अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | ब्रुसेल्स/लंदन | 10 जून 2026
रूस के खिलाफ दबाव बढ़ाने के लिए यूरोपीय संघ (EU) ने प्रतिबंधों के 21वें पैकेज का प्रस्ताव पेश किया है। इस नए प्रतिबंध पैकेज में कुछ भारतीय संस्थाओं और कंपनियों के नाम भी शामिल किए गए हैं। हालांकि ये प्रतिबंध अभी अंतिम रूप से लागू नहीं हुए हैं और इन्हें प्रभावी बनाने के लिए यूरोपीय संघ के सदस्य देशों की मंजूरी आवश्यक होगी।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि नए प्रतिबंधों का मुख्य उद्देश्य रूस की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा कारोबार और वित्तीय गतिविधियों पर और अधिक दबाव बनाना है। प्रस्तावित पैकेज में ऊर्जा क्षेत्र, क्रिप्टोकरेंसी, वित्तीय सेवाओं, व्यापार और मत्स्य उद्योग से जुड़े कई नए प्रतिबंध शामिल हैं। इसके अलावा रूस के पूर्व लड़ाकों और सैन्य गतिविधियों से जुड़े कुछ लोगों के यूरोपीय संघ में प्रवेश पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया है।
यूरोपीय संघ का आरोप है कि रूस पर पहले से लगाए गए प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए कई देशों और कंपनियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी कारण इस बार उन विदेशी संस्थाओं पर भी नजर रखी जा रही है, जिनके माध्यम से रूस तक सामान, तकनीक या वित्तीय सेवाएं पहुंचने की आशंका है। इसी संदर्भ में कुछ भारतीय संस्थाओं के नाम भी प्रस्तावित सूची में शामिल किए गए हैं।
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि भारतीय कंपनियों पर किस प्रकार के प्रतिबंध लगाए जाएंगे और उनका दायरा कितना व्यापक होगा। यूरोपीय संघ की मंजूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम सूची और उसके प्रभावों की पूरी जानकारी सामने आएगी। भारतीय पक्ष की ओर से भी इस विषय पर नजर रखी जा रही है, क्योंकि रूस और भारत के बीच ऊर्जा, व्यापार और रक्षा क्षेत्र में लंबे समय से मजबूत संबंध रहे हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से यूरोपीय संघ लगातार रूस पर आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाता रहा है। यूरोपीय देशों का मानना है कि आर्थिक दबाव के जरिए रूस की युद्ध क्षमता को कमजोर किया जा सकता है। दूसरी ओर रूस इन प्रतिबंधों को राजनीतिक दबाव का हिस्सा बताते हुए उनका विरोध करता रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नया प्रतिबंध पैकेज मंजूर हो जाता है तो इसका असर केवल रूस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन देशों और कंपनियों पर भी पड़ सकता है जिनके रूस के साथ व्यापारिक संबंध हैं। भारत के लिए भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि हाल के वर्षों में रूस से तेल आयात और अन्य व्यापारिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
अब सबकी निगाहें यूरोपीय संघ के सदस्य देशों की मंजूरी प्रक्रिया पर टिकी हैं। मंजूरी मिलने के बाद यह साफ हो सकेगा कि भारतीय संस्थाओं पर प्रस्तावित प्रतिबंधों का वास्तविक प्रभाव कितना होगा और भारत-रूस व्यापारिक संबंधों पर इसका क्या असर पड़ सकता है।




