बिजनेस | सुनील कुमार सिंह | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 27 मई 2026
भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। United States Trade Representative के प्रमुख Jamieson Greer के नेतृत्व में अमेरिकी वार्ताकारों की एक टीम 1 जून से 4 जून तक भारत दौरे पर आएगी। इस दौरान दोनों देशों के बीच प्रस्तावित Interim Trade Agreement की शर्तों को अंतिम रूप देने और व्यापक Bilateral Trade Agreement (BTA) पर आगे की बातचीत की जाएगी। इस बैठक को भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Ministry of Commerce and Industry ने बताया कि दोनों देशों ने 7 फरवरी 2026 को एक साझा ढांचे पर सहमति बनाई थी, जिसके तहत पारस्परिक और लाभकारी व्यापार समझौते की दिशा में काम शुरू किया गया। उसी ढांचे के आधार पर अब अंतरिम समझौते की डिटेल्स तय की जा रही हैं। इसके साथ ही भविष्य में बड़े और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते का रास्ता भी तैयार किया जाएगा।
भारत की सबसे बड़ी चिंता अमेरिकी टैरिफ नीति को लेकर बनी हुई है। भारतीय अधिकारियों और केंद्रीय वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि कोई भी व्यापार समझौता तभी संभव होगा जब यह साफ हो कि अमेरिका भारत के प्रतिस्पर्धी देशों पर किस तरह के टैरिफ लगाने जा रहा है। नई दिल्ली नहीं चाहती कि भारतीय उद्योगों को ऐसे समझौते में नुकसान उठाना पड़े, जहां अन्य देशों को ज्यादा व्यापारिक लाभ मिल जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं बल्कि रणनीतिक साझेदारी का भी हिस्सा है। चीन के बढ़ते आर्थिक प्रभाव, वैश्विक सप्लाई चेन संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका भारत को एक भरोसेमंद आर्थिक और रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है। दूसरी ओर भारत भी अमेरिकी बाजार, टेक्नोलॉजी और निवेश तक अधिक पहुंच चाहता है।
सूत्रों के मुताबिक इस वार्ता में डिजिटल व्यापार, कृषि उत्पाद, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, मैन्युफैक्चरिंग और टैरिफ कटौती जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। खासतौर पर भारतीय दवाइयों, आईटी सेवाओं और इंजीनियरिंग उत्पादों को अमेरिकी बाजार में अधिक अवसर दिलाने पर भारत का फोकस रहेगा। वहीं अमेरिका कृषि, ई-कॉमर्स और हाई-टेक सेक्टर में ज्यादा बाजार पहुंच चाहता है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह अंतरिम समझौता सफल होता है तो दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध नई ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं। इससे भारत में विदेशी निवेश, निर्यात और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही वैश्विक कंपनियों के लिए भारत एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन हब के रूप में और मजबूत होकर उभर सकता है।
हालांकि बातचीत आसान नहीं मानी जा रही। दोनों देशों के बीच टैरिफ, डेटा नियम, कृषि सब्सिडी और बाजार पहुंच को लेकर पहले भी कई मतभेद सामने आते रहे हैं। लेकिन मौजूदा वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियों में दोनों पक्ष समझौते की दिशा में तेजी से आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
अब सबकी नजर जून की इस अहम वार्ता पर टिक गई है, क्योंकि यह केवल व्यापारिक समझौता नहीं बल्कि दुनिया की दो बड़ी लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाओं के बीच भविष्य की आर्थिक साझेदारी की नई पटकथा भी साबित हो सकता है।




