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संसद में NEET पर सवाल रोकने का आरोप, CJP ने सरकार को घेरा

लोकसभा में NEET-UG 2026 की फीस वापसी, छात्रों के विरोध प्रदर्शन, बुनियादी सुविधाओं और पेपर लीक जैसे मुद्दों से जुड़े सवाल कथित तौर पर स्वीकार नहीं किए जाने पर CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने केंद्र पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अगर सांसद संसद में सरकार से जवाब नहीं मांग सकते, तो जवाबदेही तय करने का रास्ता क्या है।

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 17 अगस्त 2026

लोकसभा में NEET और छात्रों के विरोध प्रदर्शन से जुड़े कथित तौर पर अस्वीकृत सवालों को लेकर Cockroach Janta Party (CJP) ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने आरोप लगाया कि तीन सेटों में पूछे गए सवालों को केंद्र सरकार के कथित दबाव में रोका गया।

दास के मुताबिक, DMK सांसद माथेश्वरन वी.एस. ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय से NEET-UG 2026 की आवेदन फीस की वापसी, छात्रों के आंदोलन, पेपर लीक, शिक्षा सुधार और प्रदर्शनकारियों को उपलब्ध कराई गई बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल पूछे थे।

जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े सवाल भी शामिल

CJP का दावा है कि सवालों में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पेयजल और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने, सरकार और प्रदर्शनकारी युवाओं के बीच बातचीत तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान नागरिकों के साथ किए गए व्यवहार से जुड़े मुद्दे भी शामिल थे।

दास ने कहा कि इन सवालों को लोकसभा के नियम 41(2) की विभिन्न धाराओं के तहत अस्वीकार किया गया। उन्होंने इन कारणों को “अजीब” बताते हुए कहा कि सवाल पूरी तरह वैध थे।

‘संसद को चुप नहीं कराया जा सकता’

सौरव दास ने सवाल उठाया कि अगर ऐसे मुद्दे संसद में नहीं उठाए जा सकते, तो सरकार से जवाबदेही आखिर कहां तय होगी। उन्होंने कहा कि Question Hour का उद्देश्य ही सरकार से सवाल पूछना और कार्यपालिका को जवाबदेह बनाना है।

उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह की संसद में कथित अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाया और कहा कि छात्रों के विरोध के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़े सवालों का जवाब संसद में दिया जाना चाहिए था।

CJP का यह बयान उस आंदोलन की पृष्ठभूमि में आया है, जिसमें संगठन ने NEET में कथित अनियमितताओं को लेकर कई सप्ताह तक दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था। संगठन ने तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी की थी। बाद में सरकार के साथ बातचीत के बाद प्रदर्शन वापस लेने की घोषणा की गई।

दास ने कहा कि सांसद का सरकार से सवाल पूछना संसदीय लोकतंत्र का मूल अधिकार है और यदि संसद में जनता से जुड़े सवालों के जवाब नहीं मिलेंगे, तो लोगों में असंतोष बढ़ सकता है और वे सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हो सकते हैं।

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