बिजनेस / अंतरराष्ट्रीय कॉरपोरेट मामला | सुनील कुमार सिंह | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली / न्यूयॉर्क | 19 मई 2026
भारत के प्रमुख उद्योगपति गौतम अडानी और अडानी समूह के लिए बड़ी कानूनी राहत सामने आई है। अमेरिकी न्याय विभाग (U.S. Department of Justice) ने गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ चल रहे सभी आपराधिक मामलों और आरोपों को स्थायी रूप से वापस लेने का फैसला किया है। न्यूयॉर्क में चल रहा यह हाई-प्रोफाइल सिक्योरिटीज और वायर फ्रॉड मामला अब पूरी तरह बंद हो गया है। अमेरिकी जांच एजेंसियों के इस फैसले को अडानी समूह के लिए बड़ी कानूनी और कारोबारी जीत माना जा रहा है।रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी अभियोजकों ने जांच के दौरान पाया कि आरोपों को अदालत में टिकाए रखने के लिए पर्याप्त और स्पष्ट अमेरिकी लिंक या सबूत मौजूद नहीं हैं। इसी आधार पर न्याय विभाग ने मामला आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों ने लंबे समय तक वित्तीय लेन-देन, निवेश संरचनाओं और अंतरराष्ट्रीय कारोबारी कड़ियों की जांच की, लेकिन वे ऐसे निर्णायक प्रमाण नहीं जुटा सके जिनके आधार पर आपराधिक मुकदमे को मजबूत किया जा सके।
इस फैसले के साथ ही अडानी समूह से जुड़े कई अन्य अमेरिकी नियामकीय और कानूनी मामलों के भी बंद होने की जानकारी सामने आई है। पिछले कुछ वर्षों में अडानी समूह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई जांचों, रिपोर्टों और आरोपों के कारण लगातार सुर्खियों में रहा था। खासकर अमेरिकी निवेश और वित्तीय नियमों से जुड़े मामलों को लेकर वैश्विक बाजारों की निगाहें इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई थीं। ऐसे में अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा सभी आरोप वापस लेना कारोबारी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, गौतम अडानी ने 6 मिलियन डॉलर और सागर अडानी ने 12 मिलियन डॉलर के भुगतान पर सहमति जताई थी, हालांकि इसमें किसी भी प्रकार की गलती स्वीकार नहीं की गई। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के समझौते कई बार लंबी और जटिल कानूनी प्रक्रियाओं से बचने के लिए किए जाते हैं और इन्हें दोष स्वीकार करने के रूप में नहीं देखा जाता।
इस घटनाक्रम के बाद अडानी समूह के निवेशकों और शेयर बाजार में भी सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। पिछले कुछ वर्षों में समूह के खिलाफ लगे आरोपों और अंतरराष्ट्रीय जांचों का असर उसकी बाजार साख और निवेशकों के विश्वास पर पड़ा था। अब जब अमेरिकी न्याय विभाग ने मामला स्थायी रूप से बंद कर दिया है, तो इसे समूह के लिए “क्लीन चिट” जैसे बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक स्तर पर भी इस फैसले के दूरगामी असर माने जा रहे हैं। विपक्ष लंबे समय से अडानी समूह और केंद्र सरकार के संबंधों को लेकर सवाल उठाता रहा है। संसद से लेकर चुनावी मंचों तक अडानी मुद्दा लगातार राजनीतिक बहस का केंद्र बना रहा। ऐसे में अमेरिकी जांच एजेंसियों द्वारा मामला बंद किए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। बीजेपी और सरकार समर्थक इसे विपक्ष के आरोपों की “हार” और “झूठे नैरेटिव” की पराजय बता सकते हैं, जबकि विपक्ष इस फैसले के बावजूद कॉरपोरेट पारदर्शिता और राजनीतिक जवाबदेही के सवाल उठाता रह सकता है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल अडानी समूह के लिए ही नहीं बल्कि भारतीय कॉरपोरेट जगत के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत है। वैश्विक निवेशक अब इस बात पर नजर रखेंगे कि क्या इससे भारतीय कंपनियों में विदेशी निवेश और भरोसा बढ़ता है। खासकर ऐसे समय में जब भारत खुद को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और वैश्विक निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।
फिलहाल इतना तय है कि अमेरिकी न्याय विभाग के इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय कारोबारी और राजनीतिक हलकों में बड़ा संदेश दिया है। अब निगाहें इस बात पर होंगी कि अडानी समूह आने वाले समय में अपनी वैश्विक रणनीति, निवेश योजनाओं और विस्तार को किस तरह आगे बढ़ाता है।




