टेक्नोलॉजी/शिक्षा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 18 जून 2026
NEET-UG री-एग्जाम से पहले केंद्र सरकार ने मैसेजिंग ऐप Telegram पर बड़ा एक्शन लिया है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने खुलासा किया है कि Telegram को पहले कई बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन आवश्यक सुधार नहीं किए जाने के बाद सरकार को सख्त कदम उठाने पड़े।
NTA के अनुसार Telegram के कुछ फीचर्स का इस्तेमाल कथित तौर पर पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी फर्जी सूचनाएं फैलाने में किया जा रहा था। सरकार का कहना है कि इस बारे में Telegram के प्रतिनिधियों के साथ उच्च स्तर पर कई बैठकें हुई थीं और उन्हें स्पष्ट रूप से बताया गया था कि प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग रोका जाए।
NTA महानिदेशक अभिषेक सिंह ने कहा कि Telegram के संस्थापक ने संदेशों पर दिखाई देने वाले “Edited” टैग को और स्पष्ट बनाने का आश्वासन दिया था, लेकिन यह बदलाव लागू नहीं किया गया। एजेंसी का मानना है कि इसी फीचर का इस्तेमाल कई बार फर्जी दस्तावेजों और कथित पेपर लीक सामग्री को असली बताने के लिए किया जाता रहा है।
इसी पृष्ठभूमि में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने Telegram की सेवाओं पर 22 जून तक देशव्यापी प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा Telegram को 30 जून तक भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए मैसेज एडिट फीचर भी बंद करने का निर्देश दिया गया है।
सरकार का तर्क है कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। इसलिए परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
हालांकि Telegram ने इस प्रतिबंध को अदालत में चुनौती दी है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और मामले की सुनवाई जारी है।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और ऑनलाइन सुरक्षा पर बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि क्या तकनीकी कंपनियों को केवल मंच उपलब्ध कराने तक सीमित रहना चाहिए, या फिर उन्हें अपने प्लेटफॉर्म पर होने वाली गतिविधियों के लिए भी जिम्मेदारी लेनी होगी?




