अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | 13 अगस्त 2026
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका का होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरा नियंत्रण है और अमेरिका इसे अपने नियंत्रण में बनाए रखेगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को ‘स्टील की दीवार’ बताया और दावा किया कि ईरान इसके सामने कुछ नहीं कर सकता। होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से मध्य पूर्व का बड़ा हिस्सा तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की वैश्विक आवाजाही से जुड़ा है।
ट्रंप बोले- अमेरिका के नियंत्रण में है होर्मुज
ट्रंप ने अपने पोस्ट में कहा कि अमेरिका के पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ‘पूर्ण नियंत्रण’ है और उनका इरादा इसे बनाए रखने का है। उन्होंने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी की ताकत का जिक्र करते हुए कहा कि इसे हर तरफ से ‘स्टील की दीवार’ कहा जा रहा है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव लगातार गहरा रहा है और इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा तथा संचालन को लेकर दोनों देशों के दावे एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत हैं।
ईरान ने अमेरिका के दावे को किया खारिज
ईरान अमेरिका के इस दावे को स्वीकार नहीं करता। तेहरान की ओर से लगातार संकेत दिए गए हैं कि वह होर्मुज के संचालन और समुद्री आवाजाही पर अपना प्रभाव बनाए रखना चाहता है। ईरान ने यह भी कहा है कि जब तक अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाता, तब तक जलडमरूमध्य को सामान्य रूप से खोलने का सवाल नहीं उठता। यानी एक तरफ अमेरिका नियंत्रण का दावा कर रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान अपनी शर्तों के साथ रास्ते को खोलने की बात कर रहा है।
होर्मुज क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मध्य पूर्व और दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ने वाला यह रास्ता तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। यहां किसी भी लंबे व्यवधान का असर केवल अमेरिका या ईरान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और दुनिया के कई देशों में ईंधन की कीमतों पर पड़ सकता है।
ईरान ने होर्मुज खोलने के लिए रखीं शर्तें
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा सामान्य रूप से खोलने के लिए कई शर्तें रखी हैं। तेहरान के मुताबिक अमेरिका को पहले अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटानी होगी, ईरान की जब्त संपत्तियां और फ्रीज की गई संपत्तियां जारी करनी होंगी, प्रतिबंध हटाने होंगे और युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई करनी होगी। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी संकेत दिया है कि जब तक उसकी सभी शर्तें स्वीकार नहीं होतीं, तब तक उसकी रणनीति जारी रहेगी।
ईरान बोला- अब यह सिर्फ जलमार्ग नहीं, युद्ध का मैदान
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। उनके अनुसार जब तक अमेरिका उनकी शर्तें नहीं मानता, तब तक नाकाबंदी जारी रखने की रणनीति पर काम किया जाएगा। ईरानी पक्ष ने यह भी कहा है कि मौजूदा हालात में होर्मुज उसके लिए केवल एक सामान्य समुद्री मार्ग नहीं बल्कि युद्ध का मैदान बन चुका है। इससे क्षेत्रीय तनाव की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमता पर भी साधा निशाना
ट्रंप ने अपने बयान में ईरान की सैन्य क्षमता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि ईरान के पास प्रभावी नौसेना और वायुसेना नहीं बची है और उसके सैनिकों को भुगतान तक नहीं किया जा रहा। उन्होंने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को भी बुरी तरह कमजोर होने का दावा किया। हालांकि ये राष्ट्रपति ट्रंप के दावे हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के रूप में नहीं पेश किया जा सकता।
महंगाई और तेल कीमतों ने बढ़ाई ट्रंप की मुश्किल
होर्मुज संकट का असर अमेरिकी उपभोक्ताओं पर भी पड़ रहा है। समुद्री मार्ग में व्यवधान और मध्य पूर्व के संघर्ष के कारण ऊर्जा की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। इससे अमेरिका में महंगाई और ईंधन की कीमतें राजनीतिक मुद्दा बन रही हैं। खासकर नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले बढ़ती कीमतें ट्रंप प्रशासन के लिए चुनौती बन सकती हैं।
ट्रंप बोले- ईरान से ‘लो-की’ बातचीत
तनाव के बावजूद ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत के रास्ते को पूरी तरह बंद नहीं किया है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका ईरान के साथ ‘लो-की’ यानी बेहद सीमित और शांत तरीके से बातचीत कर रहा है। उन्होंने इसे सीधे औपचारिक वार्ता के बजाय एक रणनीतिक प्रक्रिया की तरह बताया। ट्रंप ने ईरान की आर्थिक स्थिति और बढ़ती महंगाई का जिक्र करते हुए कहा कि समय अमेरिका के पक्ष में काम कर सकता है।
ईरान भी संदेशों के आदान-प्रदान की बात मान चुका है
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इससे पहले संकेत दिया था कि अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है। हालांकि ईरान ने इसे औपचारिक शांति वार्ता नहीं बताया है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन भरोसे की कमी और होर्मुज को लेकर कठोर शर्तें किसी समझौते को बेहद मुश्किल बना रही हैं।
होर्मुज पर नियंत्रण की लड़ाई कितनी बड़ी?
होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान की मौजूदा टकराहट सिर्फ एक समुद्री रास्ते की लड़ाई नहीं है। इसके पीछे ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार, सैन्य दबदबा और पश्चिम एशिया में रणनीतिक प्रभाव का बड़ा सवाल जुड़ा है। अगर यह संकट लंबे समय तक जारी रहता है तो इसका असर कच्चे तेल की कीमतों से लेकर वैश्विक महंगाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार तक दिखाई दे सकता है।
आगे क्या होगा, नजरें होर्मुज पर
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका अपनी कथित नाकाबंदी को कितने समय तक जारी रखता है और ईरान अपनी शर्तों से कितना पीछे हटता है। दोनों पक्षों के बीच सीमित संपर्क की खबरें जरूर हैं, लेकिन जमीन पर तनाव और बयानबाजी अभी भी तीखी है। होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका का दावा और ईरान की शर्तें आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की दिशा तय करने वाले सबसे अहम घटनाक्रमों में शामिल हो सकते हैं।




