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अमेरिका-ईरान वार्ता बचाने में जुटा कतर, स्विट्जरलैंड के साथ हुई अहम बातचीत

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | दोहा/जिनेवा | 2 जून 2026

पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते युद्ध, लेबनान में तेज होते सैन्य तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच डगमगाती कूटनीतिक प्रक्रिया के बीच कतर ने एक बार फिर मध्यस्थ की भूमिका को सक्रिय कर दिया है। कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जासिम अल थानी ने स्विट्जरलैंड के विदेश विभाग के प्रमुख इग्नाजियो कैसिस से महत्वपूर्ण बातचीत की, जिसमें अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे मध्यस्थता प्रयासों को समर्थन देने पर चर्चा हुई।

सूत्रों के अनुसार यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब ईरान और अमेरिका के बीच संवाद की प्रक्रिया गंभीर दबाव में है। लेबनान में इज़राइली सैन्य कार्रवाई और क्षेत्रीय संघर्ष के विस्तार ने पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिरता के नए दौर में धकेल दिया है। ऐसे माहौल में कतर और स्विट्जरलैंड दोनों इस बात पर जोर दे रहे हैं कि सैन्य टकराव के बजाय कूटनीतिक रास्ते को मजबूत किया जाए।

कतर पिछले कई वर्षों से क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय संकटों में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। चाहे गाजा संघर्ष हो, अमेरिका-ईरान संवाद हो या फिर विभिन्न युद्धविराम समझौते, दोहा लगातार बातचीत और समझौते की राजनीति को आगे बढ़ाने की कोशिश करता रहा है। शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी पहले भी सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि क्षेत्र में स्थायी शांति केवल संवाद और राजनीतिक समाधान से ही संभव है।

विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान समय में कतर की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि एक ओर अमेरिका और ईरान के बीच अविश्वास बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर होर्मुज जलडमरूमध्य, लेबनान और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी खतरा बनता जा रहा है। हाल के दिनों में कतर ने ईरान को यह संदेश भी दिया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य को दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने से संकट और गहरा सकता है तथा सभी पक्षों को मध्यस्थता प्रयासों का समर्थन करना चाहिए।

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स्विट्जरलैंड भी लंबे समय से संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं में एक तटस्थ और भरोसेमंद साझेदार माना जाता है। ऐसे में कतर और स्विट्जरलैंड के बीच हुई यह बातचीत केवल औपचारिक कूटनीतिक संपर्क नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे अमेरिका-ईरान संवाद को जीवित रखने की एक गंभीर कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

इस बीच पश्चिम एशिया में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। ईरान ने लेबनान में बढ़ती सैन्य कार्रवाई को लेकर कड़ा रुख अपनाया है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों में लगे हुए हैं। ऐसे माहौल में कतर की सक्रिय कूटनीति यह संकेत देती है कि आने वाले दिनों में दोहा एक बार फिर पर्दे के पीछे शांति वार्ता का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

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