राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | चेन्नई | 12 अगस्त 2026
विजय सरकार पर AIADMK का सीधा हमला
तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से मुख्यमंत्री बने सी. जोसेफ विजय की सरकार को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। AIADMK नेता आर.बी. उदयकुमार ने मुख्यमंत्री विजय पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि सरकार में फिल्म जगत से जुड़े लोगों की नियुक्तियों के बाद अब अभिनेत्री त्रिशा कृष्णन को उपमुख्यमंत्री कब बनाया जाएगा? उदयकुमार की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब त्रिशा को लेकर तमिलनाडु की राजनीति में पहले से विवाद चल रहा है।
फिल्मी रिश्तों को सरकारी नियुक्तियों से जोड़ने का आरोप
उदयकुमार ने एक वायरल वीडियो में आरोप लगाया कि तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) की सरकार में मुख्यमंत्री विजय के साथ फिल्म उद्योग में काम कर चुके कुछ लोगों को महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर नियुक्त किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इनमें फिल्म निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ और मुख्यमंत्री के करीबी बताए जाने वाले लोग शामिल हैं।
AIADMK नेता ने कुछ नियुक्तियों का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि क्या सरकारी पदों पर नियुक्ति का आधार प्रशासनिक योग्यता है या मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत और पेशेवर निकटता।
हालांकि, इन आरोपों पर सरकार की ओर से इस रिपोर्ट में कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए नियुक्तियों को लेकर लगाए गए राजनीतिक आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
किन नियुक्तियों का किया गया जिक्र?
उदयकुमार ने अपने बयान में मुख्यमंत्री विजय की फिल्म GOAT की निर्माता अर्चना कल्पथी को मंदिर बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की सदस्य बनाए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने Jananayagan के निर्माता वेंकट नारायण को दिल्ली में तमिलनाडु सरकार का विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किए जाने और Leo के सह-निर्माता जगदीश पलानीसामी को मुख्यमंत्री का निजी सचिव बनाए जाने का दावा किया।
उन्होंने इसके अलावा Beast के सिनेमैटोग्राफर मनोज परमहंस की तमिलनाडु फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति और मुख्यमंत्री के करीबी बताए गए जॉन अरोकेसियास्वामी तथा रामकुमार को सरकारी सलाहकार बनाए जाने का भी उल्लेख किया।
उदयकुमार ने इन्हीं नियुक्तियों को आधार बनाकर व्यंग्यात्मक अंदाज में पूछा कि अब अभिनेत्री त्रिशा को उपमुख्यमंत्री बनाने की घोषणा कब होगी।
‘समानता’ के नारे पर भी सवाल
AIADMK नेता ने TVK के राजनीतिक नारे ‘Pirappokkum Ella Uyirkkum’ यानी ‘सभी जीव जन्म से समान हैं’ का हवाला देते हुए कहा कि सरकार की नियुक्तियों को लेकर उठ रहे सवाल इस विचारधारा के साथ विरोधाभास पैदा करते हैं।
यह राजनीतिक हमला मूलतः इस सवाल पर केंद्रित है कि सरकारी पदों पर नियुक्ति करते समय पारदर्शिता, योग्यता और प्रशासनिक अनुभव को कितना महत्व दिया जा रहा है। यदि किसी नियुक्ति पर सवाल उठता है तो सरकार के लिए सबसे प्रभावी जवाब यही होगा कि वह नियुक्ति की प्रक्रिया, पात्रता और संबंधित व्यक्ति की योग्यता सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करे।
त्रिशा की पोस्ट ने बढ़ाया विवाद
इस राजनीतिक बयान के बीच अभिनेत्री त्रिशा ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक संक्षिप्त पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि इस उम्र में ड्रामा शर्मनाक है और लोगों को पैसे कमाने तथा शांति तलाशने की सलाह दी।
त्रिशा ने पोस्ट में किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया। लेकिन इसका समय ऐसा था कि इसे सामने आए राजनीतिक बयान और हालिया विवाद से जोड़कर देखा जाने लगा। हालांकि, यह दावा करना कि पोस्ट सीधे उदयकुमार या किसी विशेष व्यक्ति के बयान के जवाब में थी, बिना पुष्टि के उचित नहीं होगा।
उदयकुमार की टिप्पणी ऐसे समय आई जब त्रिशा विवाद पहले से गर्म है
त्रिशा का नाम तमिलनाडु की राजनीति में पिछले सप्ताह उस समय विवाद के केंद्र में आया था जब DMK नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन पर उनके खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगा। इसके बाद मामला पुलिस कार्रवाई तक पहुंचा और उदयनिधि को गिरफ्तार किया गया था।
उन्हें कई घंटे की पूछताछ के बाद स्टेशन बेल पर रिहा कर दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद DMK और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई थी।
DMK और AIADMK आमने-सामने
उदयनिधि प्रकरण पर DMK प्रमुख एम.के. स्टालिन ने अपने बेटे का बचाव किया था, जबकि AIADMK प्रमुख ई. पलानीस्वामी सहित विपक्षी नेताओं ने महिलाओं के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की आलोचना की थी।
अब AIADMK के उदयकुमार की नई टिप्पणी ने विवाद को एक अलग राजनीतिक दिशा दे दी है। इस बार निशाना सीधे मुख्यमंत्री विजय की सरकार और उसके कथित नियुक्ति पैटर्न पर है।
मामला सिर्फ एक अभिनेत्री के नाम का नहीं
उदयकुमार के बयान को केवल त्रिशा से जोड़कर देखना पूरे राजनीतिक विवाद को छोटा कर देगा। असली राजनीतिक सवाल सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता और योग्यता का है।
यदि सरकार में किसी व्यक्ति को केवल इसलिए पद मिलता है क्योंकि वह मुख्यमंत्री का करीबी है या उनके साथ पहले काम कर चुका है, तो यह गंभीर प्रशासनिक सवाल पैदा करेगा। लेकिन यदि संबंधित व्यक्ति के पास पद के लिए आवश्यक योग्यता, अनुभव और प्रशासनिक क्षमता है तथा नियुक्ति निर्धारित प्रक्रिया के तहत हुई है, तो केवल फिल्मी संबंध के आधार पर उसे अनुचित कहना भी पर्याप्त नहीं होगा।
विजय सरकार के सामने अब पारदर्शिता की चुनौती
अभिनेता से राजनीति में आए विजय के लिए यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उनकी सरकार से जनता और विपक्ष दोनों प्रशासनिक पारदर्शिता की अपेक्षा कर रहे हैं। फिल्म उद्योग से राजनीति में आने वाले नेताओं के सामने अक्सर यह सवाल रहता है कि वे व्यक्तिगत लोकप्रियता और सरकारी संस्थाओं की निष्पक्षता के बीच किस तरह संतुलन बनाए रखते हैं।
इसलिए सरकार के लिए बेहतर रास्ता यही होगा कि महत्वपूर्ण नियुक्तियों के संबंध में योग्यता, चयन प्रक्रिया और पद की जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया जाए। इससे राजनीतिक आरोपों का जवाब भी तथ्यों के आधार पर दिया जा सकेगा।
सियासत में ‘त्रिशा’ अब राजनीतिक तंज का नाम
फिलहाल ‘त्रिशा को डिप्टी CM कब बनाएंगे?’ वाला बयान तमिलनाडु की राजनीति में एक तीखा राजनीतिक तंज बन गया है। लेकिन इसके पीछे छिपा बड़ा सवाल इससे कहीं अधिक गंभीर है—क्या सरकारी नियुक्तियां योग्यता और संस्थागत प्रक्रिया से होंगी या राजनीतिक और व्यक्तिगत निकटता से?
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विजय सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और जिन नियुक्तियों को लेकर सवाल उठाए गए हैं, उनके पीछे वास्तविक चयन प्रक्रिया क्या थी।
राजनीति में व्यंग्य सुर्खियां बना सकता है, लेकिन सरकारी पदों की विश्वसनीयता केवल पारदर्शिता और योग्यता से तय होती है।




