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म्यांमार : हमारी धरती का इस्तेमाल भारत विरोधी ताकतों को नहीं करने देंगे

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 2 जून 2026

भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और पूर्वोत्तर क्षेत्र की स्थिरता को लेकर एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता सामने आई है। म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग ने भारत को स्पष्ट आश्वासन दिया है कि म्यांमार की धरती का इस्तेमाल किसी भी भारत विरोधी संगठन, उग्रवादी समूह या आतंकवादी तत्व को नहीं करने दिया जाएगा। यह आश्वासन उस समय सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और म्यांमार के राष्ट्रपति के बीच नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसमें सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, क्षेत्रीय स्थिरता और रणनीतिक सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के दौरान भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। भारत लंबे समय से इस चिंता को व्यक्त करता रहा है कि कुछ उग्रवादी संगठन म्यांमार के सीमावर्ती क्षेत्रों का इस्तेमाल सुरक्षित ठिकानों के रूप में करते हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग ने दो टूक शब्दों में कहा कि उनकी सरकार किसी भी ऐसी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगी जो भारत की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए खतरा बने। उन्होंने भरोसा दिलाया कि म्यांमार भारत के साथ सुरक्षा सहयोग को और अधिक मजबूत करेगा तथा सीमा पार आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ समन्वित कार्रवाई जारी रखेगा।

दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत केवल सुरक्षा मुद्दों तक सीमित नहीं रही। बैठक में म्यांमार की आंतरिक राजनीतिक स्थिति, लोकतांत्रिक प्रक्रिया, क्षेत्रीय शांति और आर्थिक सहयोग पर भी खुलकर चर्चा हुई। भारत ने म्यांमार में सभी पक्षों के बीच संवाद और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन दोहराया। इस दौरान नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और पूर्व नेता आंग सान सू की की निरंतर हिरासत का मुद्दा भी चर्चा में आया। भारत ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने और राष्ट्रीय सुलह की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

बैठक में दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। विशेष रूप से कलादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट और भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग परियोजना को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। इन परियोजनाओं को भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। इनके पूरा होने से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों से सीधा संपर्क मिलेगा, जिससे व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

एक महत्वपूर्ण निर्णय के तहत भारत ने म्यांमार की सेना को संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों के लिए प्रशिक्षण देने पर भी सहमति जताई है। दोनों देशों का मानना है कि रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में बढ़ता सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करेगा। भारत ने म्यांमार को भरोसा दिलाया कि वह एक विश्वसनीय और दीर्घकालिक साझेदार के रूप में हर क्षेत्र में सहयोग जारी रखेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक ऐसे समय हुई है जब दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। चीन की बढ़ती सक्रियता, सीमा सुरक्षा की चुनौतियां और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच भारत और म्यांमार का मजबूत सहयोग दोनों देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। म्यांमार द्वारा भारत विरोधी गतिविधियों को अपनी धरती पर न पनपने देने का आश्वासन नई दिल्ली के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक और सामरिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि दोनों देशों के बीच हुए समझौतों और आश्वासनों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है तो इससे न केवल भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में शांति और सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि पूरे क्षेत्र में आर्थिक संपर्क, व्यापारिक अवसरों और सामरिक सहयोग का नया अध्याय भी शुरू हो सकता है।

भारत और म्यांमार के बीच हुई यह वार्ता केवल दो देशों के संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षा और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है। आने वाले महीनों में इन समझौतों और प्रतिबद्धताओं का जमीनी असर क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा समीकरणों को नई दिशा दे सकता है।

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