शिक्षा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 17 अगस्त 2026
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी NTA एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की गुणवत्ता और जवाबदेही को लेकर सवालों के घेरे में है। जून 2026 में 87 विषयों में आयोजित UGC-NET परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों की ओर से अंग्रेजी, समाजशास्त्र और कॉमर्स के प्रश्नपत्रों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आईं। शिकायतों की समीक्षा के लिए गठित समिति ने पाया कि इन तीनों विषयों के प्रश्नपत्रों में सिर्फ छोटी-मोटी प्रिंटिंग गलतियां नहीं थीं, बल्कि तथ्यात्मक, टाइपोग्राफिकल और अनुवाद संबंधी कई गंभीर खामियां थीं। इसके बाद NTA ने इन तीन विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला किया है। अंग्रेजी और कॉमर्स की पुनर्परीक्षा 9 सितंबर, जबकि समाजशास्त्र की पुनर्परीक्षा 10 सितंबर 2026 को होगी।
एक गलती नहीं, गलतियों की पूरी फेहरिस्त
NTA के निदेशक अभिषेक सिंह के मुताबिक, अभ्यर्थियों से बड़ी संख्या में शिकायतें मिलने के बाद एक समिति ने प्रश्नपत्रों की समीक्षा की। समिति के अनुसार प्रश्नपत्रों में प्रमुख विद्वानों के नाम गलत लिखे गए, किताबों के शीर्षक बिगड़े हुए थे, सवालों की भाषा और व्याकरण में गलतियां थीं, विराम चिह्नों का गलत इस्तेमाल हुआ और कई स्थापित अवधारणाओं के लिए गैर-मानक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। समाजशास्त्र के प्रश्नपत्र में तो कुछ चर्चित विद्वानों के नाम तक बदल गए—Ritzer को ‘Putzer’, Parsons को ‘Parsow’ और A.R. Desai को ‘A.K. Desai’ लिखा गया। कुछ सवाल ऐसे भी बताए गए जो निर्धारित पाठ्यक्रम से असंबद्ध नजर आए। ऐसे में सवाल सिर्फ एक-दो गलत प्रश्नों का नहीं रहा, बल्कि पूरे प्रश्नपत्र की विश्वसनीयता और परीक्षा की निष्पक्षता पर खड़ा हो गया।
अंग्रेजी और कॉमर्स में पुराने सवालों की पुनरावृत्ति
सबसे गंभीर सवाल प्रश्नों की कथित पुनरावृत्ति को लेकर सामने आया। अंग्रेजी के पेपर में 150 में से 67 सवाल दिसंबर 2024 में आयोजित NET परीक्षा के अंग्रेजी प्रश्नपत्र से समान बताए गए हैं। खास बात यह बताई गई कि कई मामलों में उत्तर विकल्पों का क्रम भी वही था। कॉमर्स के पेपर में भी 80 से अधिक प्रश्नों के पहले के प्रश्नपत्र से दोहराए जाने का दावा किया गया। परीक्षा जैसी प्रतियोगी व्यवस्था में, जहां एक-एक सवाल अभ्यर्थी की रैंक और पात्रता पर असर डाल सकता है, इतनी बड़ी संख्या में पुराने प्रश्नों की पुनरावृत्ति परीक्षा की समानता और अवसर की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
NTA ने कहा—सिर्फ सवाल हटाने से समस्या नहीं सुलझेगी
NTA ने अपने सार्वजनिक नोटिस में स्पष्ट किया कि इन प्रश्नपत्रों में खामियों की मात्रा इतनी अधिक थी कि चुनौती प्रक्रिया के बाद केवल गलत सवालों को हटाकर समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता। एजेंसी के अनुसार निष्पक्ष और त्रुटिरहित परीक्षा के मानकों को बनाए रखने के लिए इन तीनों विषयों की पुनर्परीक्षा कराना जरूरी था। यानी NTA ने खुद माना कि प्रश्नपत्रों में मौजूद कमियां इतनी व्यापक थीं कि केवल कुछ प्रश्नों को रद्द करके परिणाम तैयार करना उचित नहीं होगा। यह फैसला उन लाखों अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण है जो UGC-NET के जरिए असिस्टेंट प्रोफेसर, जूनियर रिसर्च फेलोशिप और PhD प्रवेश की पात्रता हासिल करने की उम्मीद रखते हैं।
अभ्यर्थियों को दोबारा फीस नहीं देनी होगी
पुनर्परीक्षा में शामिल होने वाले अंग्रेजी, समाजशास्त्र और कॉमर्स के अभ्यर्थियों के लिए राहत की बात यह है कि दोबारा परीक्षा के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। परीक्षा के शहर, केंद्र और एडमिट कार्ड से संबंधित जानकारी NTA अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अलग से जारी करेगा। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आगे की सूचना के लिए NTA की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर बनाए रखें।
बाकी 84 विषयों का परिणाम तय कार्यक्रम के अनुसार
NTA ने यह भी स्पष्ट किया है कि बाकी 84 विषयों के अभ्यर्थियों का परिणाम इन तीन विषयों की पुनर्परीक्षा के कारण प्रभावित नहीं होगा। जिन 84 विषयों के लिए पहले ही Answer Key Challenge की प्रक्रिया शुरू की गई है, उनके परिणाम निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी किए जाएंगे। इन विषयों में JRF सीटों का आवंटन और असिस्टेंट प्रोफेसर पात्रता तथा PhD प्रवेश के लिए ई-सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया भी तीन विषयों की पुनर्परीक्षा के कारण नहीं रोकी जाएगी।
पात्रता के लिए 6 फीसदी का नियम बरकरार
NTA के मुताबिक, असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए पात्र घोषित किए जाने वाले उम्मीदवारों की संख्या जून 2026 में परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों या पुनर्परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों में से जिसकी संख्या अधिक होगी, उसके 6 फीसदी के बराबर होगी। इससे पुनर्परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों के लिए पात्रता प्रक्रिया को लेकर कुछ स्पष्टता मिलती है।
फिर सामने आया NTA की परीक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
UGC-NET की इन तीन परीक्षाओं को दोबारा कराने का फैसला केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश और पात्रता परीक्षाओं में प्रश्नपत्र तैयार करने, विशेषज्ञों की समीक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। जिस परीक्षा के जरिए देशभर में विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए भविष्य के शिक्षक, शोधकर्ता और अकादमिक प्रतिभा चुनी जाती है, उसके प्रश्नपत्र में नाम, तथ्य, भाषा, अनुवाद और पुराने प्रश्नों की बड़ी संख्या में पुनरावृत्ति जैसी खामियां सामने आना अभ्यर्थियों के भरोसे के लिए चिंता का विषय है। अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि 9 और 10 सितंबर की पुनर्परीक्षा पूरी तरह त्रुटिरहित, पारदर्शी और समान अवसर के सिद्धांत पर हो, ताकि अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा के बाद किसी नई शिकायत का सामना न करना पड़े।




