राजनीति/ कर्नाटक | महेंद्र सिंह | ABC NATIONAL NEWS | बेंगलुरु / नई दिल्ली | 26 मई 2026
कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से जारी सत्ता संघर्ष अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस हाईकमान ने आखिरकार उपमुख्यमंत्री DK Shivakumar के पक्ष में बड़ा फैसला ले लिया है और मुख्यमंत्री Siddaramaiah के इस्तीफे की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक अगले दो से तीन दिनों के भीतर सिद्धारमैया अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं, जिसके बाद डीके शिवकुमार की ताजपोशी का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा। बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व ने सिद्धारमैया को राज्यसभा भेजने के साथ-साथ दिल्ली में बड़ी राष्ट्रीय जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव भी दिया है। हालांकि उन्होंने इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लेने के लिए थोड़ा समय मांगा है, लेकिन राजनीतिक संकेत साफ बता रहे हैं कि कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन लगभग तय हो चुका है।
दरअसल यह पूरा घटनाक्रम 2023 विधानसभा चुनावों के बाद बने उस राजनीतिक फार्मूले से जुड़ा हुआ माना जा रहा है, जिसमें ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री पद को लेकर अंदरखाने सहमति बनने की चर्चाएं सामने आई थीं। चुनाव जीतने के बाद डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन कांग्रेस हाईकमान ने अनुभव, जातीय समीकरण और प्रशासनिक पकड़ को ध्यान में रखते हुए सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाया। बदले में शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री पद देकर भविष्य में सत्ता हस्तांतरण का भरोसा दिया गया था। पिछले कई महीनों से शिवकुमार समर्थक लगातार इस वादे को लागू करने का दबाव बना रहे थे और अब लगता है कि हाईकमान ने आखिरकार उस वादे को पूरा करने का मन बना लिया है।
दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व की हुई छह घंटे लंबी मैराथन बैठक के बाद अचानक राजनीतिक हलचल तेज हो गई। पार्टी महासचिव K. C. Venugopal ने सार्वजनिक रूप से यह कहकर अटकलों को खारिज करने की कोशिश की कि बैठक केवल राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों को लेकर थी, लेकिन अंदरखाने से जो खबरें सामने आईं उन्होंने पूरे राजनीतिक घटनाक्रम को नई दिशा दे दी। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस हाईकमान के अधिकांश वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार के पक्ष में दिखाई दिए और सत्ता परिवर्तन को लेकर लगभग सहमति बन गई। यही वजह है कि अब कर्नाटक कांग्रेस के भीतर भी नई राजनीतिक हलचल साफ महसूस की जा रही है।
कांग्रेस नेतृत्व इस पूरे बदलाव को केवल सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि भविष्य की राजनीतिक रणनीति के रूप में देख रहा है। डीके शिवकुमार को संगठन को जमीन पर मजबूत करने वाला नेता माना जाता है। उन्होंने कर्नाटक में कांग्रेस को दोबारा सत्ता में लाने के लिए पर्दे के पीछे बेहद अहम भूमिका निभाई थी। वहीं सिद्धारमैया की पिछड़े वर्गों में मजबूत पकड़ और प्रशासनिक अनुभव कांग्रेस की बड़ी ताकत रही है। ऐसे में पार्टी दोनों नेताओं के बीच संतुलन बनाकर किसी बड़े असंतोष या टूट की संभावना को खत्म करना चाहती है। यही कारण है कि सिद्धारमैया को राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका देने की तैयारी की जा रही है ताकि उनका कद और प्रभाव दोनों बरकरार रहें।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बनते हैं तो यह कांग्रेस के लिए दक्षिण भारत में नई राजनीतिक ऊर्जा का संकेत होगा। कांग्रेस इस बदलाव को युवा नेतृत्व, संगठनात्मक मजबूती और भविष्य की रणनीति के रूप में पेश कर सकती है। वहीं भाजपा और H. D. Kumaraswamy के नेतृत्व वाली जनता दल (सेक्युलर) भी कांग्रेस के इस अंदरूनी समीकरण पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि सत्ता परिवर्तन का असर राज्य की आगामी राजनीतिक दिशा पर भी पड़ सकता है।
अब पूरे देश की निगाहें कर्नाटक पर टिक गई हैं। अगर अगले 48 से 72 घंटों के भीतर सिद्धारमैया इस्तीफा देते हैं, तो राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होगा और डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते नजर आ सकते हैं। कांग्रेस इस बदलाव के जरिए यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि पार्टी अपने नेताओं से किए गए राजनीतिक वादों को निभाना जानती है और दक्षिण भारत में अपनी पकड़ को और मजबूत करने के लिए बड़े फैसले लेने से पीछे नहीं हटती।




