गाज़ा 12 अक्टूबर 2025
जंग नहीं, अंदरूनी ज्वाला — हमास ने किया फाइटर्स को अलर्ट
गाज़ा की धरती पर इस बार फिर से बारूद और तनाव की गंध तेज़ हो गई है, लेकिन इस बार दुश्मन सीमा के पार नहीं, बल्कि संगठन के भीतर और जनता के बीच मौजूद है। हमास ने एक अभूतपूर्व शक्ति प्रदर्शन करते हुए अपने 7,000 से अधिक लड़ाकों को पूरी तरह से सक्रिय कर दिया है। हालाँकि, आधिकारिक तौर पर इस लामबंदी को गाज़ा पट्टी में “कानून और व्यवस्था बनाए रखने” के लिए ज़रूरी बताया जा रहा है, लेकिन गाज़ा का आम नागरिक अच्छी तरह जानता है कि यह सैन्य शक्ति प्रदर्शन किसी बड़े आंतरिक खतरे, असंतोष या प्रतिद्वंद्वी गुटों के उभरने का स्पष्ट संकेत है। गाज़ा शहर के व्यस्त केंद्र से लेकर दक्षिण में खान यूनिस और रफाह तक, हमास की वर्दी में सशस्त्र जवान अब सघनता से सड़कों पर गश्त कर रहे हैं। उनके पास रॉकेट लॉन्चर, एआर-15 राइफलें और मोटरसाइकिल स्क्वॉड जैसे भारी हथियार हैं — यह सब कुछ किसी विदेशी आक्रमण का जवाब देने के लिए नहीं, अपने ही लोगों पर सख़्त नज़र रखने और किसी भी अंदरूनी विरोध को कुचलने की तैयारी लग रही है।
नियंत्रण या डर? जनता में घबराहट बढ़ी
हमास द्वारा अपने इतने बड़े लड़ाकों के जत्थे को सड़कों पर उतारने के इस अचानक एक्शन ने आम जनता के बीच गहरी दहशत पैदा कर दी है। गाज़ा के लोग अब अनिश्चितता और भय के माहौल में जी रहे हैं, और उनके बीच यह बात खुलकर कही जा रही है — “अब हमें नहीं पता कि कौन हमारी रक्षा करेगा — या कौन हमें मारेगा।” गाज़ा की संकरी गलियों और बाज़ारों में अफवाहें तेज़ी से फैल रही हैं कि कुछ स्थानीय गिरोह, जिनमें शक्तिशाली कबीलों से जुड़े लोग भी शामिल हैं, और प्रतिद्वंद्वी छोटे संगठन अब हमास के सख्त आदेशों का पालन करने से इनकार कर रहे हैं। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, खान यूनिस और जबालिया जैसे क्षेत्रों में पहले से ही हमास बलों और इन असंतुष्ट गुटों के बीच कुछ हल्के संघर्ष और झड़पें हुई हैं। इन संभावित अंदरूनी लड़ाइयों के डर से कई परिवारों ने अपने घरों में राशन जमा करना शुरू कर दिया है, और यहाँ तक कि अस्पतालों में डॉक्टर भी एक संभावित आंतरिक संघर्ष के लिए तैयार हैं — क्योंकि गाज़ा का इतिहास बताता है कि जब हमास अपने लड़ाकों को संगठित करता है, तो आम तौर पर रातें लंबी, हिंसक और डर भारी होती हैं।
पुराने जख्म, नई लड़ाई — कबीलों से टकराव और दमन की कहानियाँ
यह पहला मौका नहीं है जब गाज़ा के सत्ताधारी संगठन हमास ने अपने ही नागरिकों या स्थानीय गुटों पर अपनी सैन्य शक्ति का उपयोग किया हो। कुछ महीनों पहले, गाज़ा में अल-मुजैदा कबीले के साथ हमास की हुई हिंसक झड़प में दर्जनों लोग मारे गए थे — और उस समय भी हमास प्रशासन ने इसे केवल “आंतरिक व्यवस्था की बहाली” बताकर दमन को सही ठहराया था। अब वही दमनकारी भाषा और सैन्य लामबंदी फिर से लौट आई है। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, हमास के कुछ निचले और मध्यम स्तर के गुट अपने मौजूदा नेतृत्व की नीतियों और कार्यशैली से गंभीर रूप से नाराज़ हैं। उनका प्रमुख आरोप यह है कि विदेशी सहायता और महत्त्वपूर्ण हथियारों के बंटवारे में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है, और संगठन के कई शीर्ष कमांडर इस स्थिति का अनुचित लाभ उठा रहे हैं। इसी गंभीर अंदरूनी असंतोष और विद्रोही आवाज़ों को पूरी तरह से दबाने के लिए अब यह व्यापक सैन्य लामबंदी की जा रही है।
अस्पतालों से आवाज़ — “यह जंग हमारे बीच की है”
गाज़ा के विभिन्न अस्पतालों में काम कर रहे डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि स्थिति बेहद खतरनाक है और भय का माहौल अब बदल गया है। उन्होंने कहा कि, “हम पहले भी घायल लाते थे — लेकिन अब लोग यह बताना भी खतरनाक मानते हैं कि उन्हें गोली किसने मारी, या झड़प किस गुट के साथ हुई।” कई संवेदनशील इलाकों में, मानवीय सहायता ले जा रहे ट्रकों और ज़रूरी सामान पर कब्ज़ा करने को लेकर स्थानीय गिरोहों और हमास के सशस्त्र बलों के बीच पहले ही खूनी झड़पें हो चुकी हैं। एक वरिष्ठ चिकित्सक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि, “हम अब किसी विदेशी हमले से नहीं डरते। डर अब अपने ही साये से है — हम अब एक ऐसी दोहरी लड़ाई में फँस गए हैं।” गाज़ा की आम जनता इस वक्त दोहरी मार झेल रही है — एक ओर भूख, बेबसी और जीवनयापन के साधनों की कमी है, तो दूसरी ओर सत्तारूढ़ हमास की सत्ता का डर और अंदरूनी हिंसा का खतरा लगातार बना हुआ है।
सत्ताधारी हमास के भीतर उठता असंतोष
सूत्रों की मानें तो गाज़ा पर शासन कर रहे हमास संगठन के भीतर भी एक तेज़ “सत्ता-भूखी” खींचतान चल रही है, जिसने संगठन को आंतरिक रूप से कमज़ोर कर दिया है। कुछ वरिष्ठ सैन्य कमांडर और राजनीतिक गुट गाज़ा पट्टी में मौजूद अन्य छोटे सशस्त्र समूहों, जैसे इस्लामिक जिहाद, के साथ अपनी नजदीकी बढ़ा रहे हैं, जो हमास के शीर्ष नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती है। वहीं, हमास का कठोर धड़ा दृढ़ता से मानता है कि संगठन की गिरती हुई पकड़ और सत्ता को बचाने के लिए “लाठी ही सबसे बड़ा तर्क” है, और इसीलिए यह सैन्य लामबंदी ज़रूरी है। गाज़ा के राजनीतिक विश्लेषक इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहते हैं कि, “हमास अब केवल गाज़ा पर शासन नहीं कर रहा है, वह अब खुद से भी लड़ रहा है — अपने ही गुटों और आंतरिक असंतोष को दबाने में उसकी ऊर्जा खपत हो रही है।”
गाज़ा की रात में फिर गूंजेगी बंदूक की आवाज़?
हमास का यह व्यापक ‘मोबिलाइजेशन’ केवल एक सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि सत्ता के संरक्षण और आंतरिक विद्रोह को कुचलने का एक आत्म-संरक्षण अभियान अधिक दिखता है। एक बाहरी दुश्मन (इस्राइल) से जंग लड़ने में व्यस्त रहने वाला संगठन अब अपने ही नागरिकों और अपने ही असंतुष्ट धड़ों पर बंदूक तान चुका है, जो गाज़ा की राजनीतिक अस्थिरता को चरम पर पहुँचाता है। गाज़ा की सड़कों पर इस वक्त जो हो रहा है — वह केवल सैन्य राजनीति नहीं है, बल्कि भय और नियंत्रण की एक नई और खतरनाक परत है। जहाँ एक ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय गाज़ा में शांति और मानवीय सहायता की बात कर रहा है, वहीं गाज़ा के आम लोग आज फिर वही मौलिक सवाल पूछ रहे हैं — “हम किससे लड़ रहे हैं — और क्यों? हमारी लड़ाई अब अपने ही घर के भीतर क्यों हो गई है?” यह स्थिति गाज़ा के भविष्य के लिए एक गहन चिंता का विषय है।




