अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 13 जून 2026
पश्चिम एशिया को कई महीनों से झकझोर रहे अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच शांति की उम्मीदें मजबूत होती दिखाई दे रही हैं। दोनों देशों के बीच जारी तनाव को समाप्त करने के लिए पाकिस्तान की मध्यस्थता में चल रही वार्ताओं ने महत्वपूर्ण प्रगति की है और अब संभावित समझौते की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि अंतिम हस्ताक्षर अभी बाकी हैं, लेकिन अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं के बयानों ने संकेत दिया है कि दोनों पक्ष किसी बड़े समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया है कि शांति समझौते का “अंतिम सहमत मसौदा” तैयार हो चुका है और अब अगले चरणों को अंतिम रूप देने के लिए दोनों पक्षों के साथ गहन समन्वय किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “शांति पहले कभी इतनी करीब नहीं थी जितनी आज है।”
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी इसी तरह का संकेत देते हुए कहा कि तथाकथित “इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग” अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने मीडिया से अपील की कि समझौते के औपचारिक रूप से अंतिम होने तक उसके विवरणों पर अटकलें लगाने से बचा जाए। अरागची ने कहा कि दस्तावेज पर अंतिम निर्णय होने के बाद पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।
दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि सप्ताहांत या अगले कुछ दिनों में समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। हालांकि ट्रंप ने ईरान पर समझौते की शर्तों को लेकर “भ्रामक जानकारी” फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि मीडिया में आई कई रिपोर्टें वास्तविक मसौदे से मेल नहीं खातीं। इसके बावजूद उन्होंने विश्वास जताया कि वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।
अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों का भी कहना है कि दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उनके अनुसार वार्ता अभी “फिनिश लाइन” तक नहीं पहुंची है, लेकिन दोनों पक्ष पहले से कहीं अधिक करीब हैं। अधिकारियों का दावा है कि प्रस्तावित समझौता राष्ट्रपति ट्रंप के प्रमुख उद्देश्यों को पूरा करता है और क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।
हालांकि कई मुद्दों पर अभी भी मतभेद बने हुए हैं। ईरान अपने शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को जारी रखने, आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने और युद्ध के कारण हुए नुकसान की भरपाई के लिए ठोस व्यवस्था चाहता है। वहीं अमेरिका और उसके सहयोगी यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार विकसित न करे। इसी संदर्भ में ईरान ने एक बार फिर दोहराया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा।
वार्ता का एक महत्वपूर्ण पहलू होर्मुज जलडमरूमध्य भी है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां हाल के महीनों में तनाव चरम पर पहुंच गया था। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार संभावित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से सामान्य अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए खोलने का प्रावधान शामिल हो सकता है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि भ्रम और विरोधाभास भी कम नहीं हैं। जहां पाकिस्तान और कुछ अमेरिकी सूत्र समझौते को लगभग अंतिम बता रहे हैं, वहीं ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और समझौते पर हस्ताक्षर की तारीख या स्थान तय नहीं किया गया है। ईरान ने जिनेवा में प्रस्तावित हस्ताक्षर समारोह की खबरों को भी खारिज कर दिया है।
इसी बीच इजराइल भी घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दोहराया है कि जब तक वह प्रधानमंत्री हैं, ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उनकी और ट्रंप की सोच पूरी तरह एक जैसी है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह समझौता सफल होता है तो यह न केवल अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से जारी टकराव को समाप्त करेगा बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में राहत का रास्ता भी खोल सकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें तेहरान, वॉशिंगटन और इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जहां अगले कुछ दिन इतिहास बदलने वाले साबित हो सकते हैं।




