अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 2 जून 2026
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और कूटनीतिक तनाव के बीच एक बार फिर स्थिति बेहद जटिल होती नजर आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच संघर्ष रुकने का दावा किए जाने के बावजूद जमीनी हालात इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रहे हैं। लेबनान और उत्तरी इज़राइल में हमले और जवाबी कार्रवाई जारी हैं, जबकि ईरान ने भी स्पष्ट कर दिया है कि उसने अभी तक अमेरिका द्वारा प्रस्तावित अंतिम समझौते पर अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी है। इससे युद्धविराम और शांति प्रयासों पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार तेहरान में अमेरिकी प्रस्ताव पर गहन विचार-विमर्श चल रहा है। ईरानी वार्ता टीम के करीबी सूत्रों का कहना है कि अमेरिका के साथ पिछले अनुभवों और अविश्वास को देखते हुए ईरान किसी भी समझौते पर बेहद सतर्कता से आगे बढ़ रहा है। ईरान का मानना है कि केवल आश्वासनों के आधार पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता और उसे ठोस तथा वास्तविक लाभ सुनिश्चित करने होंगे। यही कारण है कि अब तक अमेरिका को कोई औपचारिक जवाब नहीं भेजा गया है।
दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उनकी बातचीत के बाद इज़राइल और हिज़्बुल्लाह दोनों ने हमले रोकने पर सहमति जताई है। ट्रंप ने कहा था कि इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बेरूत पर प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई रोक दी है और हिज़्बुल्लाह ने भी गोलीबारी बंद करने का भरोसा दिया है। लेकिन इसके कुछ ही घंटों बाद उत्तरी इज़राइल में लेबनान की ओर से दागे गए प्रोजेक्टाइल को इज़राइली वायु रक्षा प्रणाली द्वारा इंटरसेप्ट किए जाने की खबर सामने आई। वहीं इज़राइल ने दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में नए हमले किए, जिससे ट्रंप के दावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।
लेबनान के दक्षिणी शहर नबातियेह में इज़राइली सेना ने लोगों को तत्काल इलाका खाली करने की चेतावनी जारी की है। इज़राइल का आरोप है कि हिज़्बुल्लाह युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है और इसी कारण सेना को कार्रवाई करनी पड़ रही है। वहीं लेबनान के नागरिक सुरक्षा विभाग के अनुसार दक्षिणी गांव मारवानियेह में इज़राइली हमले में छह लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए हैं। लगातार हो रही बमबारी ने क्षेत्र में मानवीय संकट को और गहरा कर दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान ने अपनी सामरिक स्थिति को और अधिक आक्रामक बनाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर कड़ा संदेश दिया है। रिपोर्टों के अनुसार पिछले 24 घंटों में 24 जहाज ईरान की अनुमति के बाद इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है और यहां किसी भी प्रकार का तनाव पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है। ईरान पहले ही संकेत दे चुका है कि यदि उसके हितों की अनदेखी हुई तो वह क्षेत्र के अन्य सामरिक समुद्री मार्गों को भी प्रभावित कर सकता है।
फ्रांस समेत कई यूरोपीय देशों ने भी लेबनान में इज़राइल की सैन्य कार्रवाई पर चिंता जताई है। फ्रांस के विदेश मंत्री ने कहा है कि लेबनानी क्षेत्र में इज़राइली सेना की लंबी मौजूदगी और लगातार सैन्य अभियान को उचित नहीं ठहराया जा सकता। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भी इस संकट पर लगातार नजर बनाए हुए है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय संघर्ष विराम को स्थायी रूप देने के लिए प्रयास कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया का यह संकट अब केवल इज़राइल, लेबनान और ईरान तक सीमित नहीं रहा है। इसमें अमेरिका, यूरोपीय शक्तियां, खाड़ी देश और वैश्विक ऊर्जा बाजार भी सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित समझौते का भविष्य आने वाले दिनों में पूरे क्षेत्र की दिशा तय कर सकता है।
फिलहाल हालात यह संकेत दे रहे हैं कि कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर संघर्ष अभी भी थमा नहीं है। इसलिए पश्चिम एशिया में शांति की राह अभी लंबी और चुनौतीपूर्ण दिखाई दे रही है।




