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इजरायली बस्तियों पर ब्रिटेन का शिकंजा, अब खजूर के कारोबार पर भी असर—फिलिस्तीनी किसानों को उम्मीद

अंतरराष्ट्रीय/ व्यापार | ABC NATIONAL NEWS | वेस्ट बैंक | 9 सितंबर 2026

ब्रिटेन के प्रतिबंधों से बस्तियों की अर्थव्यवस्था पर चोट की कोशिश, इजरायल ने बताया ‘शत्रुतापूर्ण कदम’

वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों को लेकर ब्रिटेन और इजरायल के बीच टकराव अब कूटनीति से आगे बढ़कर व्यापार और कृषि तक पहुंच गया है। ब्रिटेन ने वेस्ट बैंक की इजरायली बस्तियों से आने वाले सामान के आयात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। इसके साथ उन कंपनियों और व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की योजना है जो बस्तियों के विस्तार के लिए सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। ब्रिटेन का कहना है कि यह उसकी इजरायल नीति में एक व्यापक बदलाव का हिस्सा है। फ्रांस, कनाडा और कई अन्य यूरोपीय देश भी बस्ती उत्पादों के व्यापार पर राष्ट्रीय या यूरोपीय प्रतिबंधों का समर्थन कर रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन प्रतिबंधों का असर सिर्फ इजरायली बस्ती उत्पादों पर पड़ेगा या इससे वेस्ट बैंक की पूरी अर्थव्यवस्था और किसानों की जिंदगी भी प्रभावित होगी।

खजूर का कारोबार बना प्रतिबंधों की पहली बड़ी परीक्षा

वेस्ट बैंक की जॉर्डन घाटी में इस समय खजूर की फसल तैयार हो रही है। यहां इजरायली बस्ती के किसानों के लिए यूरोप बड़ा बाजार है। इजरायली किसान एविगडोर अर्बेल का कहना है कि उनका अधिकांश उत्पादन यूरोप जाता है, जबकि अमेरिका और अब भारत भी उनके बाजारों में शामिल हैं। वह ब्रिटेन जैसे देशों के बहिष्कार को गलत बताते हैं, लेकिन साथ ही कहते हैं कि यदि यूरोप का बाजार बंद होता है तो किसान दूसरे बाजार तलाशेंगे। उनका संदेश साफ है—बाजार बदले जा सकते हैं, लेकिन कारोबार बंद करना आसान नहीं होगा।

फिलिस्तीनी किसान बोले—बराबरी का मुकाबला ही नहीं

दूसरी तरफ फिलिस्तीनी किसानों की तस्वीर बिल्कुल अलग है। अल-औजा इलाके में काम करने वाले किसान अब्दुल हलीम अबू उमर के अनुसार, उनके खजूर के पेड़ों का बड़ा हिस्सा इस साल फल नहीं दे पाया क्योंकि उन्हें पर्याप्त पानी नहीं मिला। उनके खेतों को जरूरत के एक-तिहाई से भी कम पानी मिलने की बात सामने आई है। जॉर्डन घाटी में पानी लंबे समय से बड़ा विवाद है और फिलिस्तीनी किसानों का आरोप है कि उन्हें इजरायली बस्तियों की तुलना में पानी तक कम पहुंच मिलती है। इजरायली सिविल प्रशासन का कहना है कि वह फिलिस्तीनी जल प्राधिकरण के साथ लगातार संपर्क में रहता है और पानी की बुनियादी सुविधाओं की मरम्मत में मदद करता है।

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पानी से लेकर बाजार तक—फिलिस्तीनी किसानों की दोहरी मुश्किल

फिलिस्तीनी किसानों की समस्या केवल फसल उगाने तक सीमित नहीं है। स्थानीय फिलिस्तीनी निर्यातक मोमेन सिनोक्रोट के अनुसार, उनकी कंपनी जॉर्डन घाटी के 55 किसानों के साथ काम करती है और ब्रिटेन सहित कई यूरोपीय देशों में खजूर भेजती है। उनका मानना है कि अगर ज्यादा देश बस्ती उत्पादों के व्यापार पर रोक लगाते हैं तो इससे बस्तियों के विस्तार को रोकने में मदद मिल सकती है। उनका आरोप है कि बस्ती से जुड़े लोग स्थानीय किसानों की जमीन और खेतों पर दबाव बढ़ा रहे हैं। ये आरोप हैं और इनके हर हिस्से की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है, लेकिन पानी, जमीन और बाजार तक पहुंच को लेकर संघर्ष इस क्षेत्र की पुरानी समस्या है।

जॉर्डन घाटी क्यों इतनी महत्वपूर्ण है?

