अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू | 26 अगस्त 2026
नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने सिर्फ गांवों और सड़कों को नहीं उजाड़ा, बल्कि दुनिया के अलग-अलग देशों से हिमालय की खूबसूरती देखने, ट्रेकिंग करने और तीर्थयात्रा के लिए पहुंचे सैकड़ों लोगों को अचानक मौत और जिंदगी के बीच खड़ा कर दिया है। नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 579 पर्यटक लापता हैं, जिनमें 466 विदेशी नागरिक 28 अलग-अलग देशों से हैं। इनमें 54 अमेरिकी और 33 ब्रिटिश नागरिक शामिल हैं, जबकि नेपाल के 113 पर्यटक भी अब तक लापता बताए जा रहे हैं। इन लोगों के परिवार हजारों किलोमीटर दूर बैठकर अपने अपनों की एक खबर का इंतजार कर रहे हैं। किसी को नहीं पता कि उनका बेटा कहां है, बेटी किस हाल में है, जीवनसाथी सुरक्षित है या किसी होटल, सड़क, नदी किनारे या मलबे के नीचे फंसा हुआ है। जिस नेपाल में ये लोग पहाड़ों, नदियों और मंदिरों की खूबसूरती देखने पहुंचे थे, वहीं कुछ घंटों में पानी और मलबे की ऐसी दीवार आई कि कई लोगों का अपने परिवार से आखिरी संपर्क ही टूट गया।
579 पर्यटक लापता, 466 विदेशी नागरिकों की तलाश
इस त्रासदी की सबसे दर्दनाक तस्वीर उन विदेशी पर्यटकों की है, जिनका कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है। नेपाल पुलिस के अनुसार 579 पर्यटक अब तक लापता हैं। इनमें 466 विदेशी नागरिक हैं और वे 28 अलग-अलग देशों से नेपाल पहुंचे थे। ये लोग अलग-अलग पर्यटन और तीर्थ मार्गों पर थे। कुछ ट्रेकिंग के लिए निकले थे, कुछ हिमालयी इलाकों की यात्रा पर थे और कुछ धार्मिक यात्रा के सिलसिले में नेपाल पहुंचे थे। अचानक आई बाढ़ ने कई मार्गों को काट दिया, पुलों को बहा दिया और संचार व्यवस्था को ठप कर दिया। ऐसे में परिवारों के लिए अपने लोगों से संपर्क करना लगभग असंभव हो गया है। हर गुजरता घंटा उनकी बेचैनी बढ़ा रहा है। कई परिवारों के मोबाइल फोन पर आखिरी बार अपने प्रियजन की लोकेशन दिखाई दी होगी, किसी ने शायद आखिरी बार अपने घर फोन कर कहा होगा कि सब ठीक है, और उसके बाद फोन हमेशा के लिए खामोश हो गया।
अमेरिका और ब्रिटेन के नागरिक भी लापता
लापता विदेशी नागरिकों में अमेरिका और ब्रिटेन के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हैं। नेपाल के पर्यटन बोर्ड और पुलिस के अनुसार 54 अमेरिकी पर्यटक और 33 ब्रिटिश नागरिक लापता हैं। अमेरिका ने कहा है कि उसका दूतावास नेपाल के अधिकारियों और स्थानीय टूर एजेंसियों के साथ मिलकर प्रभावित अमेरिकी नागरिकों की जानकारी जुटा रहा है। ब्रिटेन की सरकार ने भी अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि वह प्रभावित ब्रिटिश नागरिकों और उनके परिवारों की सहायता के लिए हर संभव प्रयास करेगी। लेकिन इस वक्त सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि तबाही वाले कई इलाके खुद राहत टीमों के लिए भी आसानी से पहुंच योग्य नहीं हैं। सड़कें बह चुकी हैं, पुल टूट चुके हैं और कई जगह मलबे ने रास्ते पूरी तरह बंद कर दिए हैं। ऐसे में किसी विदेशी पर्यटक तक पहुंचना केवल एक खोज अभियान नहीं, बल्कि समय के खिलाफ चल रही जिंदगी बचाने की दौड़ बन गया है।
28 देशों के परिवारों की निगाहें नेपाल पर
इस आपदा का दर्द नेपाल की सीमाओं से बहुत दूर तक फैल गया है। 28 देशों के नागरिकों के परिवार अब नेपाल से आने वाली हर सूचना पर नजर लगाए हुए हैं। किसी परिवार के लिए यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है। 579 लापता पर्यटकों में हर व्यक्ति के पीछे एक परिवार, रिश्ते, उम्मीदें और अधूरी जिंदगी की कहानी है। कोई अपने माता-पिता के साथ यात्रा पर आया होगा, कोई दोस्तों के साथ, कोई जीवनसाथी के साथ और कोई अकेले दुनिया देखने निकला होगा। परिवारों के लिए सबसे कठिन स्थिति वह है जिसमें मौत की पुष्टि भी नहीं हुई और सुरक्षित होने की खबर भी नहीं मिली। यही अनिश्चितता इस त्रासदी को और भयावह बना रही है।
नेपाल में 157 मौतें, लेकिन तलाश अब भी जारी
नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के अनुसार बाढ़ में 157 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। लेकिन यह संख्या अंतिम नहीं है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और कई लोग अब भी मलबे, बाढ़ प्रभावित गांवों और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में फंसे हो सकते हैं। पुलिस, सेना और स्थानीय बचाव दलों के साथ खोजी कुत्तों और ड्रोन को भी अभियान में लगाया गया है। नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार सेना के 1,697 जवान राहत और बचाव अभियान में तैनात हैं, जबकि 656 अन्य कर्मियों को तैयार रखा गया है। हेलीकॉप्टरों के जरिए लोगों को सुरक्षित निकालने का अभियान भी जारी है।
तिब्बत में भी 265 लोग लापता
नेपाल से सटे चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी हालात बेहद गंभीर हैं। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार वहां तीन लोगों की मौत हुई है और 265 लोग लापता हैं। ग्यिरोंग सीमा क्षेत्र में पानी और मलबे की तेज लहर ने इमारतों और सीमा ढांचे को प्रभावित किया। यहां भी कई विदेशी यात्री और कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े लोग मौजूद थे। एक समूह के 77 लोगों के बाढ़ की चपेट में आने की जानकारी ने चिंता और बढ़ा दी है। उनके बारे में तत्काल आधिकारिक जानकारी हासिल करना मुश्किल रहा।
किसी देश का पर्यटक नहीं, किसी परिवार का अपना है
इस पूरी त्रासदी में सबसे जरूरी बात यह है कि लापता लोगों को सिर्फ विदेशी पर्यटकों की संख्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। हर एक लापता पर्यटक किसी का बेटा, बेटी, मां, पिता, भाई, बहन या जीवनसाथी है। नेपाल घूमने निकले इन लोगों ने शायद सोचा भी नहीं होगा कि उनकी यात्रा अचानक जिंदगी की सबसे भयावह लड़ाई बन जाएगी। आज उनके परिवारों की उम्मीद सिर्फ एक फोन कॉल पर टिकी है—“हम सुरक्षित हैं।”
नेपाल में बचाव अभियान जारी है और दुनिया के कई देश अपने नागरिकों की जानकारी जुटाने में जुटे हैं। लेकिन जब तक हर लापता व्यक्ति की स्थिति सामने नहीं आती, तब तक इस त्रासदी की असली तस्वीर पूरी नहीं मानी जा सकती। 579 पर्यटकों की तलाश अब सिर्फ नेपाल का बचाव अभियान नहीं, बल्कि 28 देशों के परिवारों की उम्मीद बचाने की कोशिश है।




