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“पानी रोका तो जंग होगी”: सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की नई धमकी, ख्वाजा आसिफ ने भारत को दी चेतावनी

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | इस्लामाबाद/नई दिल्ली | 20 जून 2026

सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारत को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि पाकिस्तान को यह महसूस हुआ कि भारत उसकी जल सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है या नदियों के पानी को रोकने की कोशिश कर रहा है, तो पाकिस्तान युद्ध का रास्ता अपनाने से भी पीछे नहीं हटेगा।

एक पाकिस्तानी टीवी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पानी केवल एक संसाधन नहीं बल्कि जीवन का आधार है। उन्होंने दावा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने पाकिस्तान को पानी रोकने की धमकी दी थी और यदि ऐसी कोई कोशिश आगे बढ़ती है तो इसे पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा हमला माना जाएगा।

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत द्वारा चिनाब नदी और सिंधु बेसिन से जुड़े नए जल परियोजनाओं को लेकर इस्लामाबाद गंभीर चिंता में है। उनका आरोप है कि पिछले एक वर्ष से पाकिस्तान को इन परियोजनाओं की निगरानी और जानकारी प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है, जबकि पहले सिंधु जल संधि के तहत दोनों देशों के बीच इस संबंध में नियमित जानकारी साझा की जाती थी।

चिनाब परियोजनाओं पर पाकिस्तान की आपत्ति

ख्वाजा आसिफ ने विशेष रूप से चिनाब नदी पर भारत की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि इन योजनाओं के माध्यम से पाकिस्तान के हिस्से का पानी प्रभावित होता है तो इसका जवाब केवल कूटनीतिक स्तर पर नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पानी का मुद्दा पाकिस्तान के लिए अस्तित्व का प्रश्न है और इस पर किसी प्रकार का समझौता संभव नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाने की कोशिश कर रहा है। भारत की नई जल परियोजनाओं को लेकर पाकिस्तान की बेचैनी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

पीओके में प्रदर्शनों के पीछे भारत का हाथ होने का आरोप

ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी भारत पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां सक्रिय कुछ प्रदर्शनकारी, मीडिया समूह और विदेशों में बैठे समर्थक भारत समर्थित नेटवर्क का हिस्सा हैं और वे पाकिस्तान विरोधी माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

हालांकि पाकिस्तान की ओर से इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया गया है। भारत पहले भी ऐसे आरोपों को खारिज करता रहा है और उन्हें पाकिस्तान की आंतरिक समस्याओं से ध्यान भटकाने की कोशिश बताता रहा है।

संयुक्त राष्ट्र पहुंचा पाकिस्तान

इस बीच पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश तेज कर दी है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को पत्र लिखकर भारत द्वारा सिंधु जल संधि के कथित उल्लंघन का मामला उठाया है।

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने सुरक्षा परिषद की अध्यक्ष को पत्र सौंपते हुए भारत की चिनाब नदी से जुड़ी परियोजनाओं और सिंधु बेसिन में बढ़ती गतिविधियों पर चिंता जताई है। पाकिस्तान का कहना है कि इन परियोजनाओं से क्षेत्रीय स्थिरता और जल सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

भारत का रुख

भारत लगातार यह कहता रहा है कि सिंधु जल संधि का दुरुपयोग पाकिस्तान ने वर्षों तक राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया है। नई दिल्ली का तर्क है कि भारतीय क्षेत्र में बनने वाली परियोजनाएं अंतरराष्ट्रीय नियमों और तकनीकी मानकों के अनुरूप हैं तथा उनका उद्देश्य अपने हिस्से के जल संसाधनों का वैध उपयोग करना है।

राजनयिक हलकों में माना जा रहा है कि पाकिस्तान की ओर से युद्ध जैसी भाषा का इस्तेमाल मुख्यतः घरेलू राजनीतिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय सहानुभूति हासिल करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। हालांकि सिंधु जल संधि और जल सुरक्षा का मुद्दा आने वाले समय में भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक प्रमुख विवाद का विषय बना रह सकता है।

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