शिक्षा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 7 जुलाई 2026
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG के आयोजन में वर्ष 2027 से बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए व्यापक सुधारों पर काम कर रही है। प्रस्तावित योजना के अनुसार, वर्ष 2027 से NEET-UG परीक्षा एक ही दिन आयोजित करने के बजाय 5 से 6 दिनों तक चरणबद्ध तरीके से कराई जा सकती है। इसके साथ ही परीक्षा केंद्रों की संख्या भी मौजूदा व्यवस्था की तुलना में काफी कम कर लगभग 1,000 केंद्रों तक सीमित किए जाने की तैयारी है।
रिपोर्टों के अनुसार, नई व्यवस्था में परीक्षा कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) के रूप में आयोजित होगी। अभी तक NEET-UG देशभर में एक ही दिन पेन-पेपर मोड में आयोजित की जाती रही है, लेकिन हाल के वर्षों में पेपर लीक, परीक्षा केंद्रों पर अनियमितताओं और सुरक्षा संबंधी सवालों के बाद परीक्षा प्रणाली में बदलाव की आवश्यकता महसूस की गई।
बताया जा रहा है कि NTA प्रत्येक केंद्र पर प्रतिदिन सीमित संख्या में परीक्षार्थियों की परीक्षा आयोजित करेगा। अनुमान है कि एक केंद्र पर एक दिन में लगभग 500 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। इस तरह 5-6 दिनों में देशभर के सभी उम्मीदवारों की परीक्षा पूरी कराई जाएगी। इससे परीक्षा संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने, निगरानी मजबूत करने और सुरक्षा संबंधी जोखिमों को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सूत्रों के अनुसार, परीक्षा केंद्रों की संख्या कम करने का उद्देश्य यह भी है कि केवल अत्याधुनिक सुविधाओं वाले केंद्रों का चयन किया जाए, जहां पर्याप्त कंप्यूटर, इंटरनेट, निगरानी कैमरे और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध हो। इससे परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या तकनीकी समस्या पर तत्काल नियंत्रण किया जा सकेगा।
NEET-UG में यह बदलाव ऐसे समय प्रस्तावित किया गया है जब पिछले कुछ वर्षों में परीक्षा की विश्वसनीयता को लेकर कई सवाल उठे थे। पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोपों के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समितियों का गठन किया था। इन्हीं सिफारिशों के आधार पर NTA परीक्षा प्रणाली को आधुनिक और अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में काम कर रही है।
हालांकि, कई अभ्यर्थियों और शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कई दिनों तक परीक्षा आयोजित करने की स्थिति में अलग-अलग शिफ्टों के प्रश्नपत्रों के कठिनाई स्तर को समान बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी। यदि प्रश्नपत्रों के स्तर में अंतर हुआ तो परिणामों की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं। ऐसे में संभावना है कि NTA सामान्यीकरण (Normalization) जैसी वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाए, ताकि सभी अभ्यर्थियों के साथ समान न्याय हो सके।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा से परिणाम जल्दी घोषित किए जा सकेंगे और मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी। साथ ही उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में मानवीय त्रुटियों की संभावना भी कम होगी। दूसरी ओर, ग्रामीण क्षेत्रों के कुछ छात्रों के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा नई चुनौती बन सकती है। इसलिए परीक्षा से पहले व्यापक स्तर पर मॉक टेस्ट और अभ्यास की व्यवस्था करना भी आवश्यक होगा।
NTA फिलहाल देशभर में ऐसे परीक्षा केंद्रों की पहचान कर रही है, जहां बड़े पैमाने पर कंप्यूटर आधारित परीक्षा सुरक्षित तरीके से कराई जा सके। इसके लिए राज्यों के साथ समन्वय भी किया जा रहा है।
हालांकि, 2027 से लागू होने वाली इस नई व्यवस्था को लेकर अभी अंतिम आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। NTA और शिक्षा मंत्रालय की ओर से विस्तृत दिशा-निर्देश, परीक्षा पैटर्न, शिफ्टों की संख्या, प्रश्नपत्रों के सामान्यीकरण और परीक्षा कार्यक्रम को लेकर औपचारिक घोषणा बाद में जारी की जाएगी।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह NEET-UG के इतिहास का सबसे बड़ा संरचनात्मक बदलाव होगा और देश में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पूरी प्रणाली एक नए दौर में प्रवेश करेगी।




