अपराध | रोहित रंजन | ABC NATIONAL NEWS | बेंगलुरु | 5 सितंबर 2026
बेंगलुरु से सामने आई यह घटना कर्ज वसूली के नाम पर इंसानियत की सारी हदें पार करने वाले रवैये पर गंभीर सवाल खड़े करती है। पुलिस के अनुसार, 30 साल की एक महिला को कर्ज की रकम को लेकर अगवा किया गया, पीटा गया, कई दिनों तक बंद रखा गया और उसके कपड़े उतरवाकर वीडियो बनाने का आरोप है। आरोपियों ने महिला से करीब ₹1.5 लाख के मूल कर्ज के बदले ₹11 लाख की मांग की। इतना ही नहीं, पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार महिला को धमकी दी गई कि अगर पैसे नहीं दिए तो उसका वीडियो इंटरनेट पर वायरल कर दिया जाएगा।
काम और पैसे का झांसा देकर बुलाया, फिर शुरू हुआ अत्याचार
पुलिस के मुताबिक मामला 27 अगस्त से शुरू हुआ। महिला को कथित तौर पर नाज़त बेगम ने काम और पैसे देने के बहाने मेट्रो लेआउट स्थित अपने घर बुलाया था। महिला शाम करीब साढ़े पांच बजे अपने नाबालिग बेटे के साथ वहां पहुंची। शिकायत के अनुसार, इसके बाद रेशमा बानू, उसका पति सुहैल और दो अन्य लोग वहां पहुंचे और महिला के साथ मारपीट शुरू कर दी।
आरोप है कि महिला को चाकू दिखाकर डराया गया, उसका मोबाइल फोन भी तोड़ दिया गया और उससे ₹11 लाख की मांग की गई। यह रकम उस कर्ज और ब्याज के नाम पर मांगी जा रही थी, जो महिला ने करीब दो साल पहले लिया था।
₹50 हजार और ₹1 लाख के कर्ज का बना ₹11 लाख का दबाव
शिकायत के अनुसार महिला ने करीब दो साल पहले नाज़त से ₹50 हजार उधार लिए थे, जिसे हर सप्ताह किस्त में चुकाने की व्यवस्था थी। इसके अलावा उसने रेशमा बानू से करीब ₹1 लाख ब्याज पर लिया था। आर्थिक परेशानी के कारण महिला पिछले कुछ समय से भुगतान नहीं कर पा रही थी।
लेकिन आरोप है कि कर्ज की वसूली के लिए उस पर ऐसा दबाव बनाया गया, जिसने पूरे मामले को बेहद गंभीर अपराध में बदल दिया। महिला और उसके बच्चे को कथित तौर पर ऑटो रिक्शा में बैठाकर रात करीब सात बजे कुंबलगोडु स्थित एक मकान में ले जाया गया।
बंद कमरे में पीटने और धमकाने का आरोप
एफआईआर में दर्ज शिकायत के अनुसार, महिला को मकान की पहली मंजिल पर एक कमरे में बंद कर दिया गया। आरोप है कि वहां उसे डंडे से पीटा गया, गालियां दी गईं और पैसे लौटाने के लिए लगातार धमकाया गया।
लेकिन घटना यहीं नहीं रुकी। शिकायत के अनुसार 29 अगस्त को महिला के कपड़े उतरवाए गए और मोबाइल फोन से उसका वीडियो बनाया गया। इसके बाद उसे धमकी दी गई कि अगर उसने पैसे नहीं दिए तो वीडियो को वायरल कर दिया जाएगा। यह आरोप मामले को सिर्फ कर्ज वसूली से आगे ले जाकर महिला की गरिमा, सुरक्षा और निजता पर गंभीर हमले का रूप देता है।
वेश्यावृत्ति में धकेलने की भी धमकी का आरोप
शिकायत में इससे भी गंभीर आरोप लगाया गया है। महिला ने पुलिस को बताया कि सुहैल ने उसे पैसे वसूलने के लिए वेश्यावृत्ति में धकेलने की धमकी दी। अगर जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो मामला और गंभीर हो सकता है।
महिला का एक बड़ा बेटा भी था, जिसे 29 अगस्त को उसकी मां के घर भेज दिया गया। लेकिन महिला को वहीं बंद रखा गया। चार दिन तक वह इस डर और दबाव के बीच रही कि न जाने उसके साथ आगे क्या किया जाएगा।
वकील के पास भी ले गए, कागजों पर हस्ताक्षर कराने का आरोप
शिकायत के मुताबिक 30 अगस्त को महिला को सिटी मार्केट के पास एक वकील के पास भी ले जाया गया। आरोप है कि वहां उससे कुछ कागजों पर हस्ताक्षर करवाए गए। इन कागजों में क्या था और महिला ने किन परिस्थितियों में हस्ताक्षर किए, यह जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
बाथरूम जाने का मौका मिला और महिला ने पुलिस को खबर कर दी
चार दिन तक कैद रहने के बाद आखिरकार 31 अगस्त को महिला को बच निकलने का मौका मिला। पुलिस के अनुसार महिला ने बाथरूम जाने की बात कही। जब रेशमा ने कमरे का दरवाजा खोला और बाहर गई, तभी महिला ने पुलिस तक सूचना पहुंचाने का मौका हासिल किया।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और महिला को वहां से बाहर निकाला। इसके बाद उसे चंद्रा लेआउट पुलिस थाने ले जाया गया। 31 अगस्त को पुलिस ने मामला दर्ज किया।
तीन गिरफ्तार, बाकी आरोपियों की तलाश जारी
पुलिस ने इस मामले में नाज़त बेगम, रेशमा बानू और उसके पति सुहैल को गिरफ्तार किया है। सैफ समेत कुछ अन्य लोगों के नाम भी मामले में सामने आए हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है। आरोपियों के खिलाफ अपहरण, जबरन बंधक बनाने, मारपीट और आपराधिक धमकी से जुड़ी धाराओं के साथ भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धाराएं लगाई गई हैं।
कर्ज वसूली या अपराध का खुला आतंक?
इस मामले ने एक बेहद गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है—क्या किसी से कर्ज की रकम वसूलने के नाम पर उसे अगवा करना, पीटना, बंद रखना, उसकी गरिमा को चोट पहुंचाना और वीडियो वायरल करने की धमकी देना किसी भी हालत में स्वीकार किया जा सकता है? कर्ज की रकम कितनी भी हो, उसकी वसूली के लिए कानून से बाहर जाकर किसी व्यक्ति के साथ हिंसा या अपमान का रास्ता नहीं अपनाया जा सकता।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और अदालत में आरोपों की सच्चाई सबूतों के आधार पर तय होगी। लेकिन इस घटना की भयावहता इस बात में है कि ₹1.5 लाख के कर्ज से शुरू हुआ विवाद कथित तौर पर ₹11 लाख की मांग, चार दिन की कैद और महिला की निजता तथा सम्मान पर हमले तक पहुंच गया। बेंगलुरु की यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि कर्ज वसूली के नाम पर कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत की भी चेतावनी है।