जॉर्डन घाटी वेस्ट बैंक के करीब 30 प्रतिशत हिस्से में फैला उपजाऊ क्षेत्र है और फिलिस्तीनी भविष्य के संभावित राज्य के लिए इसका रणनीतिक महत्व बहुत बड़ा माना जाता है। इसी इलाके में इजरायली बस्तियां भी तेजी से फैली हैं। बीबीसी के अनुसार, 1967 के युद्ध के बाद इजरायल ने इस क्षेत्र में अपने नागरिकों के बसने को बढ़ावा दिया। आज वेस्ट बैंक में पांच लाख से अधिक इजरायली बस्ती निवासी और करीब 30 लाख फिलिस्तीनी रहते हैं। इजरायली बस्तियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध माना जाता है, जबकि इजरायल इस कानूनी स्थिति को स्वीकार नहीं करता और अंतिम स्थिति को बातचीत के जरिए तय करने की बात करता है।

बस्ती विस्तार के साथ हिंसा का सवाल भी गंभीर

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वेस्ट बैंक में बस्ती विस्तार के साथ फिलिस्तीनियों के खिलाफ बसने वालों की हिंसा को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ी है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र ने बसने वालों से जुड़ी हिंसा को अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर बताया है। जॉर्डन घाटी में नए आउटपोस्ट बनाए जाने और स्थानीय फिलिस्तीनी, खासकर बेदुइन तथा चरवाहा समुदायों पर हमलों की खबरें भी सामने आई हैं। ब्रिटेन के विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने संसद में कहा कि जमीन पर ऐसी परिस्थितियां बनाई जा रही हैं जो दो-राष्ट्र समाधान को मुश्किल बना रही हैं। उन्होंने वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों के विस्थापन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।

प्रतिबंधों को लागू करना आसान नहीं होगा

ब्रिटेन के सामने अब एक बड़ी व्यावहारिक चुनौती भी है—कैसे पहचाना जाएगा कि कोई फल या कृषि उत्पाद इजरायली बस्ती से आया है? एक हालिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि यूरोप में बिकने वाली कुछ बस्ती की फल-सब्जियों को गलत तरीके से इजरायल से आया हुआ बताया गया या उन्हें इजरायल के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त क्षेत्रों से आने वाले उत्पादों के साथ मिला दिया गया। कानूनी विशेषज्ञ जेसिका स्टोबर के अनुसार, पूर्ण प्रतिबंध से ऐसे कारोबार की लागत बढ़ सकती है और कंपनियों के लिए नियम तोड़ना आर्थिक रूप से मुश्किल हो सकता है। यानी प्रतिबंध केवल राजनीतिक संदेश नहीं, बल्कि व्यापारिक दबाव का वास्तविक साधन भी बन सकता है।

इजरायल का पलटवार—ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास बंद

ब्रिटेन के फैसले पर इजरायल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्री गिदोन सार ने इसे ‘शत्रुतापूर्ण’ और इजरायल के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताया। उन्होंने ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास बंद करने और गाजा में अंतरराष्ट्रीय सहायता केंद्र से जुड़े ब्रिटिश प्रतिनिधियों को हटाने की घोषणा की। इससे पहले इजरायल ने बस्ती व्यापार पर प्रतिबंध लगाने वाले नीदरलैंड के दो राजनयिकों को भी निष्कासित किया था। यानी अब यह विवाद व्यापार प्रतिबंधों से बढ़कर राजनयिक संबंधों तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।

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क्या ब्रिटेन का दांव बस्तियों के विस्तार को रोक पाएगा?

ब्रिटेन और उसके साथ खड़े यूरोपीय देशों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बस्ती उत्पादों पर प्रतिबंध वास्तव में जमीन पर बस्ती विस्तार की रफ्तार को रोक सकता है। इजरायली किसान दूसरे बाजार तलाशने की बात कर रहे हैं, जबकि फिलिस्तीनी निर्यातक उम्मीद कर रहे हैं कि आर्थिक दबाव से बस्तियों का विस्तार सीमित हो सकता है। इसके बीच जॉर्डन घाटी में रहने वाले किसानों के लिए सवाल बहुत सीधा है—पानी, जमीन और बाजार तक बराबर पहुंच कब मिलेगी?

ब्रिटेन का फैसला अब केवल खजूर के आयात का मामला नहीं रहा। यह उस बड़े संघर्ष का हिस्सा बन गया है जिसमें जमीन, पानी, व्यापार, बस्ती विस्तार और दो-राष्ट्र समाधान—सब एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आर्थिक प्रतिबंध इजरायल की नीति पर कितना असर डालते हैं और क्या यूरोप की बढ़ती सख्ती वेस्ट बैंक की जमीनी स्थिति में कोई वास्तविक बदलाव ला पाती है।

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