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आय से अधिक संपत्ति: राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट के मई और जुलाई के आदेशों के खिलाफ याचिका; मामले को दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की भी मांग, 17 अगस्त को होगी सुनवाई

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 13 अगस्त 2026

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच से संबंधित इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने शीर्ष अदालत से अनुरोध किया है कि हाईकोर्ट के उन निर्देशों को निरस्त किया जाए, जिनमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के सत्यापन के लिए कहा गया था।

राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं। पहली याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट के मई और जुलाई में पारित आदेशों को चुनौती देने से संबंधित है, जबकि दूसरी याचिका में मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट से दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की मांग की गई है। दोनों याचिकाएं 7 अगस्त को दाखिल की गई थीं।

BJP कार्यकर्ता की शिकायत से शुरू हुआ मामला

यह मामला कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विघ्नेश शिशिर द्वारा दायर शिकायत से संबंधित है। शिकायत में राहुल गांधी पर उनकी ज्ञात आय के स्रोतों की तुलना में अधिक संपत्ति रखने का आरोप लगाया गया है।

हाईकोर्ट में दायर याचिका में शिकायतकर्ता ने इन आरोपों की जांच CBI और ED से कराने का अनुरोध किया था। इसके पश्चात इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले में संबंधित केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका को लेकर निर्देश जारी किए।

यह उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी पर लगाए गए ये आरोप अभी तक न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं। मामला वर्तमान में जांच एवं विधिक प्रक्रिया के अधीन है।

हाईकोर्ट ने मई में क्या आदेश दिया था?

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मई में कहा था कि यदि शिकायत संबंधित जांच एजेंसियों को प्राप्त हुई है, तो उसमें लगाए गए आरोपों का विधिसम्मत तरीके से सत्यापन किया जाए।

अदालत ने CBI और ED को कानून के अंतर्गत उपलब्ध अधिकारों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने की स्वतंत्रता भी प्रदान की थी। साथ ही, दोनों एजेंसियों से मामले में की गई कार्रवाई और प्रगति की स्थिति पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया था।

हाईकोर्ट के इस आदेश का आशय यह नहीं था कि अदालत ने राहुल गांधी को आय से अधिक संपत्ति का दोषी ठहराया है। यह आदेश केवल आरोपों के सत्यापन और एजेंसियों की विधिक प्रक्रिया से संबंधित था।

CBI के हलफनामे पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

20 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने CBI द्वारा दाखिल हलफनामे पर असंतोष व्यक्त किया। अदालत ने कहा कि हलफनामा उसके पूर्व निर्देशों के अनुरूप नहीं था।

इसके साथ ही अदालत ने ED द्वारा प्रारंभ की गई कार्रवाई का भी संज्ञान लिया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि सत्यापन या जांच के दौरान कोई प्रासंगिक सामग्री या ऐसी जानकारी सामने आती है, जिससे किसी अवैध गतिविधि का संकेत मिलता है, तो ED कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को निर्धारित थी।

दिल्ली हाईकोर्ट ट्रांसफर की भी मांग

राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर दूसरी याचिका में मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट से दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है।

इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अब दो प्रमुख मुद्दे विचाराधीन हैं—पहला, इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा CBI और ED के सत्यापन संबंधी निर्देशों को चुनौती; और दूसरा, पूरे मामले को दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की मांग।

17 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

राहुल गांधी की दोनों याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में 17 अगस्त 2026 को सुनवाई निर्धारित है।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ द्वारा की जाएगी।

यह सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि शीर्ष अदालत यह तय करेगी कि इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा जांच एजेंसियों को दिए गए सत्यापन संबंधी निर्देशों में हस्तक्षेप आवश्यक है या नहीं। साथ ही, मामले को दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की मांग पर भी विचार किया जाएगा।

राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मामला

राहुल गांधी देश के प्रमुख विपक्षी नेताओं में से एक हैं और वर्तमान में लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं। ऐसे में उनके विरुद्ध किसी भी जांच या कानूनी कार्रवाई का राजनीतिक महत्व भी बढ़ जाता है।

कांग्रेस की ओर से ऐसे मामलों में सरकार और जांच एजेंसियों के कथित राजनीतिक दुरुपयोग के आरोप लगाए जाते रहे हैं, जबकि भाजपा और सरकार का कहना है कि जांच एजेंसियां विधि के अनुसार स्वतंत्र रूप से कार्य करती हैं और किसी भी व्यक्ति को उसके राजनीतिक पद के आधार पर जांच से छूट नहीं दी जा सकती।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के रुख के स्पष्ट होने तक यह कहना जल्दबाजी होगी कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

संपत्ति के आंकड़ों को लेकर भी चर्चा

इस मामले के बीच राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संपत्ति से जुड़े आंकड़ों की भी चर्चा सामने आई है। जनसत्ता की रिपोर्ट में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच के हवाले से 2014 से 2024 के बीच दोबारा निर्वाचित हुए 102 लोकसभा सांसदों के चुनावी हलफनामों के विश्लेषण का उल्लेख किया गया है।

हालांकि, किसी सांसद की घोषित संपत्ति में समय के साथ वृद्धि अपने आप में आय से अधिक संपत्ति का प्रमाण नहीं मानी जा सकती। किसी संपत्ति को अवैध या ज्ञात आय स्रोतों से अधिक सिद्ध करने के लिए विधिसम्मत जांच और ठोस साक्ष्यों की आवश्यकता होती है।

अब नजर सुप्रीम कोर्ट पर

वर्तमान में राहुल गांधी की याचिका सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है और 17 अगस्त की सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। अदालत यह तय करेगी कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के CBI-ED सत्यापन संबंधी निर्देशों में हस्तक्षेप किया जाए या नहीं, तथा क्या मामले को दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जांच आगे बढ़ेगी, हाईकोर्ट के निर्देशों पर रोक लगेगी या याचिका पर कोई अन्य कानूनी राहत प्रदान की जाएगी। फिलहाल, राहुल गांधी के विरुद्ध लगाए गए आय से अधिक संपत्ति के आरोप केवल आरोप हैं, जिनका न्यायिक रूप से सिद्ध होना शेष है।

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