राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | भोपाल | 2 जून 2026
पूर्व मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को भोपाल की एक अदालत ने दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों का सामना कर रहे ट्विशा के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया।
यह मामला 12 मई को उस समय राष्ट्रीय सुर्खियों में आया था जब ट्विशा शर्मा अपने वैवाहिक घर में फांसी के फंदे से लटकी हुई मिली थीं। शुरुआती तौर पर इसे आत्महत्या का मामला माना गया, लेकिन परिवार द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों और सोशल मीडिया पर उठे जनाक्रोश के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई। जांच एजेंसी लगातार यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या ट्विशा को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था और क्या उनकी मौत के पीछे दहेज उत्पीड़न की भूमिका थी।
सीबीआई ने अपनी जांच को मजबूत करने के लिए सोमवार को घटनास्थल पर क्राइम सीन का पुनर्निर्माण किया। अधिकारियों ने डमी का इस्तेमाल करते हुए उस पूरे घटनाक्रम को दोबारा समझने की कोशिश की, जिसके तहत ट्विशा की मौत हुई थी। जांच एजेंसी ने घर के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण किया, घटनास्थल की बारीकी से जांच की और तकनीकी साक्ष्यों को भी दोबारा परखा। सूत्रों के अनुसार सीबीआई यह सुनिश्चित करना चाहती है कि घटना आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई और साजिश अथवा दबाव मौजूद था।
जांच के दौरान सीबीआई ने परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों, पड़ोसियों और अन्य संबंधित लोगों से भी पूछताछ की है। एजेंसी को कई डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल रिकॉर्ड, चैट और अन्य दस्तावेज मिले हैं, जिनका विश्लेषण किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि जांचकर्ताओं का फोकस उन परिस्थितियों को समझने पर है, जिनमें ट्विशा पिछले कुछ महीनों से रह रही थीं और क्या उन्हें लगातार किसी प्रकार के मानसिक दबाव का सामना करना पड़ रहा था।
ट्विशा शर्मा की मौत ने देशभर में दहेज प्रताड़ना और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर लाखों लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
अदालत द्वारा न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद अब सीबीआई को अपनी जांच आगे बढ़ाने और आरोपों को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। एजेंसी आने वाले दिनों में फॉरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अपनी अगली कानूनी रणनीति तय करेगी। वहीं पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष होगी और ट्विशा शर्मा को न्याय मिलेगा। पूरा देश इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई और सीबीआई की जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। क्योंकि यह मामला केवल एक युवती की मौत का नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, पारिवारिक उत्पीड़न और न्याय व्यवस्था पर लोगों के भरोसे से भी जुड़ा हुआ है।




