राजनीति / केरल | ABC NATIONAL NEWS | तिरुवनंतपुरम | 20 मई 2026
केरल में नई यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) सरकार के गठन के बाद अब मंत्रालयों का बंटवारा भी आधिकारिक रूप से सामने आ गया है। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने अपने पास वित्त, कानून और बंदरगाह जैसे महत्वपूर्ण विभाग रखे हैं, जबकि वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला को गृह और सतर्कता विभाग सौंपा गया है। वहीं इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) इस बार सरकार में पहले से अधिक मजबूत स्थिति में उभरकर सामने आई है। मुस्लिम लीग को सामान्य शिक्षा, उद्योग, आईटी, स्थानीय निकाय, ग्रामीण विकास और मत्स्य जैसे कई प्रभावशाली विभाग मिले हैं, जिसने राज्य की सत्ता संरचना में उसकी बढ़ती राजनीतिक ताकत को स्पष्ट कर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मंत्रालय बंटवारा केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि केरल की गठबंधन राजनीति के भीतर शक्ति संतुलन का संकेत भी है। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में पीछे रह गए रमेश चेन्निथला को गृह विभाग देकर कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें संतुष्ट करने की कोशिश की है, जबकि मुख्यमंत्री सतीशन ने वित्त विभाग अपने पास रखकर यह स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकार की आर्थिक दिशा और नीति निर्माण पर अंतिम नियंत्रण उन्हीं के हाथ में रहेगा। सतीशन सरकार ऐसे समय सत्ता में आई है जब केरल गंभीर वित्तीय दबाव, बेरोजगारी, कर्ज संकट और विकास परियोजनाओं पर राजनीतिक विवादों का सामना कर रहा है। ऐसे में वित्त विभाग को मुख्यमंत्री द्वारा अपने पास रखना एक रणनीतिक फैसला माना जा रहा है।
इस पूरे मंत्रालय बंटवारे में सबसे अधिक चर्चा मुस्लिम लीग की बढ़ती ताकत को लेकर हो रही है। IUML ने न केवल सामान्य शिक्षा विभाग अपने पास बनाए रखा, बल्कि उद्योग, आईटी और ग्रामीण विकास जैसे विभाग भी हासिल किए। पी.के. कुन्हालीकुट्टी को उद्योग, आईटी, खनन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्टार्टअप्स जैसे भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े विभाग दिए गए हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह केवल पारंपरिक गठबंधन साझेदारी नहीं, बल्कि UDF सरकार में मुस्लिम लीग की निर्णायक भूमिका का संकेत है। कई रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि मुख्यमंत्री चयन प्रक्रिया में IUML का समर्थन सतीशन के पक्ष में निर्णायक रहा।
कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच सामान्य शिक्षा विभाग को लेकर काफी खींचतान चली थी। कांग्रेस इस विभाग को वापस अपने पास लाना चाहती थी, लेकिन अंततः IUML इसे बचाने में सफल रही। यही नहीं, स्थानीय निकाय और ग्रामीण विकास जैसे विभाग भी कांग्रेस को छोड़ने पड़े। इससे यह धारणा मजबूत हुई है कि UDF सरकार में मुस्लिम लीग अब केवल सहयोगी दल नहीं, बल्कि सत्ता का प्रमुख शक्ति केंद्र बन चुकी है। केरल की राजनीति में यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस के भीतर नेतृत्व संघर्ष और संगठनात्मक कमजोरी लगातार चर्चा का विषय रहे हैं।
नई सरकार के गठन के साथ ही विपक्ष और दक्षिणपंथी संगठनों ने भी मुस्लिम लीग की बढ़ती भूमिका को मुद्दा बनाना शुरू कर दिया है। कुछ आलोचकों का आरोप है कि UDF सरकार में IUML को “असामान्य प्रभाव” दिया गया है, जबकि UDF नेतृत्व का कहना है कि यह गठबंधन सहयोग और चुनावी प्रदर्शन के आधार पर स्वाभाविक साझेदारी है। स्वयं वी.डी. सतीशन ने हाल में कहा था कि मुस्लिम लीग UDF की “मुख्य और ऐतिहासिक सहयोगी” है और उसके खिलाफ चलाए जा रहे “नफरत अभियानों” को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि नई UDF सरकार आर्थिक संकट, बेरोजगारी, शिक्षा सुधार और बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दों पर कितना प्रभावी प्रदर्शन कर पाती है। लेकिन इतना तय है कि मंत्रालयों के इस बंटवारे ने केरल की राजनीति में एक नया शक्ति संतुलन स्थापित कर दिया है, जिसमें मुख्यमंत्री सतीशन प्रशासनिक नियंत्रण के केंद्र में हैं और मुस्लिम लीग सरकार के भीतर सबसे प्रभावशाली सहयोगी के रूप में उभरी है।




