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CBSE ने खारिज किए पोर्टल हैक होने के दावे! ऑनस्क्रीन मार्किंग सिस्टम पर उठे सवालों से मचा हड़कंप

शिक्षा | मोबनी मजूमदार | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 27 मई 2026

देशभर में 12वीं के छात्रों के अंकों को लेकर उठे विवाद के बीच Central Board of Secondary Education यानी CBSE ने अपने Onscreen Marking System (OSM) पोर्टल के हैक या समझौता किए जाने के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। बोर्ड ने साफ कहा है कि उसकी डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है और पोर्टल से किसी तरह की छेड़छाड़ या डेटा लीक होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। हालांकि यह सफाई ऐसे समय आई है जब कई छात्रों और अभिभावकों ने मूल्यांकन में गंभीर गड़बड़ियों का आरोप लगाया है और एक एथिकल हैकर ने दावा किया है कि उसने फरवरी में ही इस पोर्टल की कमजोरियों को उजागर कर CERT-In को शिकायत भेजी थी।

CBSE का OSM पोर्टल वह डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके जरिए परीक्षक छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी ऑनलाइन जांचते हैं। हाल ही में कई छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन के लिए उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी मंगवाई, जिसके बाद कथित तौर पर कई “सही जवाबों” को गलत अंक दिए जाने और कुछ उत्तरों की जांच तक न होने के आरोप सामने आए। सोशल मीडिया पर छात्रों और अभिभावकों ने दावा किया कि कई कॉपियों में पन्ने गायब थे, कुछ उत्तरों को देखा ही नहीं गया और कहीं-कहीं कुल अंक जोड़ने में भी गड़बड़ी मिली। इन घटनाओं के बाद CBSE की डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई।

विवाद उस समय और बढ़ गया जब एक एथिकल हैकर ने दावा किया कि उसने फरवरी 2026 में OSM पोर्टल में संभावित सुरक्षा खामियों का पता लगाया था और इसकी जानकारी CERT-In को दी थी। उसके मुताबिक पोर्टल में ऐसी कमजोरियां थीं जिनका दुरुपयोग कर डेटा तक पहुंच बनाई जा सकती थी। हालांकि CBSE ने इन दावों को “भ्रामक और निराधार” बताते हुए कहा है कि बोर्ड की तकनीकी टीम ने पूरे सिस्टम की समीक्षा की है और किसी भी प्रकार के साइबर हमले या डेटा से समझौते के संकेत नहीं मिले हैं।

इस पूरे विवाद ने देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। विपक्षी दलों और कई शिक्षा विशेषज्ञों ने भी CBSE की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कुछ नेताओं ने शिक्षा मंत्रालय से जवाब मांगा है और कहा है कि यदि छात्रों के भविष्य से जुड़ी परीक्षा प्रणाली में तकनीकी गड़बड़ी हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं कई शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की जरूरत है ताकि छात्रों का भरोसा बना रहे।

विशेषज्ञों के अनुसार ऑनस्क्रीन मार्किंग सिस्टम का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और मानवीय त्रुटियों से मुक्त बनाना था, लेकिन यदि तकनीकी या संचालन संबंधी लापरवाही सामने आती है तो इसका सीधा असर लाखों छात्रों के भविष्य पर पड़ सकता है। यही वजह है कि यह मुद्दा अब केवल तकनीकी विवाद नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का सवाल बन चुका है।

CBSE ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और बोर्ड की आधिकारिक प्रक्रिया पर भरोसा रखें। बोर्ड का कहना है कि जहां भी पुनर्मूल्यांकन के दौरान त्रुटियां पाई जा रही हैं, वहां नियमों के अनुसार सुधार किया जा रहा है। लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतों ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि देश की सबसे बड़ी स्कूली परीक्षा प्रणाली को अब तकनीकी सुरक्षा और मूल्यांकन पारदर्शिता के मोर्चे पर बड़े सुधारों की जरूरत पड़ सकती है।

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