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इजरायल पर ब्रिटेन का बड़ा प्रहार: वेस्ट बैंक की बस्तियों पर प्रतिबंध, जवाब में ईस्ट यरुशलम वाणिज्य दूतावास बंद

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | लंदन/यरुशलम | 9 सितंबर 2026

ब्रिटेन ने बदली नीति, इजरायल ने बताया ‘अपमानजनक झूठ’

ब्रिटेन ने वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों और उनके विस्तार के खिलाफ बड़े प्रतिबंधों का ऐलान किया है। विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने कहा कि सरकार का मानना है कि वेस्ट बैंक के कुछ इलाकों में फिलिस्तीनियों का जबरन विस्थापन हो रहा है और इजरायली सरकार ने बस्तियों से जुड़ी हिंसा और विस्थापन को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं। ब्रिटेन का कहना है कि अगले छह से नौ महीनों में व्यापक प्रतिबंध व्यवस्था लागू की जाएगी, जिसमें अवैध बस्तियों से आने वाले सामान पर रोक के साथ उन कंपनियों और व्यक्तियों पर भी कार्रवाई की जाएगी जो बस्तियों के विस्तार के लिए सेवाएं या आर्थिक मदद उपलब्ध कराते हैं।

प्रतिबंध सिर्फ सामान पर नहीं, बस्ती विस्तार पर भी निशाना

ब्रिटेन की नई नीति का दायरा केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। बस्तियों के विस्तार से जुड़ी कंपनियों और व्यक्तियों को भी निशाना बनाया जाएगा। ब्रिटेन ने अपने यहां वेस्ट बैंक की अवैध बस्तियों के विज्ञापन पर भी प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। मिलिबैंड ने स्पष्ट किया कि प्रतिबंध इजरायल के लोगों या पूरे इजरायल को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि बस्तियों और उनके विस्तार को रोकने के उद्देश्य से हैं। ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने संयुक्त बयान में कहा कि यह कदम दो-राष्ट्र समाधान की रक्षा की दिशा में उनकी नीति में महत्वपूर्ण मोड़ है।

ई-1 इलाके ने बढ़ाया विवाद

ब्रिटेन का यह फैसला उस समय आया है जब इजरायल ने यरुशलम के पूर्व में स्थित रणनीतिक ई-1 क्षेत्र में करीब 1,200 बस्ती घरों के निर्माण के लिए निविदाएं जारी की हैं। इस इलाके में निर्माण की योजनाओं का लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध होता रहा है। ब्रिटिश विदेश मंत्री ने संसद में कहा कि ई-1 में बस्ती विस्तार वेस्ट बैंक के बीचोंबीच संपर्क को प्रभावित कर सकता है और दो-राष्ट्र समाधान को व्यावहारिक रूप से मुश्किल बना सकता है। यही कारण है कि ब्रिटेन अब अपनी आर्थिक नीति को भी वेस्ट बैंक में बस्ती विस्तार के सवाल से जोड़ रहा है।

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इजरायल का पलटवार—ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास बंद

ब्रिटेन के फैसले पर इजरायल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने मिलिबैंड पर ‘अपमानजनक झूठ’ फैलाने का आरोप लगाया और घोषणा की कि ईस्ट यरुशलम में ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास को बंद किया जाएगा। उन्होंने ब्रिटेन की लेबर सरकार पर लगातार इजरायल विरोधी रुख अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि इजरायल को जवाबी कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इजरायल ने 11 ब्रिटिश सांसदों के प्रवेश पर भी रोक लगाने की घोषणा की है, जिनमें जेरेमी कॉर्बिन, डायने एबॉट और ग्रीन पार्टी के पांच मौजूदा सांसद शामिल हैं। इजरायल ने इन सांसदों पर इजरायल विरोधी और यहूदी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाया है।

इजरायल ने ब्रिटेन के साथ सहयोग पर भी चोट की

इजरायली विदेश मंत्री ने कहा कि दक्षिणी इजरायल के किरयात गात में इंटरनेशनल गाजा सपोर्ट सेंटर से जुड़े ब्रिटिश प्रतिनिधियों को भी हटाया जाएगा। इसके अलावा फिलिस्तीनी प्राधिकरण की सुरक्षा बलों को प्रशिक्षित करने वाली ब्रिटिश गतिविधियों को समाप्त करने की बात भी कही गई है। यानी विवाद अब केवल बयानबाजी और आर्थिक प्रतिबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच राजनयिक और सुरक्षा सहयोग पर भी असर पड़ता दिखाई दे रहा है।

ब्रिटेन में भी सरकार के फैसले पर मतभेद

ब्रिटेन सरकार के फैसले को लेकर देश के भीतर भी राजनीतिक और सामुदायिक प्रतिक्रिया सामने आई है। ब्रिटेन के मुख्य रब्बी सर एफ्रेम मिर्विस ने इसे ब्रिटिश यहूदियों के लिए बेहद खराब दिन बताया और कहा कि इस तरह की नीति यहूदी विरोधी नफरत को बढ़ावा देने वालों को मजबूत कर सकती है। ब्रिटिश यहूदी प्रतिनिधि संगठन ने भी फैसले पर गहरा अफसोस जताया और दोनों सरकारों से राष्ट्रीय हितों को पार्टी हितों से ऊपर रखने की अपील की। विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी ने भी बस्तियों के खिलाफ रुख का समर्थन किया, लेकिन सरकार की रणनीति पर सवाल उठाए।

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फिलिस्तीनी नेतृत्व ने किया फैसले का स्वागत

इसके उलट फिलिस्तीनी राष्ट्रपति कार्यालय ने ब्रिटेन के कदम का स्वागत किया है और इसे फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजरायली नीतियों का सामना करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों का विस्तार लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय विवाद का विषय रहा है। बीबीसी के अनुसार, 1967 के युद्ध के बाद इजरायल ने वेस्ट बैंक और ईस्ट यरुशलम में करीब 160 बस्तियां विकसित की हैं, जहां लगभग 7 लाख इजरायली रहते हैं, जबकि करीब 33 लाख फिलिस्तीनी उसी क्षेत्र में रहते हैं।

गाजा युद्ध के बाद वेस्ट बैंक में भी बढ़ी हिंसा

गाजा युद्ध शुरू होने के बाद वेस्ट बैंक में इजरायली बसने वालों और फिलिस्तीनियों के बीच हिंसा में भी बढ़ोतरी हुई है। ब्रिटिश विदेश मंत्री ने गाजा में अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के संभावित उल्लंघनों का भी उल्लेख किया और कहा कि उपलब्ध रिपोर्टों में युद्ध अपराधों के संभावित सबूत सामने आए हैं। उन्होंने साफ किया कि गाजा में नरसंहार हुआ है या नहीं, इसका अंतिम फैसला अंतरराष्ट्रीय अदालतों को करना है। इजरायल लगातार नरसंहार, युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों को खारिज करता रहा है और उसका कहना है कि उसकी सेना अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार काम करती है।

अमेरिका ब्रिटेन के साथ नहीं

ब्रिटेन के कदम का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय सवाल अमेरिका के रुख को लेकर है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने संयुक्त कार्रवाई पर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की, लेकिन कहा कि अमेरिका ब्रिटेन जैसा कदम नहीं उठाएगा। वहीं इजरायल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने पहले ही संकेत दिया था कि अमेरिका इन प्रतिबंधों का जवाब दे सकता है और ब्रिटिश कारोबारों पर इसके बड़े आर्थिक प्रभाव की चेतावनी दी थी।

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क्या पश्चिमी देशों की नीति में बड़ा बदलाव शुरू हो गया?

ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा का यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल बयान जारी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक प्रतिबंधों को बस्ती विस्तार के खिलाफ नीति के औजार के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में बढ़ता कदम है। हालांकि अमेरिका का इससे अलग रहना पश्चिमी देशों के बीच नीति के अंतर को भी सामने लाता है। इजरायल इसे अपने खिलाफ शत्रुतापूर्ण कार्रवाई बता रहा है, जबकि ब्रिटेन इसे दो-राष्ट्र समाधान बचाने और फिलिस्तीनी विस्थापन के खिलाफ कार्रवाई के रूप में पेश कर रहा है।

अब सवाल यह है कि ब्रिटेन के प्रतिबंधों का इजरायल की बस्ती नीति पर वास्तविक असर कितना पड़ेगा और क्या इससे दो-राष्ट्र समाधान की दिशा में कोई ठोस रास्ता खुलेगा? या फिर यह कदम ब्रिटेन और इजरायल के रिश्तों में एक और बड़ा टकराव पैदा करेगा?

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