Home » Politics » ‘आज सिर्फ वंदे मातरम् गाने आए हैं’: प्रियंका गांधी का अमित शाह पर तंज

‘आज सिर्फ वंदे मातरम् गाने आए हैं’: प्रियंका गांधी का अमित शाह पर तंज

मानसून सत्र के आखिरी दिन संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने; प्रियंका बोलीं—‘पूरा सत्र चला, लेकिन न प्रधानमंत्री आए, न गृह मंत्री’

राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 13 अगस्त 2026

संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की संसद में मौजूदगी को लेकर तीखा तंज किया। संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत में प्रियंका गांधी ने कहा कि “गृह मंत्री आज आए हैं सिर्फ ‘वंदे मातरम्’ गाने के लिए। पूरा सत्र चला लेकिन ना प्रधानमंत्री आए और ना ही गृह मंत्री। ऐसे में लोकतंत्र और संसद कैसे चलेगी?”

प्रियंका गांधी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई, जब संसद का मानसून सत्र लगातार हंगामे और सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच गतिरोध के बाद गुरुवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ था और 13 अगस्त तक चलने के लिए निर्धारित था। कुल 19 बैठकें निर्धारित थीं।

अमित शाह की मौजूदगी पर प्रियंका ने उठाए सवाल

प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री पूरे सत्र के दौरान सदन में नहीं आए और अंतिम दिन ‘वंदे मातरम्’ के कार्यक्रम के लिए पहुंचे। उनका सवाल केवल अमित शाह की मौजूदगी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने इसे संसद और लोकतांत्रिक जवाबदेही से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा।

उनका कहना था कि जब संसद का पूरा सत्र चलता है और विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगता है, तब प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की सदन में मौजूदगी महत्वपूर्ण होती है।

प्रियंका का बयान कांग्रेस के उस व्यापक आरोप का हिस्सा है, जिसमें विपक्ष लगातार सरकार पर संसद में पर्याप्त चर्चा और जवाबदेही से बचने का आरोप लगाता रहा है।

छात्रों के प्रदर्शन पर भी सरकार को घेरता रहा विपक्ष

मानसून सत्र के दौरान दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन और उन पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा विपक्ष ने प्रमुखता से उठाया। विपक्ष सरकार से इस मामले में जवाब और चर्चा की मांग करता रहा।

दूसरी ओर, सरकार की ओर से कहा गया कि छात्रों के प्रदर्शन सहित विभिन्न मुद्दों पर संसद में चर्चा कराई जा सकती है। यही मुद्दा सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव का एक प्रमुख कारण बना रहा।

आखिरी दिन भी संसद परिसर में टकराव

सत्र के अंतिम दिन भी राजनीतिक तनाव कम नहीं हुआ। संसद परिसर के मकर द्वार की सीढ़ियों पर सत्ता पक्ष और विपक्षी INDIA गठबंधन के सांसद आमने-सामने दिखाई दिए। दोनों पक्षों की ओर से नारेबाजी और विरोध-प्रदर्शन हुआ।

इससे साफ हो गया कि जिस गतिरोध ने पूरे मानसून सत्र को प्रभावित किया, उसका असर आखिरी दिन भी बना रहा। इसके बाद लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई और मानसून सत्र समाप्त हो गया।

अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों पर दिया जवाब

प्रियंका गांधी के बयान से एक दिन पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में जारी गतिरोध को लेकर विपक्ष पर पलटवार किया था।

अमित शाह ने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष संसद को चलने नहीं देना चाहता। उन्होंने छात्रों के प्रदर्शन समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए सरकार की तैयारी का दावा किया और कहा कि सरकार विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है।

अमित शाह ने यह भी कहा कि “सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है।”

इस तरह आखिरी दिन प्रियंका गांधी के बयान और उससे पहले अमित शाह के पलटवार ने संसद के पूरे सत्र में जारी सत्ता पक्ष-विपक्ष की राजनीतिक खींचतान को एक बार फिर सामने ला दिया।

संसद की कार्यक्षमता पर भी उठे सवाल

मानसून सत्र के दौरान लगातार व्यवधान का असर सदन के कामकाज पर भी पड़ा। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, 10 अगस्त तक लोकसभा अपने निर्धारित समय का केवल 16 प्रतिशत, जबकि राज्यसभा 31 प्रतिशत समय ही काम कर सकी थी।

ये आंकड़े बताते हैं कि हंगामे और गतिरोध का असर संसदीय कामकाज पर कितना पड़ा। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इससे पहले भी संसद के कुछ सत्रों में कामकाज इससे अधिक समय तक बाधित रहा है।

RJD सांसद ने भी सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

RJD सांसद संजय यादव ने भी सत्र के दौरान सरकार पर विपक्ष के साथ संवाद नहीं करने और संसद का बहुमूल्य समय बर्बाद करने का आरोप लगाया।

उन्होंने दावा किया कि संसद चलने में व्यवधान के कारण जनता के पैसे का भी नुकसान होता है। संजय यादव के मुताबिक, संसद चलाने की लागत करीब 2.5 लाख रुपये प्रति मिनट और औसतन 9 करोड़ रुपये प्रतिदिन बताई जाती है। उन्होंने सरकार पर महत्वपूर्ण विधेयकों को पर्याप्त बहस के बिना जल्दबाजी में पारित कराने का भी आरोप लगाया।

हालांकि, ये आंकड़े और आरोप विपक्षी सांसद के बयान के रूप में ही देखे जाने चाहिए; इन्हें सरकार की ओर से स्वीकार किया गया तथ्य नहीं माना जा सकता।

‘वंदे मातरम्’ बना राजनीतिक बहस का केंद्र

प्रियंका गांधी का बयान सिर्फ अमित शाह की संसद में मौजूदगी को लेकर नहीं है। इसमें वंदे मातरम् का संदर्भ भी महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय गीत को लेकर संसद और देश में पहले भी राजनीतिक बहस होती रही है।

इस बार भी सत्र के आखिरी दिन वंदे मातरम् का उल्लेख राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बन गया। प्रियंका गांधी ने इसे गृह मंत्री की मौजूदगी पर तंज के तौर पर इस्तेमाल किया, जबकि सत्ता पक्ष की ओर से संसद में राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर चर्चा और भागीदारी को अलग नजरिए से देखा जाता है।

सत्र खत्म, लेकिन सियासी टकराव बरकरार

25 दिनों तक चले मानसून सत्र का अंत भी राजनीतिक टकराव के बीच हुआ। सरकार का कहना रहा कि वह विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार थी, जबकि विपक्ष का आरोप रहा कि उसे पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया और सरकार जवाबदेही से बचती रही।

ऐसे में प्रियंका गांधी का “आज सिर्फ वंदे मातरम् गाने आए हैं” वाला बयान मानसून सत्र के अंतिम दिन का एक प्रमुख राजनीतिक संदेश बन गया है। यह बयान आने वाले दिनों में कांग्रेस और भाजपा के बीच संसद में जवाबदेही, उपस्थिति और लोकतांत्रिक संवाद को लेकर जारी बहस को और धार दे सकता है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted