अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन/तेहरान | 15 जून 2026
पश्चिम एशिया में तीन महीने से जारी विनाशकारी युद्ध अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते पर सहमति बन गई है और 19 जून को स्विट्जरलैंड में इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि इस समझौते के साथ ही सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई का “तत्काल और स्थायी अंत” हो जाएगा।
ट्रंप ने घोषणा की कि समझौते के बाद दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा लाइफलाइन माने जाने वाले हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोल दिया जाएगा। पिछले तीन महीनों से यही जलमार्ग वैश्विक तनाव का केंद्र बना हुआ था, जहां संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर संकट मंडरा रहा था।
अमेरिका, ईरान और मध्यस्थ देशों की ओर से समझौते की पुष्टि के बाद वैश्विक बाजारों ने राहत की सांस ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 4 प्रतिशत से अधिक टूट गईं, जबकि एशियाई शेयर बाजारों में जोरदार उछाल दर्ज किया गया। जापान का निक्केई सूचकांक लगभग 5 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 5.5 प्रतिशत से अधिक बढ़ गया।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने समझौते का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक शांति की दिशा में बड़ा कदम बताया है। उन्होंने पाकिस्तान, कतर, मिस्र, सऊदी अरब और तुर्किये समेत उन देशों की भूमिका की सराहना की जिन्होंने महीनों चली बातचीत को सफल बनाने में योगदान दिया।
भारत के लिए भी यह घटनाक्रम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होकर दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मार्ग खुलने से भारत पर महंगे तेल, बढ़ती ढुलाई लागत और महंगाई का दबाव कम होगा। इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों और औद्योगिक लागत पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि ऊर्जा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हालात पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लगेगा। युद्ध के दौरान फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों, बीमा लागत में वृद्धि और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण तेल एवं गैस आपूर्ति व्यवस्था को पटरी पर लौटने में कई महीने लग सकते हैं।
अपने 80वें जन्मदिन पर ट्रंप ने इस समझौते को अपनी सबसे बड़ी कूटनीतिक उपलब्धियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया एक बड़े और लंबे युद्ध से बच गई है तथा अब पश्चिम एशिया स्थिरता की ओर बढ़ सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि 19 जून को समझौते पर सफलतापूर्वक हस्ताक्षर हो जाते हैं तो यह केवल अमेरिका और ईरान के रिश्तों में बदलाव नहीं होगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार, पश्चिम एशिया की राजनीति और विश्व अर्थव्यवस्था के लिए भी एक ऐतिहासिक मोड़ साबित होगा। तीन महीने तक दुनिया को युद्ध, तेल संकट और आर्थिक अनिश्चितता में झोंकने वाला संघर्ष अब शांति की दिशा में बढ़ता नजर आ रहा है।




