[the_ad id="179"]
Home » Delhi / NCR » दिल्ली हाईकोर्ट ने नेहा बोरा की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

दिल्ली हाईकोर्ट ने नेहा बोरा की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

‘शांति बनाए रखने’ के लिए बॉन्ड भरने के दिल्ली पुलिस के नोटिस को दी है चुनौती; AISA अध्यक्ष ने कहा—राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए नागरिकों को अनुमति की जरूरत नहीं

दिल्ली | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 22 अक्टूबर 2026

दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा की उस याचिका पर गुरुवार को फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें उन्होंने दिल्ली पुलिस की ओर से जारी ‘शांति बनाए रखने’ के लिए बॉन्ड भरने के नोटिस को चुनौती दी है। अदालत का फैसला शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 की शाम को आने की संभावना है। इस मामले में अदालत को यह तय करना है कि पुलिस की ओर से जारी नोटिस और उसके पीछे अपनाई गई प्रक्रिया कानून के अनुरूप है या नहीं।

नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस के उस नोटिस को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (Special Executive Magistrate) के समक्ष शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड प्रस्तुत करने को कहा गया था। इस तरह के बॉन्ड का उद्देश्य संबंधित व्यक्ति से भविष्य में शांति भंग न करने का आश्वासन लेना होता है। हालांकि, किसी व्यक्ति को ऐसा नोटिस जारी करने के लिए कानूनी प्रक्रिया और निर्धारित शर्तों का पालन जरूरी है।

राष्ट्रीय ध्वज फहराने के अधिकार पर उठाया सवाल

मामले के दौरान नेहा बोरा ने कहा कि नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए अनुमति लेने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। उनके बयान ने शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन, नागरिक अधिकारों और पुलिस की निवारक कार्रवाई की सीमाओं को लेकर बहस को सामने ला दिया है। हालांकि, राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अधिकार कानून और लागू नियमों के अधीन है। इस मामले में हाईकोर्ट के अंतिम फैसले से स्पष्ट होगा कि याचिका में उठाए गए कानूनी सवालों पर अदालत का क्या रुख है।

क्या होता है शांति बनाए रखने का बॉन्ड?

पुलिस और कार्यपालक मजिस्ट्रेट को कुछ परिस्थितियों में संभावित शांति भंग होने की आशंका पर निवारक कार्रवाई करने का अधिकार होता है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 में शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा मांगने से संबंधित प्रावधान हैं। इनका उद्देश्य किसी संभावित विवाद या अशांति को रोकना है, न कि किसी व्यक्ति को बिना कानूनी आधार के दंडित करना। ऐसे मामलों में नोटिस जारी करने के कारण, उपलब्ध सामग्री और अपनाई गई प्रक्रिया महत्वपूर्ण होते हैं।

अब शुक्रवार के फैसले पर नजर

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। शुक्रवार शाम संभावित आदेश से यह स्पष्ट हो सकता है कि नेहा बोरा की याचिका पर अदालत क्या निर्णय लेती है और दिल्ली पुलिस के नोटिस की वैधता को लेकर क्या निर्देश देती है। फिलहाल, अदालत का अंतिम आदेश आने तक मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *