाल उठाने और चुनावी प्रक्रिया की समीक्षा की मांग करने का अधिकार है। चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह ऐसे सवालों का तथ्यात्मक जवाब दे और जहां गड़बड़ी साबित हो, वहां उचित कार्रवाई करे।

महाराष्ट्र में SIR के तहत लगभग 2.07 करोड़ मतदाताओं को प्रारंभिक सूची में हटाने के लिए चिह्नित किए जाने की खबरों के बाद राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और बीजेपी पर तीखा हमला किया था। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया था कि इस संख्या को अंतिम रूप से हटाए जाने वाले मतदाताओं की निश्चित संख्या नहीं माना जाना चाहिए।

कांग्रेस, सेवा दल, NSUI, यूथ कांग्रेस और छात्र संगठनों से एकजुट होने की अपील

23 अक्टूबर के प्रस्तावित महाअभियान में कांग्रेस के साथ कांग्रेस सेवा दल, NSUI, यूथ कांग्रेस, AISA, SFI और अन्य वामपंथी संगठनों तथा विपक्षी दलों को शामिल होने की अपील की गई है। युवाओं और आम नागरिकों से भी अपने इलाकों में लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने का आह्वान किया गया है।

इस अभियान का संदेश है कि लोकतंत्र की रक्षा केवल चुनाव के दिन मतदान करने से पूरी नहीं होती। मतदाता सूची में अपना नाम जांचना, नाम गलत होने पर सुधार की मांग करना और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना भी नागरिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।

आयोजकों की अपील है कि लोग अपने शहरों और मोहल्लों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करें तथा मतदाता सूची की पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही की मांग उठाएं। अलग-अलग शहरों में कितने संगठन और लोग भाग लेंगे, इसकी पुष्टि स्थानीय कार्यक्रमों और आयोजकों की घोषणाओं से होगी।

चुनाव आयोग से सीधे सवाल

इस पूरे विवाद में चुनाव आयोग के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं। कितने नामों को अंतिम सूची से हटाया गया? उनमें से कितने मृत, स्थानांतरित या दोहरी प्रविष्टि वाले थे? कितने पात्र मतदाताओं ने शिकायत की? कितने नाम दोबारा जोड़े गए? और क्या प्रभावित नागरिकों को पर्याप्त समय तथा उचित अवसर मिला?

इन सवालों का जवाब सार्वजनिक आंकड़ों और स्पष्ट प्रक्रियाओं के माध्यम से दिया जाना चाहिए। आयोग की विश्वसनीयता इसी से मजबूत होगी कि वह शिकायतों को गंभीरता से ले, रिकॉर्ड की जांच करे और गलत तरीके से हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम बहाल करने के लिए प्रभावी व्यवस्था उपलब्ध कराए।

23 अक्टूबर का संदेश: वोट की सुरक्षा, लोकतंत्र की रक्षा

23 अक्टूबर के महाअभियान की अपील देश में मतदाता अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को आगे बढ़ाने की कोशिश है। कांग्रेस, कांग्रेस सेवा दल, NSUI, यूथ कांग्रेस, AISA, SFI, अन्य वामपंथी संगठनों, विपक्षी दलों, युवाओं और आम जनता से एकजुट होकर आवाज उठाने का आह्वान किया गया है।

लोकतंत्र में सरकारें चुनाव से बनती हैं, लेकिन चुनावी व्यवस्था पर जनता का भरोसा पारदर्शिता और जवाबदेही से कायम रहता है। इसलिए SIR के तहत नामों की कटौती से लेकर अलग-अलग चुनावों पर उठे सवालों तक, हर मामले का समाधान तथ्यों, निष्पक्ष जांच और स्पष्ट जवाबों के आधार पर होना चाहिए।

23 अक्टूबर का आह्वान यही है—अपने वोट के अधिकार के प्रति जागरूक बनिए, मतदाता सूची की जांच कीजिए और चुनावी पारदर्शिता के लिए अपनी लोकतांत्रिक आवाज उठाइए।

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