अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 25 सितंबर 2026
अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ताइवान और वैश्विक प्रभाव को लेकर जारी प्रतिस्पर्धा के बीच चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में मुलाकात हुई। बैठक की शुरुआत में शी ने दोनों देशों के बीच टकराव के बजाय सहयोग और संवाद बढ़ाने पर जोर दिया और चेतावनी दी कि दोनों बड़ी शक्तियों के बीच बढ़ता तनाव सैन्य टकराव का रास्ता खोल सकता है। उन्होंने कहा कि चीन और अमेरिका को शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की दिशा में काम करना चाहिए और दोनों देशों की सेनाओं के बीच नियमित संवाद तथा संकट की स्थिति में संपर्क और रोकथाम की व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए।
शी जिनपिंग ने इस संदर्भ में ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का उल्लेख किया। यह अवधारणा प्राचीन यूनानी इतिहासकार थ्यूसीडाइड्स के विचारों से जुड़ी है और आम तौर पर उस स्थिति का वर्णन करती है, जब एक उभरती शक्ति स्थापित बड़ी शक्ति को चुनौती देती है और दोनों के बीच बढ़ता तनाव संघर्ष का कारण बन सकता है। शी ने कहा कि संवाद, आपसी विश्वास और संकट रोकने की व्यवस्था के जरिए इस स्थिति से बचा जा सकता है। उन्होंने इससे पहले मई में बीजिंग में ट्रंप के साथ मुलाकात के दौरान भी इस अवधारणा का उल्लेख किया था।
शी ने कहा कि चीन और अमेरिका की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन लगातार और गहरे संवाद के जरिए दोनों देश एक-दूसरे को बेहतर समझ सकते हैं। उनके अनुसार, जहां दोनों देशों के हित मिलते हैं वहां सहयोग किया जाना चाहिए और मतभेदों को बातचीत के जरिए संभालना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चीन और अमेरिका के बीच टकराव दोनों पक्षों के लिए नुकसानदेह होगा, जबकि सहयोग से दोनों देशों को लाभ मिल सकता है। शी ने ट्रंप के राजनीतिक नारे का भी उल्लेख करते हुए कहा कि चीन के राष्ट्रीय पुनरुत्थान और अमेरिका को फिर से महान बनाने के लक्ष्य साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।
ट्रंप ने भी बैठक के दौरान शी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच संवाद के जरिए कई मुद्दों पर प्रगति हुई है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका और चीन के बीच व्यापार को अधिक संतुलित बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है और अमेरिकी किसानों तथा पशुपालकों के लिए चीन के बाजार तक पहुंच बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि बैठक में सुरक्षा, तकनीक और AI जैसे विषयों पर भी बातचीत होगी।
शी की अमेरिका यात्रा ऐसे समय हो रही है जब दोनों देशों के बीच AI और व्यापार को लेकर प्रतिस्पर्धा काफी तेज है। अमेरिका ने चीन की उन्नत AI क्षमता को सीमित करने के उद्देश्य से माइक्रोचिप, सेमीकंडक्टर, सॉफ्टवेयर और चिप बनाने वाले उपकरणों से जुड़े कई निर्यात नियंत्रण लागू किए हैं। दूसरी तरफ चीन AI को अपनी तकनीकी और आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है। ताइवान भी दोनों देशों के बीच रणनीतिक तनाव का एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।
व्यापार के मोर्चे पर भी दोनों देशों के बीच तनाव के बावजूद बातचीत जारी है। ट्रंप और शी के बीच पहले बनी अस्थायी व्यापार सहमति की अवधि बढ़ाने पर भी काम हुआ है। Guardian की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और चीन ने व्यापार संबंधी अस्थायी समझौते को फरवरी तक बढ़ाया है। इसका उद्देश्य दोनों देशों को नए व्यापार विवादों के बीच बातचीत के लिए अतिरिक्त समय देना है।
शी ने दोनों देशों के बीच लोगों के संपर्क बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने अगले कुछ वर्षों में 1 लाख युवा अमेरिकी छात्रों को चीन आने और अध्ययन करने का निमंत्रण देने की बात कही। इसके पीछे उद्देश्य दोनों देशों के युवाओं के बीच संपर्क और आपसी समझ बढ़ाना बताया गया। शी ने कहा कि लोगों के बीच संपर्क भी दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है।
बैठक से पहले ट्रंप खुद जॉइंट बेस एंड्रयूज पहुंचे थे, जहां उन्होंने शी और उनकी पत्नी पेंग लियुआन का स्वागत किया। इसके बाद व्हाइट हाउस में औपचारिक स्वागत समारोह हुआ, जिसमें दोनों देशों के राष्ट्रगान बजाए गए। ट्रंप ने कहा कि यह यात्रा अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के समय हो रही है और शी दूसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति के निमंत्रण पर राजकीय यात्रा पर पहुंचे हैं। इससे पहले शी की अमेरिका की राजकीय यात्रा 2015 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुई थी।
हालांकि, दोनों नेताओं के शुरुआती बयानों में सहयोग और संवाद पर जोर दिखाई दिया, लेकिन दोनों देशों के बीच कई गंभीर मतभेद अभी भी मौजूद हैं। AI तकनीक, व्यापार शुल्क, ताइवान और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अमेरिका और चीन की नीतियां अलग हैं। Guardian के अनुसार, विश्लेषकों ने भी दोनों देशों के बीच लंबे समय तक स्थिर व्यवस्था बनने की संभावना को लेकर सावधानी बरतने की बात कही है। ऐसे में शी का ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ से बचने का प्रस्ताव और ट्रंप के साथ उनकी बातचीत को आने वाले महीनों में दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण संकेतों के रूप में देखा जा रहा है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि व्हाइट हाउस में दिखाई दिया सहयोग और संवाद का माहौल क्या व्यापार, AI, ताइवान और सुरक्षा जैसे वास्तविक विवादों पर भी ठोस समझौते में बदल पाएगा। दोनों नेताओं ने टकराव से बचने और संवाद जारी रखने की जरूरत पर जोर दिया है, लेकिन इन बयानों को वास्तविक नीति बदलाव में बदलना आगे की बातचीत और समझौतों पर निर्भर करेगा।


