अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बेरूत | 2 जून 2026
लगातार बढ़ते पश्चिम एशिया संकट और इज़राइल-लेबनान संघर्ष के बीच लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने कहा है कि बातचीत और कूटनीति का रास्ता युद्ध की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित है, लेकिन मौजूदा संकट का समाधान रातोंरात संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “वार्ता युद्ध से अधिक सुरक्षित है, लेकिन यह समस्या को कुछ ही क्षणों में हल नहीं कर सकती। हमारे पास इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है।”
राष्ट्रपति औन का यह बयान ऐसे समय आया है जब इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच संघर्षविराम की अवधि बढ़ाए जाने के बावजूद लेबनान पर इज़राइली सैन्य हमले जारी हैं। दक्षिणी लेबनान और बेरूत के आसपास के क्षेत्रों में लगातार तनाव बना हुआ है, जिससे क्षेत्र में मानवीय और सुरक्षा संकट गहराता जा रहा है। युद्धविराम के बावजूद जारी सैन्य कार्रवाइयों ने शांति प्रयासों की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जोसेफ औन ने कहा कि लेबनान किसी नए बड़े युद्ध का जोखिम नहीं उठा सकता। वर्षों की आर्थिक बदहाली, राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहे देश के लिए युद्ध विनाशकारी साबित होगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की कि वह संघर्ष को रोकने और स्थायी राजनीतिक समाधान खोजने में सक्रिय भूमिका निभाए।
राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में बातचीत की प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है, लेकिन हथियारों और सैन्य कार्रवाई से समस्या और गंभीर होगी। उनका कहना था कि हर पक्ष को यह समझना होगा कि क्षेत्रीय स्थिरता केवल संवाद, समझौते और राजनीतिक इच्छाशक्ति से ही संभव है।
उधर इज़राइल का कहना है कि उसकी सैन्य कार्रवाई हिज़्बुल्लाह की गतिविधियों के जवाब में की जा रही है, जबकि हिज़्बुल्लाह और लेबनानी पक्ष इज़राइल पर संघर्षविराम उल्लंघन के आरोप लगा रहे हैं। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच आम नागरिक सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। हजारों परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं और सीमावर्ती इलाकों में भय और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति जोसेफ औन का बयान केवल लेबनान की नीति नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक संदेश है। ऐसे समय में जब ईरान, इज़राइल, अमेरिका और विभिन्न क्षेत्रीय शक्तियां आमने-सामने दिखाई दे रही हैं, युद्ध की आग को रोकने के लिए कूटनीति ही सबसे प्रभावी विकल्प मानी जा रही है।
पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति में लेबनान एक बार फिर बड़े भू-राजनीतिक संघर्ष का केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। ऐसे में राष्ट्रपति औन की शांति और संवाद की अपील आने वाले दिनों में क्षेत्रीय कूटनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। फिलहाल दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या युद्धविराम को वास्तविक शांति में बदला जा सकेगा या फिर क्षेत्र एक और बड़े संघर्ष की ओर बढ़ेगा।




