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एस्टेरॉयड खोजने वाले शिक्षक से लेकर ‘गणित के जादूगर’ तक, 82 शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज करेंगी सम्मानित; 48 स्कूली शिक्षक, 21 उच्च शिक्षा के शिक्षक और कौशल विकास मंत्रालय के 13 प्रशिक्षक शामिल

राष्ट्रीय/ शिक्षा | लिप्सा मिश्रा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 5 सितंबर 2026

शिक्षकों के सम्मान का खास दिन

देशभर में आज शिक्षक दिवस के मौके पर उन शिक्षकों को सम्मानित किया जा रहा है जिन्होंने पढ़ाई को केवल किताबों और कक्षा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि नए प्रयोगों, रचनात्मक तरीके और समाज के बीच काम करके शिक्षा को नई दिशा दी। इस वर्ष 82 शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार दिया जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इन शिक्षकों को सम्मानित करेंगी। पुरस्कार पाने वालों में स्कूलों से लेकर उच्च शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र से जुड़े शिक्षक शामिल हैं। इन शिक्षकों की कहानियां इसलिए भी खास हैं क्योंकि किसी ने अंतरिक्ष और क्षुद्रग्रहों की खोज से विद्यार्थियों को जोड़ा, तो किसी ने गणित को बच्चों के लिए आसान और रोचक बनाया।

48 स्कूली शिक्षक, 21 उच्च शिक्षा के शिक्षक

इस वर्ष सम्मान पाने वाले 82 शिक्षकों में 48 स्कूली शिक्षक, 21 उच्च शिक्षा संस्थानों के शिक्षक और शिक्षक सदस्य तथा कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय से जुड़े 13 प्रशिक्षक शामिल हैं। यानी राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार का दायरा केवल स्कूलों तक सीमित नहीं है। उच्च शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण के क्षेत्र में विद्यार्थियों को तैयार करने वाले शिक्षकों को भी इस सम्मान में जगह दी गई है। इसका उद्देश्य ऐसे शिक्षकों को सामने लाना है जिन्होंने अपने काम से विद्यार्थियों की पढ़ाई, सोच और भविष्य पर सकारात्मक असर डाला है।

किसी ने क्षुद्रग्रह खोजे, किसी ने गणित को बनाया आसान

पुरस्कार पाने वालों में कुछ शिक्षक ऐसे हैं जिनका काम सामान्य कक्षा शिक्षण से काफी अलग है। इनमें क्षुद्रग्रहों की खोज में विद्यार्थियों को शामिल करने वाले शिक्षक, गणित को रोचक तरीके से समझाने वाले शिक्षक और कोयला खनन क्षेत्र में समुदाय के साथ मिलकर शिक्षा के लिए काम करने वाले शिक्षक शामिल हैं। एक शिक्षक ने स्पेशल ओलंपिक्स हॉकी से जुड़े खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने में योगदान दिया। इन उदाहरणों से साफ होता है कि एक शिक्षक का काम केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना नहीं, बल्कि बच्चों में प्रतिभा पहचानना, उन्हें अवसर देना और समाज के साथ जोड़ना भी हो सकता है।

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भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े शिक्षक भी सम्मान सूची में

इस साल पुरस्कार पाने वाले उच्च शिक्षा के शिक्षकों में भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों पर काम करने वाले शिक्षक भी शामिल हैं। इनमें वास्तु शास्त्र, भगवद्गीता और संस्कृत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से जोड़ने जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले शिक्षक शामिल हैं। यह दिखाता है कि शिक्षा के क्षेत्र में पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक को साथ लेकर चलने की कोशिश भी पुरस्कार के लिए किए गए चयन में दिखाई दे रही है।

संस्कृत और एआई का मेल भी शिक्षा का नया प्रयोग

संस्कृत जैसी प्राचीन भाषा को आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जोड़ने का प्रयास शिक्षा के बदलते स्वरूप को दिखाता है। आज एआई तेजी से पढ़ाई और शोध का हिस्सा बन रहा है। ऐसे में भारतीय भाषाओं और पारंपरिक ज्ञान को नई तकनीक के साथ जोड़ने की कोशिश विद्यार्थियों के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार में ऐसे शिक्षकों का शामिल होना यह संकेत देता है कि शिक्षा में परंपरा और तकनीक के बीच नए प्रयोगों को भी महत्व दिया जा रहा है।

कोयला खनन क्षेत्र से लेकर विशेष जरूरत वाले खिलाड़ियों तक

पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों की पृष्ठभूमि भी काफी विविध है। किसी ने कोयला खनन से जुड़े समुदायों के बीच शिक्षा और सामाजिक नेतृत्व पर काम किया तो किसी ने स्पेशल ओलंपिक्स हॉकी के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देकर खेल के माध्यम से बच्चों और युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर दिया। ऐसे शिक्षकों का काम यह बताता है कि शिक्षा का असर केवल परीक्षा के अंकों तक नहीं मापा जा सकता। किसी बच्चे में आत्मविश्वास पैदा करना, उसे खेल के मैदान तक पहुंचाना, वैज्ञानिक सोच विकसित करना या समाज के साथ जोड़ना भी शिक्षक की बड़ी भूमिका है।

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शिक्षक केवल पढ़ाता नहीं, भविष्य तैयार करता है

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार का महत्व इसलिए भी है क्योंकि शिक्षक किसी भी देश की शिक्षा व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। अच्छी किताबें, आधुनिक तकनीक और बेहतर स्कूल भवन जरूरी हैं, लेकिन विद्यार्थियों तक ज्ञान पहुंचाने और उन्हें सीखने के लिए प्रेरित करने वाला शिक्षक ही शिक्षा को वास्तविक अर्थ देता है। इस वर्ष सम्मानित होने वाले 82 शिक्षकों के काम में अलग-अलग क्षेत्र दिखाई देते हैं, लेकिन इन सभी में एक बात समान है—उन्होंने अपनी जिम्मेदारी को केवल नौकरी की तरह नहीं देखा, बल्कि विद्यार्थियों और समाज में बदलाव लाने के माध्यम के रूप में काम किया।

आज राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार समारोह शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों को सम्मानित करेंगी। देश के अलग-अलग हिस्सों से चुने गए ये 82 शिक्षक शिक्षा के अलग-अलग क्षेत्रों में किए गए अपने काम के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल कर रहे हैं। किसी की पहचान विज्ञान और क्षुद्रग्रह खोज से बनी, किसी की गणित शिक्षण से, किसी की सामुदायिक सेवा से और किसी की भारतीय ज्ञान परंपरा तथा आधुनिक तकनीक के मेल से।

शिक्षा में बदलाव लाने वालों को राष्ट्रीय पहचान

इन शिक्षकों का सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। यह उन हजारों शिक्षकों के काम की भी पहचान है जो रोजाना कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, खेल मैदानों और समुदायों के बीच विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य के लिए तैयार करते हैं। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 में अलग-अलग क्षेत्रों और अलग-अलग तरह के शिक्षण प्रयोगों को जगह मिलना बताता है कि आज शिक्षक की भूमिका लगातार बदल रही है। अब शिक्षक केवल किताब पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सोच विकसित करने वाला मार्गदर्शक, तकनीक से जोड़ने वाला प्रशिक्षक, समुदाय का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति और बच्चों की छिपी प्रतिभा को सामने लाने वाला मार्गदर्शक भी है।

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