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केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी पर मंच से हमला, भाषण के दौरान फेंके गए पत्थर; सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

राजनीति / बिहार | ABC NATIONAL NEWS | गया | 23 मई 2026

बिहार के गया जिले में केंद्रीय मंत्री और हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख जीतनराम मांझी पर एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान हमला किए जाने से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया। खिजरसराय क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम में जब मांझी मंच से लोगों को संबोधित कर रहे थे, तभी उनकी ओर पत्थर फेंके गए। हालांकि पत्थर उनके पास गिरा और वह बाल-बाल बच गए, लेकिन इस घटना ने उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना के बाद कार्यक्रम स्थल पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने तुरंत स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने दो नाबालिग लड़कों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पत्थरबाजी के पीछे क्या कारण था और क्या यह किसी साजिश का हिस्सा था।

घटना के समय कार्यक्रम स्थल पर स्थानीय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है।

इस हमले ने इसलिए भी चिंता बढ़ा दी है क्योंकि हाल के दिनों में जीतनराम मांझी और उनके परिवार को लेकर पहले भी विवाद और धमकियों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कुछ दिन पहले उनकी समधन और HAM विधायक ज्योति देवी के साथ भी कथित दुर्व्यवहार और हाथापाई की घटना हुई थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर मांझी को खुलेआम धमकी देने वाला वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस ने बाद में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था।

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घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए जीतनराम मांझी ने कहा कि कुछ लोग अच्छा काम नहीं होने देना चाहते। उन्होंने कहा कि वह ठीक हैं और उन्हें कोई चोट नहीं पहुंची है। हालांकि राजनीतिक हलकों में इसे केवल एक “शरारती घटना” मानने के बजाय सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में चुनावी और सामाजिक तनाव के माहौल में वरिष्ठ नेताओं की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत है। खासकर तब, जब सोशल मीडिया पर धमकियों और राजनीतिक आक्रामकता की घटनाएं लगातार बढ़ रही हों।

राजनीतिक दलों ने भी इस घटना की निंदा की है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। कई नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति हो सकती है, लेकिन हिंसा या डराने-धमकाने की राजनीति स्वीकार नहीं की जा सकती।

इस घटना के बाद बिहार में वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक कार्यक्रमों में सुरक्षा प्रबंधन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

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