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ईरान-इजरायल तनाव के बीच कतर में बड़ी हलचल, समझौते की कोशिशों में जुटे वार्ताकार

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | दोहा/तेहरान | 26 मई 2026

मध्य पूर्व में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच अब पूरी दुनिया की नजर कतर पर टिक गई है, जहां ईरान ने अपने वरिष्ठ वार्ताकारों का प्रतिनिधिमंडल भेजा है। यह टीम अमेरिका के साथ संभावित शांति समझौते, होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान के समृद्ध यूरेनियम जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत कर रही है। हालांकि बातचीत में कुछ प्रगति की बात कही जा रही है, लेकिन हालात अभी भी बेहद जटिल बने हुए हैं।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत में कई मुद्दों पर सहमति बनने लगी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि समझौता जल्द होने वाला है। दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि अगर समझौता हुआ तो वह “बेहद बड़ा और ऐतिहासिक” होगा, लेकिन अगर शर्तें पूरी नहीं हुईं तो “कोई समझौता नहीं होगा।”

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर हो रही है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है और अगर यहां तनाव बढ़ता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। यही वजह है कि खाड़ी देशों में बेचैनी बढ़ गई है। सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों ने अपने तेल निर्यात के वैकल्पिक रास्ते तलाशने शुरू कर दिए हैं, जबकि कतर, कुवैत और बहरीन जैसे देश अब भी इस समुद्री रास्ते पर काफी निर्भर हैं।

उधर इजरायल ने लेबनान के दक्षिणी इलाकों में हवाई हमले तेज कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, टायर और नबातियेह क्षेत्रों में कई बमबारी हुई, जिसमें लोगों की मौत और कई इमारतों के तबाह होने की खबर है। इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने साफ कहा है कि हिज्बुल्लाह पर दबाव और बढ़ाया जाएगा और सैन्य कार्रवाई नहीं रुकेगी। इससे पूरे क्षेत्र में युद्ध और फैलने का खतरा गहरा गया है।

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इसी बीच अमेरिका अब ईरान वार्ता को “अब्राहम अकॉर्ड्स” से जोड़ने की कोशिश कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन एक ऐसा व्यापक समझौता चाहता है जिसमें सिर्फ ईरान नहीं बल्कि अरब देशों और इजरायल के रिश्तों को भी नई दिशा दी जाए। अमेरिका चाहता है कि सऊदी अरब और कतर जैसे देश इजरायल के साथ खुले संबंधों की दिशा में आगे बढ़ें, ताकि पश्चिम एशिया में नया शक्ति संतुलन बनाया जा सके।

हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ईरान में पिछले 87 दिनों से इंटरनेट पर भारी पाबंदियां लगी हुई थीं, जिन्हें अब धीरे-धीरे हटाने का आदेश दिया गया है। युद्ध और प्रतिबंधों के बीच आम लोगों की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई है और कारोबार ठप पड़ने लगे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कुछ दिन बेहद अहम साबित हो सकते हैं। अगर कतर में चल रही बातचीत सफल होती है तो पश्चिम एशिया को एक बड़े युद्ध से बचाया जा सकता है। लेकिन अगर वार्ता टूटती है, तो होर्मुज से लेकर लेबनान और गाजा तक पूरा इलाका और ज्यादा हिंसा की आग में झुलस सकता है।

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