Home » Blog » गुजरात में चांदीपुरा वायरस का कहर, 5 हफ्तों में 25 बच्चों की मौत; संक्रमण के स्रोत पर रहस्य बरकरार

गुजरात में चांदीपुरा वायरस का कहर, 5 हफ्तों में 25 बच्चों की मौत; संक्रमण के स्रोत पर रहस्य बरकरार

गुजरात में चांदीपुरा वायरस से 5 हफ्तों में 25 मौतें। 39 बच्चे संक्रमित, लेकिन वायरस के संभावित वाहकों में अब तक नहीं मिला संक्रमण। सैंडफ्लाई, मच्छर और टिक की जांच के नतीजे निगेटिव, अब मवेशियों, बकरियों और दूध के नमूनों की जांच।

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | अहमदाबाद | 13 अगस्त 2026

गुजरात में चांदीपुरा वायरस का प्रकोप स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का बड़ा कारण बनता जा रहा है। राज्य में करीब पांच सप्ताह के भीतर इस वायरस से 25 बच्चों की मौत की पुष्टि हुई है। गुजरात सरकार के मुताबिक, अब तक 39 बच्चे चांदीपुरा वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। सबसे गंभीर चिंता यह है कि वायरस का वास्तविक स्रोत या उसके फैलने की सटीक वजह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने वायरस के संभावित वाहकों की बड़े पैमाने पर जांच शुरू की है। 30 जून से शुरू हुए प्रकोप के बाद हजारों सैंडफ्लाई यानी बालू मक्खियों के नमूने लिए गए। चांदीपुरा वायरस के प्रसार में सैंडफ्लाई को प्रमुख संभावित वाहक माना जाता है। आमतौर पर ये मक्खियां मिट्टी के घरों की दरारों और पशुओं के आसपास पाई जाती हैं।

हालांकि, जांच में अब तक सैंडफ्लाई के नमूनों में वायरस की पुष्टि नहीं हुई है। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाकर मच्छरों और टिक यानी किलनी के नमूनों तक किया गया। इन संभावित वाहकों की जांच के परिणाम भी निगेटिव आए हैं। इससे वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वायरस फैल कहां से रहा है और इसका स्रोत क्या है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, संभावित वाहकों से वायरस का पता नहीं चलने के बाद अब जांच का दायरा और बढ़ाया गया है। वैज्ञानिक मवेशियों और बकरियों के रक्त के नमूनों के साथ-साथ दूध के नमूनों की भी जांच कर रहे हैं। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं वायरस का कोई पशु-आधारित स्रोत तो नहीं है।

चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करने वाली गंभीर बीमारी से जुड़ा है। इसके संक्रमण में तेज बुखार और तंत्रिका तंत्र से संबंधित गंभीर लक्षण सामने आ सकते हैं। बीमारी तेजी से गंभीर रूप ले सकती है, जिसके कारण शुरुआती पहचान और समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

गुजरात में मौजूदा स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब राज्य में इस वायरस को लेकर गंभीर स्थिति बनी है। वर्ष 2024 में भी गुजरात में चांदीपुरा वायरस के संदिग्ध और पुष्ट मामलों के दौरान बड़ी संख्या में बच्चों की मौत हुई थी। उस दौरान 78 बच्चों में इसके लक्षण पाए गए थे और 28 बच्चों की मौत हुई थी। उस समय भी वायरस के स्रोत को लेकर कई सवाल बने रहे थे।

मौजूदा प्रकोप ने उन सवालों को एक बार फिर सामने ला दिया है। हजारों सैंडफ्लाई और अन्य संभावित वाहकों की जांच के बावजूद वायरस का पता नहीं चलना वैज्ञानिकों के लिए चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञ अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या वायरस किसी ऐसे माध्यम से फैल रहा है जिसकी अभी तक पहचान नहीं हो सकी है।

स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ा रही हैं। संदिग्ध मामलों की पहचान, नमूने एकत्र करने और संभावित संक्रमण के स्रोत का पता लगाने के लिए जांच जारी है। ग्रामीण और पशुपालन वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी की जा रही है, क्योंकि सैंडफ्लाई और अन्य संभावित वाहक अक्सर ऐसे वातावरण में पाए जाते हैं।

फिलहाल सबसे बड़ी चिंता बच्चों की सुरक्षा और संक्रमण के स्रोत की पहचान को लेकर है। 25 मौतों और 39 संक्रमित बच्चों के आंकड़ों ने राज्य के स्वास्थ्य तंत्र के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। वैज्ञानिकों के सामने अब दोहरी जिम्मेदारी है—एक तरफ संक्रमित बच्चों की समय पर पहचान और उपचार, तो दूसरी तरफ वायरस के स्रोत और उसके प्रसार के तरीके का पता लगाना।

जांच के अगले चरण में मवेशियों, बकरियों और दूध के नमूनों से मिलने वाले परिणाम अहम हो सकते हैं। इन जांचों से यह समझने में मदद मिल सकती है कि वायरस के फैलाव में पशुओं या किसी अन्य माध्यम की भूमिका है या नहीं।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted