राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई/कोल्हापुर | 20 जून 2026
महाराष्ट्र की राजनीति में जारी उथल-पुथल के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उद्धव ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) पर तीखा हमला बोला है। कोल्हापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि पहले एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली पार्टी को “शिवसेना-शिंदे गुट” कहना पड़ता था, लेकिन अब महाराष्ट्र में केवल एक ही शिवसेना बची है और उसका नेतृत्व एकनाथ शिंदे कर रहे हैं।
अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है जब शिवसेना (यूबीटी) के छह लोकसभा सांसदों ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर शिंदे गुट के साथ जाने का फैसला किया है। इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर अपने अलग समूह के गठन और शिंदे नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय का दावा किया है।
कांग्रेस के साथ जाने पर साधा निशाना
अमित शाह ने उद्धव ठाकरे पर कांग्रेस और राहुल गांधी के साथ जाने को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा पर खड़ी हुई शिवसेना को कांग्रेस की राजनीति के साथ जोड़ने का परिणाम आज सामने दिख रहा है। शाह ने संकेत दिया कि हिंदुत्व की मूल विचारधारा से दूरी बनाने के कारण उद्धव ठाकरे की पार्टी लगातार कमजोर होती जा रही है।
महाराष्ट्र सरकार की उपलब्धियां गिनाईं
कोल्हापुर की सभा में अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल को भारत के विकास, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और वैश्विक प्रतिष्ठा का काल बताया। उन्होंने महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार की भी सराहना की और कहा कि राज्य विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।
घुसपैठ पर दी चेतावनी
सभा में अमित शाह ने अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में अवैध रूप से रहने वाले घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी और उन्हें कानून के अनुसार देश से बाहर किया जाएगा।
उद्धव ठाकरे की ताकत हुई कमजोर
राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद लोकसभा में उद्धव ठाकरे के पास अब केवल तीन सांसद बचे हैं। वहीं शिंदे गुट इसे राजनीतिक बदलाव की शुरुआत बताते हुए दावा कर रहा है कि आने वाले दिनों में कई विधायक, पार्षद और स्थानीय नेता भी उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ सकते हैं।
शिवसेना (यूबीटी) में बढ़ते असंतोष और सांसदों की बगावत ने महाराष्ट्र की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2022 में हुए शिवसेना विभाजन के बाद यह उद्धव ठाकरे के लिए दूसरा बड़ा झटका है, जिसका असर आने वाले स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों में भी दिखाई दे सकता है।




